विरोध करने का अधिकार अब अपराध बन गया: कपिल सिब्बल का केंद्र पर हमला

Editorial
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नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के रूप में मान्यता खत्म किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। राज्यसभा सांसद और देश के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिब्बल ने दो टूक शब्दों में कहा कि देश के हालात ऐसे हो गए हैं कि अब विरोध करने के मौलिक अधिकार को ही अपराध बना दिया गया है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए यहां तक कह दिया कि जनता के भीतर सुलग रहा यह ‘प्रेशर कुकर’ कभी भी फट सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

“मौलिक अधिकार को क्यों बनाया जा रहा है अपराध?”

कपिल सिब्बल ने संविधान के अनुच्छेद 19(1) का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने और अपनी बात रखने का मौलिक अधिकार देता है। लेकिन मौजूदा समय में प्रशासन और सरकार की नीतियों के कारण इस अधिकार का गला घोंटा जा रहा है।उन्होंने सवाल उठाया कि जब हमारे देश को दुनिया भर में सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में देखा जाता है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ‘विश्वगुरु’ होने के दावे किए जाते हैं, तो फिर देश के भीतर लोकतांत्रिक आवाजों को क्यों दबाया जा रहा है? सिब्बल ने कहा कि न्यूयॉर्क, लंदन और पेरिस जैसे दुनिया के तमाम बड़े शहरों में महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों के पास विरोध-प्रदर्शन के लिए नियत जगहें होती हैं, लेकिन भारत की राजधानी में विरोध के ऐतिहासिक केंद्र यानी जंतर-मंतर की मान्यता को ही समाप्त कर दिया गया है।

विरोध करने का अधिकार अब अपराध बन गया
विरोध करने का अधिकार अब अपराध बन गया

जंतर-मंतर की मान्यता रद्द होने पर खड़े किए सवाल

दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के लिए जंतर-मंतर के विकल्प को सीमित किए जाने पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार चाहती है कि लोग रामलीला मैदान जाएं। लेकिन धरातल पर स्थिति यह है कि रामलीला मैदान में चल रहे आयोजनों और दशहरा उत्सव के कारण वहां प्रदर्शन करना व्यावहारिक रूप से असंभव है।उन्होंने जंतर-मंतर पर पहले हुए कुछ प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा का जिक्र करते हुए बड़ा दावा किया। सिब्बल ने आरोप लगाया कि उस दौरान जो भी अप्रिय घटनाएं हुईं, वे प्रदर्शनकारियों की वजह से नहीं बल्कि बाहरी और अज्ञात लोगों के कारण थीं। उन्होंने दावा किया कि सुनियोजित तरीके से वहां पत्थरों से भरा ट्रक लाया गया और सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों व अज्ञात लोगों ने माहौल को बिगाड़ा। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं और महिलाओं को घसीटा गया, उन पर लाठीचार्ज किया गया और दिल्ली आने वाली ट्रेनों व मेट्रो सेवाओं तक को रोककर लोगों के आने-जाने के रास्ते बंद किए गए।

बेरोजगारी और आर्थिक संकट पर सरकार को घेरा

सिब्बल ने केवल विरोध-प्रदर्शन के अधिकार तक ही बात सीमित नहीं रखी, बल्कि देश के मौजूदा सामाजिक-आर्थिक हालातों को लेकर भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि देश में भारी बेरोजगारी, गंभीर आर्थिक संकट और सार्वजनिक निवेश में भारी कमी के कारण आज आम जनता का सरकार से पूरी तरह भरोसा उठ चुका है।उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार जितनी जल्दी सत्ता से हटेगी, देश और लोकतंत्र के हित में उतना ही बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन या अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा निकाले गए मार्च हमेशा शांतिपूर्ण रहे हैं, तो फिर आम युवाओं और नागरिकों के साथ ऐसा अलग और कठोर बर्ताव क्यों किया जा रहा है? आखिर ऐसे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से देश की सुरक्षा को क्या खतरा हो सकता है?

सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद और सरकार को कड़ी चेतावनी

अपनी बात के अंत में कपिल सिब्बल ने देश की न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट यह सुनिश्चित करेगा कि नागरिकों के विरोध करने के मौलिक अधिकार की रक्षा हो।सरकार को चेताते हुए उन्होंने कहा कि जनता के मन में पनप रहा असंतोष और दबी हुई आवाजें किसी ‘प्रेशर कुकर’ की तरह हैं, जो घुटन और दबाव के कारण किसी भी दिन फट सकता है। यदि ऐसा होता है, तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी मौजूदा सत्तासीन सरकार की होगी। सिब्बल का यह बयान राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच टकराव को तेज करता नजर आ रहा है।

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