
उत्तराखंड भाजपा के भीतर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब पार्टी के युवा और आक्रामक राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन देवभूमि के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे। उत्तराखंड के नेताओं और मंत्रियों के सामने राष्ट्रीय अध्यक्ष का एक ऐसा जुदा और कड़क अंदाज देखने को मिला, जिसकी कल्पना शायद किसी बड़े से बड़े कद्दावर नेता ने भी नहीं की थी। सूबे के हर बूथ से लेकर हर विधानसभा सीट तक की ऐसी सटीक और पुख्ता जमीनी रिपोर्ट नितिन नवीन की टेबल पर पहले से ही तैयार थी कि बड़े-बड़े विधायकों और पदाधिकारियों के पसीने छूट गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी राष्ट्रीय अध्यक्ष को संगठन का असली ‘बॉस’ बताया था, उत्तराखंड के दौरे पर ठीक उसी बॉस वाले तेवर और कड़क अनुशासन में नितिन नवीन नजर आए। उनके इस गजब के राजनीतिक कौशल और बारीक नजर के सामने उत्तराखंड भाजपा के सभी दिग्गज नतमस्तक दिखे और हर कोई उनके इस कमाल के नेतृत्व का पूरी तरह से कायल हो गया। इस मैराथन बैठक के दौरान जब कुछ विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों ने अपनी कमियों को छिपाने के लिए आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की कोशिश की, तो राष्ट्रीय अध्यक्ष ने तुरंत उन्हें बीच में ही टोक दिया। नितिन नवीन हवा-हवाई बातों पर भरोसा करने के बजाय पहले से ही पूरी तैयारी और पुख्ता ग्राउंड रिपोर्ट अपने साथ लेकर उत्तराखंड पहुंचे थे। उन्होंने झूठी वाहवाही लूटने और कागजी घोड़े दौड़ाने वाले नेताओं को ऑन-स्पॉट जमीनी आईना दिखाया और साफ शब्दों में कहा कि कागजी दावों से बाहर निकलकर जमीन पर काम करना शुरू करें। एक अदने से बूथ कार्यकर्ता से लेकर प्रदेश स्तर के बड़े पदाधिकारियों की फाइलों को उन्होंने खुद खंगाला और जहां भी रिपोर्ट में कमियां पाई गईं, उन्हें तुरंत दुरुस्त करने के कड़े निर्देश दिए। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने न सिर्फ कमियां गिनाईं, बल्कि जमीनी स्तर पर पार्टी को और ज्यादा मजबूत करने और जीत का असली फॉर्मूला भी नेताओं को समझाया।
पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान, गुटबाजी और नेताओं के आपसी मनमुटाव को लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष ने विधायकों को दो टूक लहजे में बेहद सख्त हिदायत दी। उन्होंने साफ लहजे में अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर किसी भी नेता को कोई शिकायत है या आपस में कोई मनमुटाव है, तो घर की बात कमरे के भीतर ही बंद रहनी चाहिए। उन्होंने चेताया कि सोशल मीडिया या अन्य किसी भी सार्वजनिक माध्यम से अपनी भड़ास निकालने की गलती बिल्कुल न करें। यदि कोई भी विषय या समस्या है, तो उसे सीधे संगठन के फोरम पर रखें या फिर पार्टी हाईकमान से चर्चा करें। नितिन नवीन ने साफ किया कि विधायकों और बड़े नेताओं की व्यक्तिगत छवि से ही पूरी पार्टी का अक्स बनता है, इसलिए जनता के बीच अपनी छवि और आचरण दोनों को बेदाग और मजबूत रखें, क्योंकि अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आगामी चुनावी चुनौतियों के मद्देनजर नितिन नवीन ने नेताओं को नसीहत दी कि साल 2022 के विधानसभा चुनाव में मिली 47 सीटों के आंकड़े पर ही खुश होकर हाथ पर हाथ धरकर बैठने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। उन्होंने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि अब उन विधानसभा क्षेत्रों, सुदूर इलाकों और विभिन्न समुदायों पर विशेष फोकस किया जाए, जहां अभी तक भाजपा अपनी मजबूत पैठ नहीं बना पाई है। उन्होंने सभी नेताओं को टारगेट देते हुए साफ कह दिया है कि जहां पार्टी अब तक नहीं पहुंच पाई है, वहां जल्दी से जल्दी पहुंचें। अध्यक्ष ने नेताओं को यह भी साफ बता दिया कि ठीक तीन या चार महीने बाद वे दोबारा उत्तराखंड के दौरे पर आएंगे और एक-एक विधानसभा सीट से जुड़े एक-एक लक्ष्य पर विस्तार से समीक्षा करेंगे। उस वक्त सभी विधायकों और संगठन पदाधिकारियों से एक-एक बिंदु की पूरी प्रोग्रेस रिपोर्ट ली जाएगी।शुरुआत में जिस नेतृत्व को उत्तराखंड के तमाम बड़े नेता एक युवा और नया अध्यक्ष मानकर हल्के में ले रहे थे, उनकी इस गजब की लगन, मेहनत और कठोर अनुशासन को देखकर अब हर किसी की जुबां पर सिर्फ उन्हीं की चर्चा है। नितिन नवीन ने बैठकों में अपनों के साथ अपनेपन का रिश्ता भी दिखाया, लेकिन जब बात अनुशासन, काम और पार्टी लाइन की आई, तो वे एक बेहद सख्त और दूरदर्शी कमांडर के रूप में नजर आए। उन्होंने उत्तराखंड भाजपा के पूरे कुनबे को एक बड़ा और साफ संदेश दे दिया है कि अगर देवभूमि में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का नया इतिहास रचना है, तो ढिलाई और लापरवाही का रास्ता पूरी तरह छोड़ना होगा और हर नेता को चौबीसों घंटे जमीन पर पसीना बहाना पड़ेगा।
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