
उत्तर प्रदेश में बिजली उत्पादन पर मौसम की मार साफ दिखाई देने लगी है। राज्य विद्युत उत्पादन निगम (यूपीआरवीयूएनएल) की नौ उत्पादन इकाइयों के एक साथ ठप हो जाने से प्रदेश में बिजली संकट गहराने की आशंका पैदा हो गई है। इन इकाइयों के बंद होने से महज चार दिनों के भीतर बिजली उत्पादन में 3373 मेगावाट की भारी गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि फिलहाल प्रदेश के कई हिस्सों में हुई बारिश और तापमान में कमी के कारण बिजली की मांग अपेक्षाकृत कम रही, जिससे उपभोक्ताओं को बड़े स्तर पर बिजली कटौती का सामना नहीं करना पड़ा।प्रदेश में राज्य विद्युत उत्पादन निगम के अंतर्गत छह प्रमुख तापीय बिजली परियोजनाओं में कुल 25 उत्पादन इकाइयां संचालित हैं। इनकी कुल स्थापित क्षमता 13 हजार मेगावाट से अधिक है। सरकार लगातार बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने और ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत बनाने के प्रयास कर रही है, लेकिन हाल के दिनों में आए खराब मौसम ने उत्पादन व्यवस्था को प्रभावित कर दिया है। आंधी, तेज बारिश और तकनीकी गड़बड़ियों के कारण तीन दिनों के भीतर नौ उत्पादन इकाइयां बंद हो गईं, जिससे बिजली उत्पादन में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।यूपीएसएलडीसी के आंकड़ों के अनुसार 25 मई को राज्य विद्युत उत्पादन निगम की इकाइयों से 7106 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा था। इसके बाद 26 मई को उत्पादन घटकर 6224 मेगावाट, 27 मई को 6125 मेगावाट, 28 मई को 5440 मेगावाट और 29 मई को केवल 3733 मेगावाट रह गया। यानी चार दिनों में लगभग 47 प्रतिशत उत्पादन कम हो गया। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि इतनी बड़ी गिरावट सामान्य परिस्थितियों में चिंता का विषय है और यदि मांग अधिक रहती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।वर्तमान में जिन इकाइयों का उत्पादन बंद है, उनमें अनपरा तापीय परियोजना की यूनिट-2, घाटमपुर की यूनिट-2, हरदुआगंज की यूनिट-7, जवाहपुर की यूनिट-2, ओबरा की यूनिट-9 तथा पारीक्षा परियोजना की यूनिट-3, 4, 5 और 6 शामिल हैं। इनमें से कुछ इकाइयों में तकनीकी खराबी आई है, जबकि कुछ स्थानों पर ट्रांसमिशन प्रणाली में गड़बड़ी के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है। निगम की तकनीकी टीमें लगातार मरम्मत और सुधार कार्य में जुटी हुई हैं ताकि जल्द से जल्द उत्पादन सामान्य किया जा सके।

दूसरी ओर बिजली की मांग में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। यूपीएसएलडीसी के आंकड़ों के अनुसार 24 मई को प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 31,825 मेगावाट दर्ज की गई थी। इसके बाद 25 मई को मांग 30,853 मेगावाट, 26 मई को 28,125 मेगावाट, 27 मई को 30,337 मेगावाट, 28 मई को 30,607 मेगावाट और 29 मई को शाम तक 29,010 मेगावाट रही। मौसम में बदलाव और तापमान में कमी आने से मांग पर कुछ असर पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रदेश में भीषण गर्मी और लू का दौर जारी रहता तो उत्पादन में आई इस भारी कमी का असर सीधे लाखों उपभोक्ताओं पर पड़ता और कई जिलों में बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती थी।राज्य विद्युत उत्पादन निगम के प्रबंध निदेशक मयूर महेश्वरी ने बताया कि बुंदेलखंड सहित कई क्षेत्रों में आई आंधी और बारिश के कारण कुछ उत्पादन इकाइयों के संचालन पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि सभी प्रभावित इकाइयों को जल्द से जल्द चालू करने के लिए विशेषज्ञ इंजीनियरों और तकनीकी कर्मचारियों की टीम युद्धस्तर पर काम कर रही है। निगम को उम्मीद है कि अगले एक-दो दिनों में अधिकांश इकाइयां फिर से पूरी क्षमता के साथ बिजली उत्पादन शुरू कर देंगी, जिससे प्रदेश की विद्युत व्यवस्था पूरी तरह सामान्य हो जाएगी।
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