बेकार स्वास्थ्य मंत्री, अब बन गए पत्रकार’ : अखिलेश के हमले पर ब्रजेश पाठक का पलटवार, यूपी की राजनीति में छिड़ी नई जंग

Editorial
4 Min Read

लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बयानबाजी का दौर तेज होता जा रहा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के बीच जुबानी जंग अब खुलकर सामने आ गई है। पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फार्मूले से शुरू हुई सियासी बहस अब व्यक्तिगत और राजनीतिक हमलों तक पहुंच गई है। दोनों नेताओं के ताजा बयानों ने प्रदेश की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने एक पत्रकार की भूमिका में अपने ही मंत्रिमंडल के पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप का इंटरव्यू लिया। बातचीत के दौरान पीडीए फार्मूले और समाजवादी पार्टी की राजनीति पर सवाल उठाए गए। नरेंद्र कश्यप ने कहा कि सपा का पीडीए सामाजिक न्याय का मॉडल नहीं, बल्कि एक राजनीतिक परिवार के हितों को साधने का माध्यम है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछड़ों और दलितों के नाम पर राजनीति करने वाली सपा वास्तव में केवल एक विशेष जाति की राजनीति तक सीमित रही है।

 

यह बयान सीधे तौर पर अखिलेश यादव की राजनीतिक रणनीति पर हमला माना गया। लोकसभा चुनाव 2024 में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी को मिली सफलता का बड़ा आधार पीडीए फार्मूला ही रहा था। ऐसे में भाजपा नेताओं की ओर से इस रणनीति पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।नरेंद्र कश्यप और ब्रजेश पाठक के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि जो स्वास्थ्य मंत्री के रूप में बेकार साबित हो चुके हैं, वे अब पत्रकार बन गए हैं। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार, संगठन और दल में पहले ही नाकाम हो चुके लोग अब समय बिताने के लिए इंटरव्यू-इंटरव्यू खेल रहे हैं। उन्होंने प्रदेश में बिजली संकट, गर्मी और स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि जनता परेशान है और भाजपा मंत्री छुट्टियां मनाने में व्यस्त हैं। अखिलेश के इस हमले का जवाब देने में ब्रजेश पाठक ने भी देर नहीं की। उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख ने उन्हें नहीं, बल्कि पत्रकारिता और पत्रकारों का अपमान किया है। पाठक ने अपने जवाब में संवाद और विचार-विमर्श की भारतीय परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीति के साथ-साथ पत्रकारिता और लेखन भी लोकतंत्र को मजबूत करने के माध्यम हैं। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. राममनोहर लोहिया जैसे नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि ये सभी सार्वजनिक जीवन में रहते हुए लेखन और संवाद से जुड़े रहे।

पाठक ने सोशल मीडिया पर लिखा कि संवाद सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और वह एक राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में संवाद की उसी संस्कृति को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा, अगर उन्हें मिर्ची लग रही है तो मैं क्या करूं।” उनके इस बयान को अखिलेश यादव पर सीधा पलटवार माना जा रहा है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव की शुरुआती सियासी बिसात है। भाजपा और सपा दोनों ही अपने-अपने सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने में जुटी हैं। ऐसे में पीडीए बनाम भाजपा का सामाजिक गठजोड़ आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है। फिलहाल अखिलेश यादव और ब्रजेश पाठक के बीच छिड़ी यह जुबानी जंग प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा का केंद्र बन गई है और आने वाले दिनों में इसके और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

read more:https://news7hindi.com/rahul-gandhi-relieved-savarkar-defamation-case-closed/

or advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

 

Share This Article
Leave a Comment