राजगढ़/ब्यावरा मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा की अजनार नदी की सफाई इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक चर्चा का विषय बनी हुई है। कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर बिट्टू तबाही नाम से चर्चित युवक का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उसने दावा किया था कि उसने अकेले अजनार नदी की सफाई कर दी। वीडियो सामने आने के बाद उद्योगपति आनंद महिंद्रा, क्रिकेटर केविन पीटरसन और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत कई लोगों ने उसकी सराहना की। मुख्यमंत्री ने भोपाल में उसे प्रमाणपत्र देकर सम्मानित भी किया।हालांकि अब इस दावे को लेकर स्थानीय लोगों और ब्यावरा नगरपालिका की ओर से अलग तस्वीर सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब 10 किलोमीटर लंबी नदी की पूरी सफाई अकेले एक व्यक्ति द्वारा किया जाना सवाल खड़ा करता है। वहीं, नगरपालिका के सीएमओ ने भी सफाई अभियान को लेकर अलग जानकारी दी है।
सोशल मीडिया वीडियो से चर्चा में आया मामला
बिट्टू तबाही के अजनार नदी से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। वीडियो में नदी को साफ दिखाई देने के बाद लोगों ने बिट्टू के प्रयास की सराहना की। इसके बाद यह मामला व्यापक स्तर पर चर्चा में आया और कई प्रमुख लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से उसकी तारीफ की।मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से भी बिट्टू को सम्मानित किए जाने की बात सामने आई। इससे नदी की सफाई का यह अभियान प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया।लेकिन अब स्थानीय स्तर पर इस दावे की वास्तविकता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
स्थानीय निवासी मुकेश शर्मा और श्याम दांगी का कहना है कि अजनार नदी की लंबाई करीब 10 किलोमीटर है। ऐसे में एक व्यक्ति द्वारा अकेले पूरी नदी को साफ करने के दावे पर सवाल उठना स्वाभाविक है।स्थानीय लोगों के मुताबिक, नदी में 12 से अधिक छोटे-बड़े नाले आकर मिलते हैं। इन नालों के जरिए लगातार पन्नी, कचरा और मलबा नदी तक पहुंचता है। उनका कहना है कि नदी की सफाई को केवल एक वीडियो के आधार पर पूरी तरह साफ हो चुकी मानना सही नहीं होगा।स्थानीय लोगों ने नदी के किनारे अब भी मौजूद कचरे की ओर भी ध्यान दिलाया है। उनके अनुसार, कई जगह पाइपों में कचरा फंसा हुआ है और पेड़ों पर पन्नियां दिखाई देती हैं।
क्या बाढ़ के बाद साफ हुई नदी?
स्थानीय लोगों की ओर से सबसे बड़ा सवाल वायरल वीडियो को लेकर उठाया गया है। उनका कहना है कि बिट्टू ने नदी से संबंधित दो वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए थे।बताया गया कि पहला वीडियो गर्मी के दिनों का था, जिसमें नदी में काफी कचरा दिखाई दे रहा था। दूसरा वीडियो 10 तारीख को आई बाढ़ के बाद का बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का दावा है कि बाढ़ के तेज बहाव में नदी का काफी कचरा बह गया और इसके बाद नदी पहले की तुलना में साफ दिखाई देने लगी।हालांकि यह स्थानीय लोगों का दावा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि का उल्लेख उपलब्ध जानकारी में नहीं है। यही वजह है कि नदी की सफाई में वास्तविक योगदान को लेकर अब अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
बिट्टू के दोस्त ने दी अलग जानकारी
वहीं बिट्टू के दोस्त अमन यादव ने उसके प्रयास का समर्थन किया है। अमन का कहना है कि बिट्टू नदी को गंदा देखकर अक्सर सफाई करने जाता था।उसके मुताबिक, बिट्टू ने नदी की सफाई के लिए जेसीबी का भी इस्तेमाल कराया था। अमन का दावा है कि नदी केवल बाढ़ के पानी के कारण साफ नहीं हुई, बल्कि बिट्टू ने भी सफाई के लिए काम किया था।इस तरह मामले में एक तरफ स्थानीय लोगों की ओर से बाढ़ के बाद नदी साफ दिखाई देने की बात कही जा रही है, तो दूसरी तरफ बिट्टू के दोस्त उसके सफाई अभियान में योगदान का दावा कर रहे हैं।
नगरपालिका ने भी बताई अपनी भूमिका
ब्यावरा नगरपालिका के सीएमओ इकरार अहमद के मुताबिक, जिस स्थान का वीडियो बनाया गया था, वहां पहले से अपेक्षाकृत कम गंदगी थी। उनके अनुसार, उस स्थान को साफ करके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया गया।सीएमओ ने यह भी बताया कि नगरपालिका वर्ष 2016 से अजनार नदी की सफाई के लिए हर साल अभियान चला रही है। इसके अलावा नदी को गहरा करने का काम भी किया गया है।नगरपालिका के इस बयान के बाद यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है कि अजनार नदी की सफाई में व्यक्तिगत प्रयास और लंबे समय से चल रहे प्रशासनिक अभियानों का वास्तविक योगदान कितना है।
अजनार नदी की सफाई का पुराना मुद्दा
अजनार नदी की सफाई और सौंदर्यीकरण का मुद्दा नया नहीं है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, अजनार बचाओ समिति से जुड़े राम भील और दिवंगत जेएल मारोटिया लंबे समय से नदी को साफ रखने के लिए अभियान चलाते रहे हैं।हर साल प्रशासन और स्थानीय संगठनों की मदद से नदी की सफाई का अभियान चलाए जाने की बात भी सामने आई है। वर्ष 2022 में ब्यावरा के तत्कालीन विधायक रामचंद दांगी ने विधानसभा में अजनार नदी के सौंदर्यीकरण को लेकर सवाल उठाया था और इसे बजट में शामिल करने की मांग की थी।
अब असली सवाल क्या है?
अजनार नदी को लेकर वायरल हुए वीडियो ने निश्चित तौर पर नदी की सफाई और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। लेकिन अब सोशल मीडिया पर किए गए दावे और स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के बीच अंतर दिखाई दे रहा है।एक ओर बिट्टू के प्रयास की सराहना करने वाले लोग हैं, वहीं स्थानीय निवासी और नगरपालिका नदी की सफाई को लेकर अलग तथ्य सामने रख रहे हैं। ऐसे में अजनार नदी की वास्तविक स्थिति और सफाई अभियान के प्रभाव का आकलन मौके की स्थिति और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही बेहतर तरीके से किया जा सकता है।अजनार नदी सफाई विवाद ने सोशल मीडिया पर वायरल दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर को सामने ला दिया है। बिट्टू तबाही के प्रयास की जहां कई लोगों ने तारीफ की, वहीं स्थानीय लोगों और नगरपालिका के बयानों के बाद दावे पर सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल यह स्पष्ट है कि अजनार नदी की सफाई लंबे समय से प्रशासन और स्थानीय संगठनों के लिए मुद्दा रही है। अब निगाह इस बात पर है कि नदी की वास्तविक सफाई में किसका कितना योगदान रहा और सोशल मीडिया पर वायरल दावे की जमीनी सच्चाई क्या है।
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