प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई सामने आई है। देश के 19 राज्यों से जुड़ी साइबर ठगी की शिकायतों की जांच के दौरान पुलिस ने 53 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में करीब 500 करोड़ रुपये की मनी ट्रेल सामने आने की बात कही गई है। आरोप है कि इस नेटवर्क से जुड़े लोग फोन और डिजिटल माध्यमों के जरिए लोगों को झांसे में लेते थे। किसान सम्मान निधि और बैंक खाते की KYC अपडेट कराने जैसे बहानों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बनाया जाता था।पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि साइबर अपराध के लिए बेरोजगारों और अन्य लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। कुछ खातों को कथित तौर पर किराये पर लेकर ठगी की रकम के लेनदेन में इस्तेमाल किया जाता था। कुंडा, रानीगंज और कोतवाली देहात समेत प्रतापगढ़ के अलग-अलग इलाकों से आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है। जिले के विभिन्न थानों में दर्ज मामलों की पड़ताल के दौरान पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़ी कड़ियों को खंगाला।
19 राज्यों से जुड़ी शिकायतों की जांच में खुलासा
प्रतापगढ़ पुलिस ने 18 अप्रैल से 27 अक्टूबर के बीच दर्ज साइबर ठगी के मामलों की जांच की। जांच के दौरान शिकायतों का संबंध देश के 19 राज्यों से सामने आया। इसके बाद साइबर टीम और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए 53 आरोपियों को गिरफ्तार किया।पुलिस की जांच में बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया। साइबर अपराध में अक्सर ठगी की रकम सीधे किसी एक खाते में नहीं रखी जाती, बल्कि उसे कई खातों में स्थानांतरित किया जाता है। इससे रकम के वास्तविक स्रोत और उसके अंतिम इस्तेमाल का पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।इस मामले में सामने आई करीब 500 करोड़ रुपये की मनी ट्रेल को समझना भी जरूरी है। मनी ट्रेल का मतलब बैंक खातों और दूसरे वित्तीय माध्यमों से रकम के लेनदेन का पूरा रास्ता पता करना है। इसलिए इस आंकड़े को जांच में सामने आए वित्तीय लेनदेन से जोड़कर देखा जाना चाहिए। इसे बिना अतिरिक्त पुष्टि के पूरी तरह प्रमाणित नुकसान या पीड़ितों से ठगी गई अंतिम रकम मानना उचित नहीं होगा।

किसान सम्मान निधि और KYC के नाम पर लोगों को बनाते थे निशाना
जांच से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, साइबर अपराधी लोगों को फोन करके अलग-अलग बहानों से अपने जाल में फंसाते थे। किसान सम्मान निधि की राशि, योजना से जुड़ी जानकारी और बैंक खाते की KYC अपडेट कराने के नाम पर संपर्क किया जाता था।ऐसे मामलों में ठग खुद को बैंक कर्मचारी, सरकारी योजना से जुड़ा प्रतिनिधि या तकनीकी सहायता देने वाला व्यक्ति बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। इसके बाद वे लोगों से बैंकिंग जानकारी हासिल करने या संदिग्ध लिंक पर क्लिक कराने का प्रयास करते हैं। यदि कोई व्यक्ति बिना सत्यापन के अपनी गोपनीय जानकारी साझा कर देता है, तो उसके खाते से रकम निकलने का खतरा पैदा हो सकता है।पुलिस से जुड़ी खबरों में इस नेटवर्क के संबंध में फर्जी लिंक, OTP और निवेश का लालच देकर ठगी करने के आरोप भी सामने आए हैं। गिरफ्तार किए गए सभी 53 लोगों की भूमिका एक जैसी थी या नहीं, इसका निर्धारण जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।
बेरोजगारों के नाम पर बैंक खाते खुलवाने का आरोप
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू बैंक खातों का कथित इस्तेमाल है। रिपोर्टों के अनुसार, आरोपियों का नेटवर्क ग्रामीणों और बेरोजगार लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। कुछ मामलों में खातों को किराये पर लेने का भी आरोप है।ऐसे खातों को साइबर अपराध की भाषा में म्यूल अकाउंट कहा जाता है। इनका इस्तेमाल ठगी से हासिल रकम प्राप्त करने और फिर उसे दूसरे खातों में भेजने के लिए किया जा सकता है। कई खातों के माध्यम से रकम को छोटे-छोटे हिस्सों में अलग-अलग जगह भेजने से जांच एजेंसियों के लिए पूरे नेटवर्क तक पहुंचना कठिन हो सकता है।खाते के बदले पैसे लेने वाले व्यक्ति के लिए भी यह गंभीर कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है। यदि उसके खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी में होता है, तो जांच में उसकी भूमिका की पड़ताल की जा सकती है। इसलिए किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, ATM कार्ड, सिम कार्ड या बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी दूसरे को इस्तेमाल करने के लिए नहीं देनी चाहिए।
कुंडा, रानीगंज और देहात क्षेत्र से गिरफ्तारियां
पुलिस की कार्रवाई में प्रतापगढ़ के कुंडा, रानीगंज और कोतवाली देहात क्षेत्र सहित अलग-अलग स्थानों से आरोपियों को पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है। संबंधित मामलों में जिले के विभिन्न थानों में मुकदमे दर्ज थे। पुलिस ने साइबर टीम और स्थानीय पुलिस की मदद से शिकायतों, बैंक खातों और लेनदेन से संबंधित कड़ियों की जांच की।प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर के हवाले से बताया गया है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और बैंक खातों के जरिए रकम के लेनदेन की जांच की जा रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित ठगी की रकम किन खातों में पहुंची, उसे कहां स्थानांतरित किया गया और इस नेटवर्क में अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।गिरफ्तारी के बाद भी जांच के कई पहलू सामने आना बाकी हैं। आरोपियों के खिलाफ आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों के आधार पर होगी। केवल गिरफ्तारी को दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं माना जा सकता।
साइबर ठगी से बचने के लिए क्या करें?
इस मामले के सामने आने के बाद आम लोगों के लिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है। साइबर ठग अक्सर सरकारी योजनाओं, बैंकिंग सेवाओं और KYC अपडेट जैसे परिचित विषयों का इस्तेमाल करके लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं।
- किसान सम्मान निधि या किसी सरकारी योजना के नाम पर आने वाले अनजान फोन पर तुरंत भरोसा न करें।
- किसी भी व्यक्ति को OTP, UPI PIN, ATM PIN या इंटरनेट बैंकिंग का पासवर्ड न बताएं।
- अनजान नंबर से आए संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।
- बैंक खाते को किराये पर देने या किसी दूसरे व्यक्ति के लेनदेन के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति न दें।
- बैंक या सरकारी योजना से जुड़ी जानकारी की पुष्टि संबंधित विभाग के आधिकारिक माध्यम से करें।
- यदि साइबर ठगी हो जाए, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
आगे की जांच पर टिकी नजर
प्रतापगढ़ में 53 आरोपियों की गिरफ्तारी और 19 राज्यों से जुड़ी शिकायतों का मामला साइबर अपराध के बढ़ते नेटवर्क की ओर ध्यान खींचता है। किसान सम्मान निधि और KYC जैसे नामों का इस्तेमाल करके लोगों को निशाना बनाने तथा बैंक खातों के माध्यम से रकम स्थानांतरित करने के आरोप गंभीर हैं।अब पुलिस की जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि इस नेटवर्क में किसकी क्या भूमिका थी, कितने लोग वास्तव में ठगी के शिकार हुए और करीब 500 करोड़ रुपये की मनी ट्रेल किन-किन वित्तीय लेनदेन से जुड़ी है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही इस पूरे मामले की वास्तविक व्यापकता स्पष्ट हो सकेगी।
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