बरेली उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। इसी बीच बरेली की आंवला लोकसभा सीट से भाजपा के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप के पार्टी छोड़ने के ऐलान ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। दो बार सांसद रह चुके धर्मेंद्र कश्यप ने 7 अक्टूबर 2026 को भाजपा से अलग होने की घोषणा की। उनके इस फैसले के पीछे पार्टी के भीतर नाराजगी को प्रमुख वजह बताया जा रहा है। खास तौर पर 2024 के लोकसभा चुनाव में जिन लोगों ने उनका विरोध किया था, उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण पद मिलने से वह असहज थे।धर्मेंद्र कश्यप के इस कदम के बाद जिले की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। उनके अगले राजनीतिक कदम पर भी सबकी नजरें टिकी हैं। समाजवादी पार्टी में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं, उन्होंने सपा में शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। उन्होंने अपने समर्थकों से चर्चा के बाद आगे की रणनीति तय करने की बात कही है।

राज्यसभा की सूची में नाम नहीं आने के बाद बढ़ी नाराजगी
धर्मेंद्र कश्यप की नाराजगी उस समय खुलकर सामने आई, जब उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए भाजपा ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की। इस सूची में उनका नाम शामिल नहीं था। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘टाटा बाय-बाय’ लिखकर पोस्ट साझा की, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को हवा दे दी।शुरुआत में उनकी पोस्ट को भाजपा से दूरी बनाने के संकेत के रूप में देखा गया। इसके बाद उनके अगले कदम को लेकर कई तरह के कयास लगाए जाने लगे। हालांकि, पोस्ट सामने आने के बाद यह स्पष्ट नहीं था कि वह औपचारिक रूप से पार्टी छोड़ने जा रहे हैं या अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।7 अक्टूबर को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने भाजपा छोड़ने का ऐलान कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने अपनी नाराजगी की वजह भी बताई। उनके बयान के बाद यह मामला केवल सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बरेली और आसपास के राजनीतिक क्षेत्रों में चर्चा का विषय बन गया।
2024 के लोकसभा चुनाव में विरोध करने वालों को पद मिलने से थे नाराज
धर्मेंद्र कश्यप ने अपनी नाराजगी की वजह बताते हुए 2024 के लोकसभा चुनाव का जिक्र किया। उनका कहना था कि चुनाव के दौरान जिन लोगों ने खुलकर उनका विरोध किया था, उन्हें पार्टी में महत्वपूर्ण पद दिए जा रहे हैं। उन्होंने इस बात पर असंतोष जताया कि ऐसे लोगों के खिलाफ संगठन की ओर से कार्रवाई नहीं की गई।पूर्व सांसद के मुताबिक, यदि चुनाव के दौरान विरोध करने वाले लोगों को पार्टी में जिम्मेदारियां मिलती रहेंगी और उनके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया जाएगा, तो उनके जैसे नेताओं के लिए पार्टी में बने रहना मुश्किल हो जाता है।उन्होंने अपने बयान में किसी नेता का नाम लेकर आरोप नहीं लगाया। उनकी नाराजगी का केंद्र पार्टी के भीतर संगठनात्मक फैसले और चुनाव के समय उनके विरोधियों की भूमिका रही।इस घटनाक्रम ने भाजपा के स्थानीय संगठन में आपसी तालमेल और नेताओं के बीच मतभेदों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, किसी संगठन के भीतर मतभेद होने का मतलब यह नहीं है कि पार्टी का पूरा संगठन एक ही राय रखता है। धर्मेंद्र कश्यप की नाराजगी उनके अपने राजनीतिक अनुभव और बयान के संदर्भ में देखी जानी चाहिए।
कौन हैं धर्मेंद्र कश्यप?
धर्मेंद्र कश्यप उत्तर प्रदेश की आंवला लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर दो बार सांसद चुने जा चुके हैं। उन्होंने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। इस दौरान वह बरेली और आसपास के क्षेत्रों की राजनीति में सक्रिय रहे।2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद भी क्षेत्रीय राजनीति में उनकी गतिविधियां जारी रहीं। राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा की सूची में नाम नहीं आने के बाद उनकी नाराजगी सार्वजनिक हुई और पार्टी छोड़ने के ऐलान ने एक बार फिर उन्हें राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया।आंवला और बरेली क्षेत्र में उनका राजनीतिक संपर्क और समर्थकों का आधार आगामी दिनों में उनकी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। उनके अगले राजनीतिक कदम का असर कितना होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वह आगे किस राजनीतिक दिशा में जाते हैं और उनके समर्थकों का रुख क्या रहता है।
क्या समाजवादी पार्टी में शामिल होंगे धर्मेंद्र कश्यप?
भाजपा छोड़ने के ऐलान के बाद धर्मेंद्र कश्यप के समाजवादी पार्टी में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। इन चर्चाओं को उस समय और बल मिला, जब वह सपा के चिकित्सा प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष डॉ. अनीस बेग के जन्मदिन समारोह में दिखाई दिए। इस कार्यक्रम से जुड़ी तस्वीरों के सामने आने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे। किसी कार्यक्रम में शामिल होना अपने आप में किसी राजनीतिक दल में शामिल होने का प्रमाण नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, धर्मेंद्र कश्यप ने सपा में शामिल होने की पुष्टि नहीं की है। उन्होंने कहा है कि वह समर्थकों के साथ बैठक करेंगे और उनकी राय सुनने के बाद आगे का फैसला लेंगे।ऐसे में फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि वह समाजवादी पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं। उनके अगले कदम को लेकर स्थिति स्पष्ट होने के लिए उनके आधिकारिक बयान या पार्टी की ओर से घोषणा का इंतजार करना होगा।
समर्थकों की बैठक के बाद तय होगी आगे की रणनीति
धर्मेंद्र कश्यप ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर समर्थकों से चर्चा करने की बात कही है। माना जा रहा है कि इस बैठक में उनके समर्थक आगे की राजनीतिक दिशा पर अपनी राय रखेंगे। इसके बाद वह तय कर सकते हैं कि उन्हें किसी दूसरे राजनीतिक दल से जुड़ना है या फिलहाल अपनी अलग रणनीति के साथ आगे बढ़ना है।उनका फैसला बरेली और आंवला क्षेत्र की राजनीति में चर्चा का विषय बना रहेगा। यदि वह किसी दूसरे दल में शामिल होते हैं, तो उस दल के लिए स्थानीय स्तर पर यह एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम हो सकता है। लेकिन इसके संभावित प्रभाव का आकलन उनके औपचारिक फैसले के बाद ही किया जा सकेगा।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और समाजवादी पार्टी सहित सभी प्रमुख दल अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे समय में पूर्व सांसद का पार्टी छोड़ने का ऐलान स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा को तेज कर सकता है।भाजपा के लिए चुनौती यह होगी कि वह अपने संगठन में नेताओं की नाराजगी और स्थानीय स्तर पर मतभेदों को कैसे संभालती है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों की नजर ऐसे नेताओं पर रह सकती है, जिनका किसी क्षेत्र में राजनीतिक अनुभव और समर्थकों से संपर्क रहा है।फिलहाल धर्मेंद्र कश्यप के अगले राजनीतिक कदम पर तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। इतना जरूर है कि भाजपा छोड़ने के उनके ऐलान और राज्यसभा टिकट को लेकर सामने आई नाराजगी ने बरेली की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। अब सभी की नजरें समर्थकों के साथ होने वाली बैठक और उनके अगले आधिकारिक फैसले पर टिकी हैं।
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