बिहार बाढ़ के बीच ‘आशीर्वाद का दीया’: जन्मदिन के आयोजनों पर उठे सवाल

Editorial
9 Min Read

रिपोर्ट:चन्दन मिश्रा (स्टेट हेड )

बिहार एक तरफ बिहार के कई हिस्से इन दिनों बाढ़ की चुनौती से जूझ रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के मौके पर देशभर में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें भारतीय जनता पार्टी की ओर से चलाए जा रहे ‘आशीर्वाद का दीया’ अभियान की भी चर्चा है। इस अभियान के तहत प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर घरों, संस्थानों और धार्मिक स्थलों पर दीप जलाने की अपील की गई है।यही वजह है कि सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में एक सवाल सामने आ रहा है—क्या ऐसे आयोजन केवल शुभकामना और जनभागीदारी का माध्यम हैं, या इनके साथ राजनीतिक संदेश भी जुड़ा है? इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि जब किसी राज्य में बड़ी संख्या में लोग बाढ़ से प्रभावित हों, तब सार्वजनिक जीवन में प्राथमिकता किसे मिलनी चाहिए? इन दोनों गतिविधियों को सीधे तौर पर एक-दूसरे के विकल्प के रूप में देखना भी पूरी तस्वीर नहीं बताता। जन्मदिन के कार्यक्रम मुख्य रूप से राजनीतिक संगठन और समर्थकों की गतिविधियां हैं, जबकि आपदा राहत सरकार की प्रशासनिक जिम्मेदारी है। इसलिए असली सवाल यह है कि दोनों के बीच संसाधनों, प्राथमिकताओं और सार्वजनिक संदेश का संतुलन किस तरह बनाया जाता है।

बिहार बाढ़ के बीच ‘आशीर्वाद का दीया’
बिहार बाढ़ के बीच ‘आशीर्वाद का दीया’

बिहार में बाढ़ की गंभीर स्थिति

बिहार में सितंबर के दौरान बाढ़ की स्थिति कई इलाकों में गंभीर बनी हुई है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक 15 जिलों में बाढ़ का असर दर्ज किया गया और कई इलाकों में सड़कें तथा घर पानी में डूबे हैं। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव अभियान चलाए जा रहे हैं।12 सितंबर की एक रिपोर्ट में बिहार में 47 लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने और 11 लाख से ज्यादा लोगों के राहत शिविरों तथा सामुदायिक रसोई तक पहुंचने की जानकारी दी गई थी। इससे बाढ़ की चुनौती के पैमाने का अंदाजा लगाया जा सकता है।केंद्र सरकार की ओर से भी बाढ़ प्रभावित राज्यों के लिए सहायता का प्रावधान किया गया है। गृह मंत्रालय के अनुसार 2026 के मानसून के दौरान बाढ़ प्रभावित राज्यों की सहायता के लिए केंद्र के हिस्से से 2,117.85 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि SDRF के तहत जारी की गई थी।16 सितंबर को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिहार के हाजीपुर, वैशाली, मुंगेर और भागलपुर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा भी किया। PIB के अनुसार इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ राहत और नुकसान की स्थिति का जायजा लिया।

क्या है ‘आशीर्वाद का दीया’ अभियान?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर बीजेपी और सहयोगी दलों की ओर से ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जा रहा है। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने की घोषणा की गई है। इसके तहत स्वास्थ्य शिविर, स्वच्छता अभियान और अन्य सामाजिक गतिविधियों के साथ दीप जलाने के कार्यक्रम भी शामिल हैं।‘आशीर्वाद का दीया’ इसी व्यापक अभियान का एक हिस्सा है। विभिन्न स्थानों पर मिट्टी के दीपक जलाने और प्रधानमंत्री के लिए शुभकामनाएं व्यक्त करने की अपील की गई है। पश्चिम बंगाल में भी घरों, संस्थानों और मंदिरों में दीप जलाने की अपील किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है।समर्थकों के लिए यह आयोजन प्रधानमंत्री के जन्मदिन और उनके सार्वजनिक जीवन से जुड़े एक अवसर पर शुभकामना और भागीदारी का माध्यम है। वहीं, आलोचक ऐसे आयोजनों को राजनीतिक संचार और जनसंपर्क के नजरिए से भी देखते हैं। दोनों दृष्टिकोणों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

क्या दीप जलाने का खर्च जनता के लिए लाभ में बदल सकता है?

यह सवाल खास तौर पर तब महत्वपूर्ण हो जाता है जब किसी बड़े स्तर पर आयोजन हो। दीपक, सजावट, आयोजन स्थल, प्रचार और अन्य व्यवस्थाओं पर होने वाला खर्च अगर किसी संगठन या समर्थकों की ओर से किया जाता है, तो वह सरकारी राहत बजट के समान नहीं माना जा सकता।यानी किसी राजनीतिक-सामाजिक अभियान पर होने वाला खर्च अपने आप बाढ़ राहत के लिए उपलब्ध सरकारी धन को कम नहीं करता। लेकिन सार्वजनिक चर्चा में यह सवाल जरूर उठ सकता है कि सामाजिक संसाधनों और स्वयंसेवी ऊर्जा को किस दिशा में लगाया जाए।यदि ऐसे आयोजनों के साथ रक्तदान, स्वास्थ्य शिविर, स्वच्छता अभियान, जरूरतमंदों की सहायता या स्थानीय कारीगरों से सामान खरीदने जैसी गतिविधियां जोड़ी जाती हैं, तो उनका सामाजिक प्रभाव अलग हो सकता है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत ऐसी सामाजिक गतिविधियों की घोषणा भी की गई है।

आस्था, जनभागीदारी और राजनीति—तीनों पहलू

भारत में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के साथ सामाजिक तथा राजनीतिक गतिविधियों का जुड़ना कोई नई बात नहीं है। दीप जलाना अपने आप में आस्था, शुभकामना और सामूहिक भागीदारी का प्रतीक हो सकता है। लेकिन जब कोई राजनीतिक दल किसी आयोजन को बड़े पैमाने पर संचालित करता है, तो उसके राजनीतिक संदेश पर चर्चा होना भी स्वाभाविक है।इस मामले में भी समर्थक इसे प्रधानमंत्री के जन्मदिन और सेवा से जुड़े अभियान के रूप में देख रहे हैं, जबकि आलोचक इसके राजनीतिक संचार वाले पहलू पर सवाल उठा सकते हैं। इसलिए इसे केवल एक ही नजरिए से देखने के बजाय दोनों पहलुओं को समझना जरूरी है।

क्या बाढ़ राहत और ऐसे आयोजन साथ-साथ चल सकते हैं?

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या जन्मदिन के कार्यक्रम और बाढ़ राहत एक साथ चल सकते हैं? प्रशासनिक तौर पर दोनों अलग-अलग स्तर की गतिविधियां हैं। बाढ़ राहत में सरकार की मशीनरी, SDRF/NDRF, स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियां काम करती हैं। दूसरी ओर, राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रमों में पार्टी कार्यकर्ता तथा समर्थक भाग लेते हैं।ऐसे में मुद्दा यह नहीं कि एक गतिविधि हो या दूसरी, बल्कि यह है कि आपदा के समय राहत और बचाव कार्यों को पर्याप्त प्राथमिकता, संसाधन और प्रशासनिक ध्यान मिल रहा है या नहीं।बिहार में बाढ़ प्रभावित लोगों के सामने भोजन, सुरक्षित आवास, स्वास्थ्य सेवाएं, पशुधन की सुरक्षा और फसलों के नुकसान जैसी कई चुनौतियां हैं। ऐसे समय में राहत व्यवस्था की गति और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचना सबसे अहम सार्वजनिक मुद्दा बन जाता है।

जनता के सामने असली सवाल

‘आशीर्वाद का दीया’ अभियान ने जन्मदिन समारोहों को लेकर एक व्यापक बहस जरूर खड़ी कर दी है। क्या ऐसे आयोजन लोगों को जोड़ने और सामाजिक भागीदारी बढ़ाने का माध्यम हैं? क्या इनमें सेवा गतिविधियों को और मजबूत किया जा सकता है? और क्या आपदा की स्थिति में राजनीतिक-सामाजिक संगठनों को अपनी ऊर्जा का बड़ा हिस्सा राहत कार्यों में लगाना चाहिए?इन सवालों का जवाब अलग-अलग लोग अपनी प्राथमिकताओं और दृष्टिकोण के आधार पर दे सकते हैं। लेकिन एक बात स्पष्ट है कि बिहार में बाढ़ प्रभावित लोगों की जरूरतें तत्काल हैं और राहत-बचाव व्यवस्था की प्रभावशीलता सबसे महत्वपूर्ण बनी हुई है। वहीं, जन्मदिन से जुड़े आयोजनों को लेकर सार्वजनिक बहस इस बात पर केंद्रित है कि आस्था, जनभागीदारी, सामाजिक सेवा और राजनीति के बीच संतुलन किस तरह बनाया जाए।यही वजह है कि ‘आशीर्वाद का दीया’ सिर्फ दीप जलाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि इस समय जनभागीदारी, सार्वजनिक प्राथमिकताओं और सामाजिक जिम्मेदारी पर चर्चा का विषय भी बन गया है।

Read on:http://PM Modi Birthday 2026: वडनगर पहुंचे अमित शाह, 600 बाइकर्स की यात्रा शुरू

Advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

Share This Article
Leave a Comment