उज्जैन के खड़े हनुमान जी की प्रतिमा क्यों नहीं हिली? IIT इंदौर करेगी जांच

Editorial
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उज्जैन मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर इन दिनों श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत मंदिर के मुख्य ढांचे को हटाए जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल हनुमान जी की प्राचीन प्रतिमा को लेकर खड़ा हो गया है। तमाम मशीनों और तकनीकी प्रयासों के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हट सकी है।प्रतिमा को हटाने की कोशिश के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर पहुंच रहे हैं। लोगों में प्रतिमा के प्रति आस्था और जिज्ञासा दोनों बढ़ गई हैं। वहीं, प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि सड़क चौड़ीकरण का काम भी प्रभावित न हो और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए प्रतिमा को सुरक्षित रखने का रास्ता भी निकाला जाए।

करीब 170 साल पुराने मंदिर का मामला

बताया जा रहा है कि खड़े हनुमान मंदिर का मुख्य ढांचा लगभग 170 साल पुराना है। मंदिर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा को बेसाल्ट पत्थर से निर्मित बताया जाता है। इसकी स्थापत्य शैली को परमार कालीन परंपरा से जुड़ा माना जाता है।सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत मंदिर के मुख्य ढांचे को हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, लेकिन प्रतिमा को स्थानांतरित करने में तकनीकी अड़चन सामने आ गई। आधुनिक मशीनों और उपकरणों की मदद से प्रयास किए जाने के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली।प्रतिमा के इस तरह जमीन से जुड़े रहने के कारण स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है।

दर्शन के लिए पहुंच रहे बड़ी संख्या में श्रद्धालु

प्रतिमा को हटाने की कोशिश की जानकारी सामने आने के बाद मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी। लोग हनुमान जी के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और पूरे मामले को लेकर अपनी-अपनी आस्था व्यक्त कर रहे हैं।मंदिर परिसर में साधु-संतों की मौजूदगी भी देखी गई। कुछ लोगों ने प्रतिमा को हटाने की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई, जबकि हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्राचीन धार्मिक स्थल से जुड़े किसी भी फैसले में श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।इस बीच मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में वानरों के पहुंचने की बात भी सामने आई है, जिससे श्रद्धालुओं के बीच कौतूहल और बढ़ गया।

प्रतिमा क्यों नहीं हिल रही? अब IIT इंदौर की मदद

प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने की तकनीकी समस्या का समाधान खोजने के लिए प्रशासन ने IIT इंदौर के विशेषज्ञों की मदद ली है। विशेषज्ञों की टीम ने मंदिर परिसर पहुंचकर प्रतिमा और उसकी नींव का तकनीकी निरीक्षण किया।बताया गया कि विशेषज्ञों ने विशेष उपकरणों की सहायता से करीब दो घंटे तक प्रतिमा की नींव, उसकी गहराई और संरचना से जुड़े पहलुओं की जांच की। इस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्रतिमा जमीन के भीतर किस तरह स्थापित है और उसे बिना नुकसान पहुंचाए आगे की कार्रवाई किस तरीके से की जा सकती है।

प्राचीन इंटरलॉकिंग तकनीक का अनुमान

तकनीकी जांच के दौरान विशेषज्ञों की ओर से यह संभावना जताई गई कि प्रतिमा को स्थापित करने में प्राचीन कारीगरों द्वारा विशेष इंटरलॉकिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। इसी वजह से आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल के बावजूद प्रतिमा को आसानी से हटाना संभव नहीं हो रहा।हालांकि अंतिम निष्कर्ष IIT इंदौर की तकनीकी जांच और स्कैनिंग रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि प्रतिमा को जमीन से किस तकनीक से स्थापित किया गया था।

स्कैनिंग रिपोर्ट के बाद होगा अंतिम फैसला

नगर निगम और प्रशासन के सामने फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता प्रतिमा की सुरक्षा बताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, IIT इंदौर की टीम की रिपोर्ट मिलने के बाद तकनीकी तथ्यों का अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद ही प्रतिमा को स्थानांतरित करने या किसी अन्य विकल्प पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।प्रशासन के लिए यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि एक तरफ शहर में सड़क चौड़ीकरण की परियोजना चल रही है, वहीं दूसरी ओर मंदिर और प्राचीन प्रतिमा श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी हुई है।ऐसे में किसी भी निर्णय में तकनीकी सुरक्षा के साथ धार्मिक और स्थानीय भावनाओं का भी ध्यान रखना जरूरी होगा।

उज्जैन के खड़े हनुमान जी की प्रतिमा क्यों नहीं हिली
उज्जैन के खड़े हनुमान जी की प्रतिमा क्यों नहीं हिली

साधु-संतों और स्थानीय लोगों की आपत्तियां

प्रतिमा को हटाने की प्रक्रिया को लेकर साधु-संतों और स्थानीय लोगों की ओर से आपत्तियां भी सामने आई हैं। लोगों का कहना है कि मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को देखते हुए जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए।वहीं प्रशासन का रुख फिलहाल तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार करने का है। माना जा रहा है कि विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित किया जा सकता है या फिर सड़क चौड़ीकरण परियोजना में किसी अन्य विकल्प पर विचार करना होगा।

आस्था और विकास के बीच संतुलन की चुनौती

उज्जैन का यह मामला अब केवल सड़क चौड़ीकरण से जुड़ा तकनीकी विषय नहीं रह गया है। प्राचीन मंदिर, श्रद्धालुओं की आस्था, स्थानीय लोगों की भावनाएं और शहर के विकास की जरूरत—इन सभी के बीच प्रशासन को संतुलन बनाना होगा।फिलहाल खड़े हनुमान जी की प्रतिमा के दर्शन के लिए लगातार श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। IIT इंदौर की तकनीकी जांच और आने वाली रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हैं। रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन आगे की रणनीति तय करेगा।यानी उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर में प्रतिमा को लेकर बना असमंजस अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अब तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगी कि प्राचीन प्रतिमा को सुरक्षित रखते हुए सड़क चौड़ीकरण की परियोजना को किस तरह आगे बढ़ाया जाए।

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