रिपोर्ट :दीपचंद्र दीक्षित
फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में करीब नौ महीने पहले हुए 10 वर्षीय आशुतोष गुप्ता हत्याकांड का अब तक खुलासा न होने से पीड़ित परिवार में आक्रोश है। थाना जहानगंज क्षेत्र के ग्राम करिखेड़ा निवासी चंद्र प्रकाश गुप्ता के 10 वर्षीय बेटे आशुतोष गुप्ता की कथित तौर पर अपहरण के बाद हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद से परिवार लगातार न्याय और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहा है। परिजनों का आरोप है कि लंबा समय बीत जाने के बावजूद पुलिस इस मामले की गुत्थी सुलझाने में नाकाम रही है।गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फर्रुखाबाद दौरे के दौरान पीड़ित परिवार ने उनसे मुलाकात कर अपनी पीड़ा बताने और हत्याकांड के खुलासे की मांग करने का प्रयास किया। हालांकि, परिवार का आरोप है कि मुख्यमंत्री से मिलने की जानकारी पुलिस को मिलने के बाद उनके घर के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
नौ महीने बाद भी नहीं मिला न्याय
आशुतोष गुप्ता की हत्या की घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी थी। महज 10 साल के बच्चे की कथित अपहरण के बाद हत्या से परिवार और ग्रामीणों में गहरा आक्रोश पैदा हुआ था। परिजनों को उम्मीद थी कि पुलिस जल्द ही मामले का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार करेगी, लेकिन करीब नौ महीने गुजरने के बाद भी परिवार को वह जवाब नहीं मिल सका, जिसका उसे इंतजार है।परिजनों का कहना है कि मामले की जांच को लेकर वे लगातार अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं। परिवार चाहता है कि पुलिस हत्याकांड की जांच को गंभीरता से आगे बढ़ाए और घटना में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश
गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फर्रुखाबाद आगमन की जानकारी के बाद पीड़ित परिवार ने उनसे मिलने का प्रयास किया। परिवार की मंशा थी कि मुख्यमंत्री के सामने आशुतोष हत्याकांड की पूरी बात रखी जाए और मामले में जल्द कार्रवाई की मांग की जाए।परिवार के मुताबिक, वे मुख्यमंत्री से मिलकर यह जानना चाहते थे कि आखिर नौ महीने बाद भी मासूम की हत्या का राज क्यों नहीं खुल पाया है। परिजनों ने मुख्यमंत्री से मामले में सीधे हस्तक्षेप करने और जांच में तेजी लाने की मांग करने का फैसला किया था।लेकिन परिवार का आरोप है कि मुख्यमंत्री से मुलाकात की कोशिश से पहले ही उनके घर के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
पुलिस पर मां से अभद्रता का आरोप
पीड़ित परिवार ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का दावा है कि जब मृतक आशुतोष की मां घर से बाहर निकलकर मुख्यमंत्री से मिलने जाने का प्रयास कर रही थीं, उसी दौरान थाना जहानगंज की एसएचओ पूनम अवस्थी ने उनके साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया।परिजनों ने आरोप लगाया कि महिला के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई। परिवार के इस आरोप के बाद मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने विरोध जताया, जिससे कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई।हालांकि पुलिस पर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटनास्थल पर वास्तव में क्या हुआ था।
ग्रामीणों में भी आक्रोश
आशुतोष हत्याकांड को लेकर ग्रामीणों में भी नाराजगी बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि एक बच्चे की हत्या जैसे गंभीर मामले में लंबे समय तक खुलासा नहीं होना चिंता का विषय है। उनका कहना है कि पीड़ित परिवार लगातार न्याय की उम्मीद में अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है।ग्रामीणों ने मांग की है कि पुलिस मामले की जांच में तेजी लाए और यदि वर्तमान जांच से कोई ठोस नतीजा नहीं निकल रहा है तो उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। इसके साथ ही परिवार को सुरक्षा और न्याय का भरोसा दिलाया जाए।
डीजीपी से भी हस्तक्षेप की मांग
पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ पुलिस महानिदेशक से भी मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। परिवार चाहता है कि आशुतोष हत्याकांड की जांच की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए और अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी परिजनों को दी जाए।परिजनों ने यह भी मांग की है कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जाए। परिवार का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि मामले में ठोस कार्रवाई और न्याय चाहिए।
पुलिस की भूमिका पर उठ रहे सवाल
करीब नौ महीने तक हत्याकांड का खुलासा नहीं होने को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, किसी जांच की सफलता या विफलता का अंतिम आकलन आधिकारिक जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्हें अब तक यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ी और पुलिस को मामले में क्या महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। परिवार की मांग है कि जांच की प्रगति से उन्हें अवगत कराया जाए और दोषियों तक पहुंचने के लिए हर संभव प्रयास किया जाए।
परिवार को अब कार्रवाई का इंतजार
आशुतोष के परिवार के लिए नौ महीने का इंतजार बेहद मुश्किल रहा है। परिजनों का कहना है कि बच्चे की हत्या का दर्द आज भी उनके साथ है और जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलती, उन्हें न्याय नहीं मिलेगा।अब परिवार ने मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक से मामले में हस्तक्षेप की अपील की है। साथ ही पुलिस पर लगाए गए अभद्रता और मारपीट के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।फिलहाल पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 10 वर्षीय आशुतोष गुप्ता की हत्या का राज कब खुलेगा और परिवार को न्याय कब मिलेगा। पीड़ित परिवार की नजर अब शासन और पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
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