लखनऊ उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर गोरखपुर और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए एक्सप्रेसवे की स्थिति और विकास परियोजनाओं को लेकर सवाल उठाए हैं। अखिलेश यादव ने आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के अपने क्षेत्र में भी कथित तौर पर ऐसा ‘गोरख धंधा’ चल रहा है, जिस पर सरकार को जवाब देना चाहिए।अखिलेश यादव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में सड़क, एक्सप्रेसवे और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस जारी है। उन्होंने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए और विकास कार्यों के दावों पर सरकार को घेरा।

गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे को लेकर अखिलेश का सवाल
अखिलेश यादव ने गोरखपुर में विकास परियोजनाओं को लेकर सरकार पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का अपना क्षेत्र होने के बावजूद वहां की स्थिति पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे को लेकर भी टिप्पणी की और इसकी हालत को लेकर सवाल उठाए।उनका आरोप है कि जिस क्षेत्र को विकास और बेहतर कनेक्टिविटी का उदाहरण बताया जा रहा है, वहां जमीनी स्तर पर अलग तस्वीर दिखाई देती है। अखिलेश यादव ने इसी संदर्भ में मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए ‘गोरख धंधा’ शब्द का इस्तेमाल किया।यह ध्यान रखना जरूरी है कि ‘गोरख धंधा’ वाला बयान अखिलेश यादव का राजनीतिक आरोप है। इससे यह स्वतः साबित नहीं होता कि एक्सप्रेसवे परियोजना में भ्रष्टाचार हुआ है। इस तरह के आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित सरकारी रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट या सक्षम एजेंसी के निष्कर्ष जरूरी होंगे।
चार लेन के एक्सप्रेसवे पर भी उठाया सवाल
अखिलेश यादव ने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के स्वरूप और सड़क की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने चार लेन वाली सड़क को एक्सप्रेसवे कहे जाने पर आपत्ति जताई और कहा कि एक्सप्रेसवे को लेकर मानकों और उसकी वास्तविक स्थिति पर चर्चा होनी चाहिए।उन्होंने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे की मौजूदा हालत को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उनके बयान का केंद्र यह रहा कि केवल बड़ी परियोजनाओं का निर्माण कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी गुणवत्ता और उपयोगिता पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
पहले भी एक्सप्रेसवे को लेकर सरकार पर हमला
यह पहली बार नहीं है जब अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को लेकर सवाल उठाए हैं। फरवरी 2026 में भी उन्होंने उत्तर प्रदेश में सड़क और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं को लेकर सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने बीजेपी सरकार की निर्माण परियोजनाओं पर लागत और कथित कमीशनखोरी से जुड़े आरोप लगाए थे।अखिलेश यादव लगातार यह तर्क देते रहे हैं कि विकास परियोजनाओं का मूल्यांकन केवल उनके निर्माण से नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता, लागत और जनता को मिलने वाले वास्तविक लाभ के आधार पर होना चाहिए।
गोरखपुर को लेकर भी साधा निशाना
अखिलेश यादव ने गोरखपुर को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधे राजनीतिक निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का अधिकांश समय गोरखपुर में बीतता है, इसके बावजूद वहां विकास और प्रशासन से जुड़े कई सवाल बने हुए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में उन्होंने गोरखपुर में मेट्रो परियोजना का मुद्दा भी उठाया और कहा कि पहले की घोषणाओं के बावजूद इस दिशा में काम नहीं हुआ।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गोरखपुर और आसपास की विकास परियोजनाओं में जमीन और मुआवजे से जुड़े मुद्दे सामने आए हैं। हालांकि, इन आरोपों के अलग-अलग हिस्सों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
एक्सप्रेसवे पर सरकार का पक्ष भी अहम
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से राज्य में एक्सप्रेसवे नेटवर्क को विकास और कनेक्टिविटी के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है। सरकारी रिकॉर्ड में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और अन्य परियोजनाओं का उल्लेख किया गया है। संसद में भी उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे निर्माण को लेकर सरकार की ओर से जानकारी दी जा चुकी है।ऐसे में विपक्ष के आरोपों और सरकार के विकास संबंधी दावों के बीच वास्तविक तस्वीर समझने के लिए परियोजनाओं की गुणवत्ता, लागत, रखरखाव और आधिकारिक जांच रिपोर्ट जैसे दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच जनता के सवाल
गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा सड़क की वास्तविक स्थिति और उससे जुड़े आधिकारिक आंकड़े हैं। किसी भी बड़ी सार्वजनिक परियोजना में निर्माण गुणवत्ता, सुरक्षा, रखरखाव और जनता के उपयोग से जुड़े मानक अहम होते हैं।विपक्ष की ओर से जहां परियोजना को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं सरकार की ओर से एक्सप्रेसवे नेटवर्क को प्रदेश के विकास की बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है। ऐसे में जनता के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि परियोजना पर कितना खर्च हुआ, निर्माण की गुणवत्ता कैसी है और रखरखाव की व्यवस्था क्या है।
बयान के बाद बढ़ी सियासी हलचल
अखिलेश यादव के ताजा बयान के बाद गोरखपुर और एक्सप्रेसवे को लेकर राजनीतिक चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। उनके बयान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के क्षेत्र को केंद्र में रखते हुए सरकार की विकास नीति पर सवाल उठाए गए हैं।‘गोरख धंधा’ जैसे शब्दों के जरिए लगाए गए आरोप राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। इन आरोपों को तथ्य के रूप में स्थापित करने के लिए आधिकारिक जांच या दस्तावेजी प्रमाण जरूरी होंगे।फिलहाल गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे को लेकर अखिलेश यादव के बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में विकास, एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता और सरकारी परियोजनाओं की जवाबदेही जैसे मुद्दों को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद राजनीतिक तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
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