बड़गांव मोड़ बना हादसे की वजह
स्थानीय लोगों के अनुसार, बड़गांव मोड़ पहले भी कई हादसों का गवाह रह चुका है। यह मोड़ बेहद तीखा है और यहां सुरक्षा रेलिंग की कमी बताई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, बस की रफ्तार अधिक थी और मोड़ पर संतुलन बिगड़ने से यह हादसा हुआ।
हालांकि, हादसे के सही कारणों की जांच नेपाल पुलिस द्वारा की जा रही है। तकनीकी खराबी, ओवरलोडिंग या चालक की लापरवाही—इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
13 लोगों की मौत, 34 घायल
जिला प्रहरी कार्यालय बैतडी के प्रवक्ता और प्रहरी निरीक्षक बलदेव बडू ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि दुर्घटना में 13 बरातियों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, 34 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कुछ की हालत नाजुक बनी हुई है।
घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। गंभीर रूप से घायलों को बेहतर इलाज के लिए जिला मुख्यालय या अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, कई घायलों को सिर और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आई हैं।
रात में चला रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे की सूचना मिलते ही नेपाल एपीएफ (आर्म्ड पुलिस फोर्स), स्थानीय पुलिस और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। रात का समय होने और खाई गहरी होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण रहा।
स्थानीय लोगों ने बताया कि अंधेरा और दुर्गम रास्ता होने के बावजूद बचाव दल ने तत्परता दिखाते हुए घायलों को बाहर निकालने का प्रयास किया। कई घायलों को रस्सियों और स्ट्रेचर की मदद से खाई से बाहर लाया गया।
रेस्क्यू ऑपरेशन कई घंटों तक चला और शुक्रवार सुबह तक सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया जा सका।
स्थानीय लोगों की अहम भूमिका
इस हादसे में स्थानीय ग्रामीणों की भूमिका भी काफी सराहनीय रही। पुलिस के पहुंचने से पहले ही ग्रामीण खाई में उतरकर घायलों की मदद में जुट गए। कई लोगों ने अपने निजी वाहनों से घायलों को अस्पताल पहुंचाया।
नेपाल पुलिस ने स्थानीय लोगों का आभार जताते हुए कहा कि उनकी मदद से कई जिंदगियां बचाई जा सकीं।
भारत-नेपाल सीमा से जुड़े इलाके में शोक
यह हादसा भारत-नेपाल सीमा के नजदीक हुआ है, जहां उत्तर प्रदेश के कई जिलों जैसे पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती और महराजगंज के लोगों के नेपाल से पारिवारिक और सामाजिक संबंध हैं।
यूपी के सीमावर्ती इलाकों में यह खबर आग की तरह फैल गई और लोग पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर शोक संदेश साझा किए और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
पहाड़ी इलाकों में सड़क सुरक्षा पर सवाल
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संकरी सड़कों, तीखे मोड़ों और सुरक्षा इंतजामों की कमी के कारण इस तरह के हादसे अक्सर सामने आते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में बसों की गति पर सख्त नियंत्रण, नियमित वाहन जांच और खतरनाक मोड़ों पर मजबूत सुरक्षा रेलिंग बेहद जरूरी है। इसके अलावा, रात के समय भारी वाहनों की आवाजाही पर भी पुनर्विचार किए जाने की जरूरत है।
जांच के आदेश, मदद की घोषणा
नेपाल प्रशासन ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। बस चालक से पूछताछ की जा रही है और वाहन के तकनीकी पहलुओं की भी जांच होगी।
प्रशासन की ओर से मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने और घायलों के इलाज का पूरा खर्च उठाने की बात कही गई है। स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने भी पीड़ित परिवारों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। जिस शादी के लिए बरात खुशी-खुशी निकली थी, वही सफर कई परिवारों के लिए कभी न भूलने वाला दर्द बन गया। शादी की खुशियां मातम में बदल गईं और पूरे इलाके में शोक का माहौल है।
यह हादसा न केवल नेपाल बल्कि भारत के सीमावर्ती इलाकों के लिए भी एक कड़वी याद बन गया है, जो सड़क सुरक्षा और सतर्कता की अहमियत को एक बार फिर याद दिलाता है।