परीक्षा देरी से परेशान छात्र की मौत, विरोध

Digital Desk
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हरिद्वार स्थित ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज में द्वितीय वर्ष के एक छात्र द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना के बाद परिसर में तनाव का माहौल बन गया। घटना से आक्रोशित छात्रों ने कॉलेज प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय परीक्षाओं में लगातार हो रही देरी के कारण छात्र लंबे समय से मानसिक दबाव में था।

घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में छात्र कॉलेज परिसर में एकत्र हो गए और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करने लगे। छात्रों का कहना है कि शैक्षणिक अनिश्चितता और भविष्य को लेकर बढ़ती चिंता छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रही है।

परीक्षा तिथि घोषित करने की मांग

आक्रोशित छात्रों ने परिषद निदेशक डॉ. अनूप कुमार का घेराव कर जल्द से जल्द परीक्षा तिथि घोषित करने की मांग की। उनका कहना है कि बार-बार परीक्षा टलने से छात्रों का शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो रहा है और करियर को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि लंबे समय से इस मुद्दे को लेकर प्रशासन को अवगत कराया जा रहा था, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया। इसी कारण छात्रों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।

 मानसिक स्वास्थ्य सहायता की भी उठी मांग

विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने संस्थान में काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता केंद्र स्थापित करने की मांग भी की। उनका कहना है कि मेडिकल और आयुर्वेदिक शिक्षा के दौरान बढ़ते शैक्षणिक दबाव के बीच छात्रों को भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक सहयोग की आवश्यकता होती है।

छात्रों ने कहा कि यदि समय रहते उचित मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध कराई जाए, तो ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सकता है।

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प्रशासन ने दिया जांच और समाधान का आश्वासन

विरोध प्रदर्शन के बाद कॉलेज प्रशासन और परिषद निदेशक ने छात्रों से बातचीत की। डॉ. अनूप कुमार ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि मामले की पूरी जांच कराई जाएगी। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय स्तर पर परीक्षा से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर उठाया जाएगा।

प्रशासन ने छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही, भविष्य में शैक्षणिक कैलेंडर को नियमित करने के लिए संबंधित अधिकारियों से समन्वय किया जाएगा।

इस घटना के बाद एक बार फिर उच्च शिक्षा संस्थानों में बढ़ते शैक्षणिक दबाव और अनिश्चितता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा में देरी, परिणामों में विलंब और अकादमिक अस्थिरता छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।

ऐसे मामलों में संस्थानों और विश्वविद्यालयों को समयबद्ध शैक्षणिक कैलेंडर लागू करने के साथ-साथ छात्रों के लिए काउंसलिंग, हेल्पलाइन और सहायता तंत्र विकसित करना आवश्यक है। छात्रों और अभिभावकों ने भी मांग की है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए ठोस और संवेदनशील कदम उठाए जाएं।

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