पटना बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा से जुड़ी घटना को लेकर मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बयान ने नई चर्चा छेड़ दी है। जमुई कांड पर अपनी पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया में मुख्यमंत्री ने घटना से जुड़े आरोपी की सोशल मीडिया रील का जिक्र करते हुए कहा कि अगर उसने रील नहीं बनाई होती तो क्या वह पकड़ा जाता? उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में ‘रील कल्चर’ का जिक्र करते हुए अपराधियों को पुलिस को चुनौती नहीं देने की चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि अपराधी अगर पुलिस को चुनौती देंगे तो पुलिस की ओर से जवाब दिया जाएगा।
जमुई कांड पर पहली बार खुलकर बोले सम्राट चौधरी
जमुई की घटना के बाद बिहार सरकार और पुलिस की कार्रवाई को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। इसी बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस मामले का जिक्र किया।रिपोर्टों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से वह सोशल मीडिया पर लगातार रील देख रहे हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने जमुई मामले में सामने आई आरोपी की रील का जिक्र किया।सम्राट चौधरी ने कहा कि आपराधिक घटना को अंजाम देने के बाद कोई व्यक्ति समाज का ‘हीरो’ नहीं बन सकता। उन्होंने युवाओं से भी रील के पीछे भागने के बजाय अपने जीवन और भविष्य पर ध्यान देने की बात कही।

‘रील नहीं बनाता तो पकड़ाता क्या?’
मुख्यमंत्री के बयान का सबसे ज्यादा चर्चा में आया हिस्सा वह है, जिसमें उन्होंने जमुई मामले से जुड़े आरोपी की रील का जिक्र किया। सम्राट चौधरी ने सवालिया अंदाज में कहा कि अगर आरोपी ने रील नहीं बनाई होती तो क्या वह पकड़ा जाता?उन्होंने यह बात सोशल मीडिया पर अपराधियों द्वारा अपनी गतिविधियों की वीडियो बनाने और उसे सार्वजनिक करने के संदर्भ में कही। मुख्यमंत्री का कहना था कि आजकल रील बनाने के चक्कर में लोग ऐसी गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं, जिनके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री की टिप्पणी को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री ने अपने बयान में अपराधियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर भी जोर दिया।
‘पुलिस को चुनौती दोगे तो 24 घंटे में जवाब’
सम्राट चौधरी ने अपराधियों को पुलिस को चुनौती नहीं देने की चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि अगर कोई अपराधी पुलिस को चुनौती देता है तो पुलिस की ओर से जल्द कार्रवाई की जाएगी।मुख्यमंत्री ने बिहार प्रशासन को ‘सुशासन’ और सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि अपराधियों को कानून व्यवस्था को चुनौती देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उनका कहना था कि अपराधी किसी भी तरह से समाज के लिए उदाहरण या हीरो नहीं बन सकते।जमुई मामले में पुलिस की कार्रवाई के संदर्भ में मुख्यमंत्री का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि घटना के बाद आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई थी।
बयान के बाद सियासी बहस भी तेज
सम्राट चौधरी के ‘रील नहीं बनाता तो पकड़ाता क्या?’ वाले बयान पर विपक्ष की ओर से भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। रोहिणी आचार्य ने मुख्यमंत्री के बयान पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया के जरिए बिहार की पुलिस व्यवस्था को लेकर टिप्पणी की। उनकी प्रतिक्रिया में यह सवाल उठाया गया कि यदि किसी घटना का वीडियो सामने नहीं आए तो क्या पुलिस कार्रवाई नहीं करेगी।विपक्षी नेताओं और अन्य राजनीतिक प्रतिक्रियाओं में जमुई घटना को लेकर कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाया जा रहा है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री और सत्ता पक्ष की ओर से अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और सुशासन पर जोर दिया जा रहा है।यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अलग-अलग नेताओं के बयान राजनीतिक प्रतिक्रियाएं हैं और उनके दावों को स्वतंत्र तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
जमुई मामले में पुलिस कार्रवाई का क्या हुआ?
जमुई में नाबालिग छात्रा से जुड़ी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की थी। मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। मुख्य आरोपी नंदन यादव को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उसके खिलाफ पुलिस कार्रवाई के दौरान गोली लगने की रिपोर्ट भी सामने आई, जिसे लेकर राजनीतिक बहस और तेज हुई।मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है। ऐसे में घटना से जुड़े आरोपों और आरोपियों की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकलेगा।
‘अपराधी की कोई जाति नहीं होती’
सम्राट चौधरी ने जमुई मामले को लेकर यह भी कहा कि अपराधी की कोई जाति या धर्म नहीं होता। उन्होंने अपराध के खिलाफ कार्रवाई को कानून-व्यवस्था का विषय बताते हुए कहा कि सरकार का ध्यान सुशासन पर है।मुख्यमंत्री के इस बयान को जमुई मामले को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच उनकी सरकार की ओर से दिए गए संदेश के रूप में देखा जा रहा है। वहीं विपक्ष इस घटना को लेकर सरकार से कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर जवाब मांग रहा है।
सोशल मीडिया रील बनी जांच की अहम कड़ी
जमुई मामले में सोशल मीडिया पर सामने आया वीडियो और आरोपी से जुड़ी रील जांच और पहचान के संदर्भ में चर्चा का हिस्सा बनी है। मुख्यमंत्री ने भी इसी पहलू का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि यदि आरोपी ने अपनी गतिविधियों की रील नहीं बनाई होती तो उसकी पहचान और गिरफ्तारी किस तरह होती।किसी भी आपराधिक मामले में सोशल मीडिया सामग्री को जांच के अन्य साक्ष्यों के साथ पुलिस द्वारा सत्यापित किया जाना जरूरी होता है। वायरल वीडियो अपने आप में पूरे घटनाक्रम का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।
अब बयान से आगे कार्रवाई पर नजर
जमुई कांड पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का ‘रील नहीं बनाता तो पकड़ाता क्या?’ वाला बयान फिलहाल चर्चा में है। एक तरफ मुख्यमंत्री ने अपराधियों को पुलिस को चुनौती नहीं देने की चेतावनी दी है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इस बयान के जरिए सरकार और पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है।अब इस पूरे मामले में आगे की पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि मामले में आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है।जमुई की घटना ने बिहार में महिला सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सोशल मीडिया पर आपराधिक घटनाओं के प्रसार को लेकर बहस तेज कर दी है। मुख्यमंत्री का ताजा बयान इसी बहस में एक नया राजनीतिक और प्रशासनिक पहलू जोड़ता है।
Read on:http://यूएन में जेलेंस्की ने भारत समेत 47 देशों का नाम लिया, रूस पर लगाए आरोप
Advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

