गोल्डी बराड़ से मसूद अजहर तक, भारत की आतंकी सूची में कौन-कौन?

Editorial
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नई दिल्ली अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी FBI की टॉप 10 मोस्ट वांटेड फ्यूजिटिव्स सूची में सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ का नाम शामिल किए जाने के बाद एक बार फिर भारत की आतंकवादी सूची चर्चा में है। FBI ने 28 सितंबर 2026 को गोल्डी बराड़ को अपनी Ten Most Wanted Fugitives सूची में शामिल किया और उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना के लिए 10 लाख डॉलर तक के इनाम की घोषणा की। FBI के मुताबिक वह इस सूची में शामिल होने वाला 543वां व्यक्ति है।भारत में भी गोल्डी बराड़ का नाम पहले से ही गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की चौथी अनुसूची में दर्ज है। गृह मंत्रालय की आधिकारिक सूची में उसका नाम क्रम संख्या 56 पर है। इसी सूची में मसूद अजहर, हाफिज मोहम्मद सईद, जकी-उर-रहमान लखवी और दाऊद इब्राहिम समेत कई अन्य व्यक्ति शामिल हैं।ऐसे में यह समझना जरूरी है कि भारत में किसी व्यक्ति को UAPA के तहत आतंकवादी घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया क्या है और चौथी अनुसूची में किन लोगों के नाम शामिल हैं।

गोल्डी बराड़ से मसूद अजहर तक
गोल्डी बराड़ से मसूद अजहर तक

UAPA क्या है और आतंकवादी सूची से इसका क्या संबंध है?

UAPA यानी Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967 भारत का प्रमुख कानून है, जिसका उद्देश्य देश की संप्रभुता, अखंडता और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाली गैरकानूनी गतिविधियों और आतंकवादी गतिविधियों से निपटना है।कानून में आतंकवादी गतिविधियों से संबंधित प्रावधान हैं। इसके तहत केंद्र सरकार को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करके उसका नाम UAPA की चौथी अनुसूची में शामिल करने की शक्ति प्राप्त है।गृह मंत्रालय अपनी वेबसाइट पर UAPA के तहत घोषित व्यक्तिगत आतंकवादियों की सूची उपलब्ध कराता है। इसके अलावा मंत्रालय पहली अनुसूची में सूचीबद्ध आतंकवादी संगठनों की अलग सूची भी प्रकाशित करता है।यानी किसी संगठन का आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध होना और किसी व्यक्ति का चौथी अनुसूची में व्यक्तिगत आतंकवादी के रूप में नामित होना अलग-अलग कानूनी श्रेणियां हैं।

गोल्डी बराड़ से मसूद अजहर तक
गोल्डी बराड़ से मसूद अजहर तक

गोल्डी बराड़ का नाम कैसे शामिल हुआ?

गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, सतविंदर सिंह उर्फ सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ का नाम UAPA की चौथी अनुसूची में क्रम संख्या 56 पर जोड़ा गया था। अधिसूचना में सरकार ने उसके खिलाफ विभिन्न आरोपों और सुरक्षा एजेंसियों से संबंधित मामलों का उल्लेख किया था।अधिसूचना के मुताबिक, उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस, गैर-जमानती वारंट और लुकआउट सर्कुलर का भी उल्लेख किया गया था। केंद्र सरकार ने UAPA की धारा 35(1)(a) के तहत उसे चौथी अनुसूची में शामिल किया।हाल ही में अमेरिका में FBI ने भी उसे अपनी Ten Most Wanted Fugitives सूची में शामिल किया है। FBI के मुताबिक गोल्डी बराड़ पर अमेरिका में RICO conspiracy, जबरन वसूली से संबंधित साजिश और मादक पदार्थों के वितरण से जुड़े संघीय आरोप हैं। ये अमेरिकी अभियोग में लगाए गए आरोप हैं और अमेरिकी अदालत की न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।

मसूद अजहर भी चौथी अनुसूची में शामिल

भारत की व्यक्तिगत आतंकवादियों की सूची में सबसे ऊपर मौलाना मसूद अजहर का नाम दर्ज है। गृह मंत्रालय की सूची में वह क्रम संख्या 1 पर है।मसूद अजहर को जैश-ए-मोहम्मद से जोड़ा जाता है। जैश-ए-मोहम्मद UAPA की पहली अनुसूची में आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध है। भारत में कई बड़े आतंकी मामलों में उसका नाम जांच और आरोपों के संदर्भ में सामने आया है।इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 2019 में मसूद अजहर को अपनी आतंकवादी प्रतिबंध सूची में शामिल किया था। इसलिए उसका नाम भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद से संबंधित प्रतिबंध व्यवस्थाओं में भी दर्ज है।

गोल्डी बराड़ से मसूद अजहर तक
गोल्डी बराड़ से मसूद अजहर तक

हाफिज सईद का नाम भी सूची में

गृह मंत्रालय की सूची में हाफिज मोहम्मद सईद का नाम क्रम संख्या 2 पर है। वह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा रहा है और इस संगठन को भारत की UAPA सूची में आतंकवादी संगठन के रूप में दर्ज किया गया है।हाफिज सईद का नाम विशेष रूप से 26/11 मुंबई आतंकी हमले के संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय जांच और प्रतिबंधों में सामने आया है। संयुक्त राष्ट्र ने भी उसे आतंकवादी के रूप में नामित किया है।

जकी-उर-रहमान लखवी और दाऊद इब्राहिम

भारत की चौथी अनुसूची में जकी-उर-रहमान लखवी क्रम संख्या 3 पर और दाऊद इब्राहिम कासकर क्रम संख्या 4 पर दर्ज हैं। गृह मंत्रालय की आधिकारिक सूची में दोनों के नाम मौजूद हैं।लखवी को लश्कर-ए-तैयबा के साथ जोड़ा जाता है और 26/11 मुंबई हमले से जुड़े मामलों में उसका नाम सामने आया है। वहीं दाऊद इब्राहिम के खिलाफ भारत में संगठित अपराध और आतंकवाद से जुड़े गंभीर आरोप और मामले लंबे समय से दर्ज रहे हैं।

खालिस्तानी संगठनों से जुड़े कई नाम

चौथी अनुसूची में केवल पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों से जुड़े नाम ही नहीं हैं। सूची में ऐसे लोग भी शामिल हैं जिन्हें भारत सरकार ने विभिन्न प्रतिबंधित संगठनों और आतंकी गतिविधियों से जोड़ा है।वधावा सिंह बब्बर, लखबीर सिंह उर्फ रोडे, रंजीत सिंह उर्फ नीता और परमजीत सिंह उर्फ पंजवार जैसे नाम भी आधिकारिक सूची में दर्ज हैं। इनके नाम क्रमशः शुरुआती प्रविष्टियों में शामिल हैं।इसके बाद सूची में कई अन्य नाम जोड़े गए हैं, जिनमें गुरपतवंत सिंह पन्नू, हरदीप सिंह निज्जर, सज्जिद मीर, अब्दुर रहमान मक्की समेत अन्य व्यक्ति शामिल हैं। गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध सूची में इन सभी के नाम और उनके क्रमांक दर्ज हैं।

चौथी अनुसूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया क्या है?

UAPA की धारा 35 के तहत केंद्र सरकार को किसी व्यक्ति को आतंकवादी के रूप में नामित करने और उसका नाम चौथी अनुसूची में शामिल करने की शक्ति है। गोल्डी बराड़ के मामले में गृह मंत्रालय की अधिसूचना में इसी कानूनी प्रावधान का उल्लेख किया गया था।सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ उपलब्ध मामलों, सुरक्षा एजेंसियों की जानकारी और अन्य आधारों का उल्लेख किया जा सकता है। इसके बाद उसका नाम चौथी अनुसूची में शामिल किया जाता है।गृह मंत्रालय अपनी वेबसाइट पर व्यक्तिगत आतंकवादियों की सूची अलग से प्रकाशित करता है। मंत्रालय के अनुसार, UAPA के तहत आतंकवादी संगठनों की सूची पहली अनुसूची में और व्यक्तिगत आतंकवादियों की सूची चौथी अनुसूची में दी जाती है।

सूची में नाम आने का मतलब क्या है?

किसी व्यक्ति का नाम चौथी अनुसूची में शामिल किया जाना केंद्र सरकार की ओर से UAPA के तहत किया गया आतंकवादी के रूप में वैधानिक नामांकन है। यह समझना जरूरी है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोप, किसी जांच में उसका नाम और अदालत में दोषसिद्धि—ये अलग-अलग कानूनी बातें हैं।इसी तरह FBI की Most Wanted सूची में किसी व्यक्ति का नाम होना अमेरिकी कानून के तहत उसकी तलाश और उस पर दर्ज आरोपों से संबंधित है। FBI ने गोल्डी बराड़ के मामले में संघीय आरोपों का उल्लेख किया है और गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना के लिए इनाम घोषित किया है।

गोल्डी बराड़ के बाद फिर चर्चा में क्यों आई सूची?

गोल्डी बराड़ का नाम अमेरिका की Ten Most Wanted Fugitives सूची में आने के बाद भारत की UAPA सूची भी चर्चा में आ गई है। खास बात यह है कि दोनों देशों की सूचियों का कानूनी आधार अलग है। भारत में उसका नाम UAPA की चौथी अनुसूची में पहले से मौजूद है, जबकि FBI ने उसे अमेरिकी संघीय मामलों में वांछित आरोपी के रूप में अपनी Most Wanted सूची में शामिल किया है।भारत की चौथी अनुसूची में मसूद अजहर से लेकर गोल्डी बराड़ तक अलग-अलग आतंकी संगठनों और मामलों से जुड़े कई नाम दर्ज हैं। गृह मंत्रालय की आधिकारिक सूची के मुताबिक गोल्डी बराड़ क्रम संख्या 56 पर है। इस सूची में नाम जोड़ने का अधिकार और प्रक्रिया UAPA के कानूनी प्रावधानों के तहत निर्धारित है।

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