लखनऊ राजधानी लखनऊ में स्किन केयर और कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट के क्षेत्र में नई तकनीक की शुरुआत हुई है। पत्रकारपुरम स्थित जयश्री स्किन एंड न्यूट्रिशन क्लीनिक में फ्रांस की अवॉर्ड विनिंग मशीन ‘La Fontaine by Bloomea’ का शुभारंभ किया गया। आयोजकों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में पहली बार इस तकनीक को पेश किया गया है। इसका लॉन्च प्रसिद्ध कॉस्मेटिक डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. सीपिका जायसवाल ने किया। इस मौके पर उन्होंने मशीन की तकनीक, उपयोग और स्किन से जुड़ी विभिन्न समस्याओं में इसके संभावित इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी।क्लीनिक की ओर से बताया गया कि यह तकनीक फेस और बॉडी स्किन ट्रीटमेंट के लिए तैयार की गई है। इसकी खासियत नीडल-फ्री प्रक्रिया बताई गई है। यानी इसमें सुई के इस्तेमाल के बिना त्वचा की देखभाल से जुड़ी प्रक्रिया की जाती है। क्लीनिक का दावा है कि इस तकनीक के जरिए त्वचा की बनावट और रंगत में सुधार लाने के लिए ट्रीटमेंट किया जा सकता है।
पहले सेशन से परिणाम दिखने का दावा
लॉन्च के दौरान डॉ. सीपिका जायसवाल ने बताया कि ‘La Fontaine by Bloomea’ मशीन की प्रमुख विशेषता इसका नीडल-फ्री ट्रीटमेंट है। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया में त्वचा पर सुई का इस्तेमाल नहीं किया जाता और ट्रीटमेंट को आरामदायक बनाने पर ध्यान दिया गया है।डॉ. जायसवाल ने दावा किया कि कुछ लोगों को पहले सेशन के बाद ही त्वचा में बदलाव महसूस हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी स्किन ट्रीटमेंट का परिणाम व्यक्ति की त्वचा की स्थिति, समस्या और उसकी जरूरत के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।उन्होंने कहा कि जो लोग मुंहासों के पुराने निशान, झुर्रियों, फाइन लाइन्स या त्वचा की बेजान बनावट से परेशान हैं, वे विशेषज्ञ से परामर्श लेकर इस तकनीक के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

तीन एडवांस तकनीकों का संयोजन
क्लीनिक की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस मशीन में तीन तकनीकों का संयोजन किया गया है। इनमें मैक्रो-एक्सफोलिएशन, माइक्रो-वाइब्रेशन और 633 नैनोमीटर एलईडी लाइट शामिल हैं।
1. मैक्रो-एक्सफोलिएशन (Macro-Exfoliation): इस प्रक्रिया का उद्देश्य त्वचा की सतह पर मौजूद मृत कोशिकाओं की परत को हटाने में मदद करना है। इससे त्वचा की ऊपरी सतह को साफ और अधिक समान बनाने के लिए ट्रीटमेंट किया जाता है।
2. माइक्रो-वाइब्रेशन (Micro-Vibration): मशीन में मौजूद यह तकनीक सूक्ष्म कंपन के जरिए त्वचा पर काम करती है। क्लीनिक के अनुसार, इसका उद्देश्य त्वचा में रक्त संचार को प्रोत्साहित करना और उसकी बनावट में सुधार लाने में मदद करना है।
3. एलईडी 633 एनएम लाइट (LED 633 nm Light): इस तकनीक में लाल रोशनी का इस्तेमाल किया जाता है। क्लीनिक के मुताबिक, इसे त्वचा की देखभाल और कोलेजन से जुड़े ट्रीटमेंट के उद्देश्य से शामिल किया गया है।
इन तीनों तकनीकों के संयोजन से त्वचा की ऊपरी सतह और उसकी बनावट पर काम करने का दावा किया गया है।
मुंहासों के निशान से लेकर स्ट्रेच मार्क्स तक में इस्तेमाल
डॉ. सीपिका जायसवाल के अनुसार, इस मशीन का इस्तेमाल त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं के लिए किया जा सकता है। इनमें मुंहासों के गहरे निशान और गड्ढे, झुर्रियां, फाइन लाइन्स, स्ट्रेच मार्क्स और डल स्किन शामिल हैं।क्लीनिक के मुताबिक, यह तकनीक स्किन रिसर्फेसिंग यानी त्वचा की सतह और बनावट को बेहतर बनाने के उद्देश्य से इस्तेमाल की जा सकती है। खास तौर पर उन लोगों के लिए यह एक विकल्प हो सकती है, जो त्वचा की बनावट में सुधार के लिए नॉन-इनवेसिव प्रक्रिया के बारे में जानना चाहते हैं।हर व्यक्ति के लिए एक ही ट्रीटमेंट उपयुक्त नहीं होता। त्वचा की समस्या की गंभीरता और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर विशेषज्ञ ही तय कर सकते हैं कि संबंधित व्यक्ति के लिए यह प्रक्रिया कितनी उपयुक्त है।
16 से 98 वर्ष तक के लोगों के लिए उपलब्धता का दावा
लॉन्च कार्यक्रम के दौरान डॉ. जायसवाल ने बताया कि इस तकनीक को 16 से 98 वर्ष तक के लोगों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। उनके अनुसार, फेस के साथ बॉडी के कुछ हिस्सों पर भी इस मशीन से ट्रीटमेंट किया जा सकता है।उम्र की सीमा बताने के साथ यह समझना भी जरूरी है कि किसी व्यक्ति की उम्र के आधार पर ही ट्रीटमेंट की उपयुक्तता तय नहीं होती। त्वचा की स्थिति, मौजूदा स्वास्थ्य, संवेदनशीलता और अन्य चिकित्सकीय पहलुओं का आकलन जरूरी है। खासकर 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों के लिए किसी भी कॉस्मेटिक प्रक्रिया से पहले अभिभावक और योग्य चिकित्सक की सलाह आवश्यक है।
लखनऊ में स्किन केयर के क्षेत्र में नई शुरुआत
जयश्री स्किन एंड न्यूट्रिशन क्लीनिक में इस मशीन के लॉन्च को राजधानी में आधुनिक स्किन केयर सेवाओं के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। फ्रांस की तकनीक को लखनऊ में उपलब्ध कराने का उद्देश्य ऐसे लोगों तक नए विकल्प पहुंचाना है, जो त्वचा की देखभाल और कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट के लिए आधुनिक प्रक्रियाओं की तलाश में हैं।डॉ. सीपिका जायसवाल ने कहा कि नीडल-फ्री तकनीक और बिना लंबे रिकवरी समय वाली प्रक्रिया की तलाश कर रहे लोगों के लिए यह एक विकल्प हो सकती है। हालांकि, दर्द न होने या डाउनटाइम नहीं होने जैसे परिणाम हर व्यक्ति में एक समान हों, यह जरूरी नहीं है। ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले विशेषज्ञ से पूरी जानकारी लेना महत्वपूर्ण है।
लॉन्च कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद
मशीन के शुभारंभ के मौके पर न्यूट्रिनिस्ट एवं डाइट कंसल्टेंट हरि मोहन राय, जयश्री जायसवाल और क्लीनिक की पूरी टीम मौजूद रही। कार्यक्रम में मशीन की कार्यप्रणाली और स्किन केयर में इसके संभावित उपयोग के बारे में जानकारी साझा की गई।इस लॉन्च के साथ लखनऊ के स्किन केयर क्षेत्र में एक नई तकनीक की शुरुआत हुई है। अब यह देखना होगा कि विशेषज्ञों की देखरेख में इस तकनीक का इस्तेमाल किस तरह किया जाता है और अलग-अलग स्किन समस्याओं वाले लोगों को इससे कितना लाभ मिलता है।
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