मालदा नहीं, लखनऊ का मलिहाबाद है दुनिया की ‘आम की राजधानी’, 200 साल पुराना दशहरी का इतिहास आज भी जिंदा

Editorial
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जब भी गर्मियों का मौसम आता है, लोगों के चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान दिखाई देने लगती है। वजह होती है फलों के राजा आम की आमद। भारत में आम सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि स्वाद, परंपरा और भावनाओं का हिस्सा है। बचपन की छुट्टियां, पेड़ों पर लटके आम, बागों की खुशबू और परिवार के साथ आम खाने का आनंद हर किसी की यादों में बसा होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया की असली “आम की राजधानी” कहे जाने वाला शहर पश्चिम बंगाल का मालदा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश का एक छोटा-सा कस्बा है?जी हां लखनऊ से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित मलिहाबाद को दुनिया की “मैंगो कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड” यानी आम की राजधानी कहा जाता है। आम की खेती, उसकी गुणवत्ता और सैकड़ों वर्षों पुरानी विरासत के कारण मलिहाबाद ने यह पहचान हासिल की है। यह कस्बा सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए आम उत्पादन का गौरव माना जाता है। मलिहाबाद का इतिहास नवाबों के दौर से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि यहां आम की खेती को विशेष संरक्षण मिला और धीरे-धीरे यह क्षेत्र देश के सबसे बड़े और प्रसिद्ध आम उत्पादक इलाकों में शामिल हो गया। यहां की उपजाऊ मिट्टी, अनुकूल जलवायु और किसानों की पीढ़ियों से चली आ रही खेती की तकनीक ने मलिहाबाद को एक अलग पहचान दिलाई है।मलिहाबाद की सबसे बड़ी पहचान है दशहरी आम। इस आम की मिठास, सुगंध और मुलायम गूदे ने इसे देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लोकप्रिय बनाया है। दिलचस्प बात यह है कि दशहरी आम का मूल या “मातृ वृक्ष” आज भी मलिहाबाद में मौजूद है। करीब 200 साल पुराना यह पेड़ आज भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। आम प्रेमी और पर्यटक इसे देखने के लिए दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं। यह पेड़ केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि भारतीय आम संस्कृति की जीवित धरोहर माना जाता है।

हालांकि मलिहाबाद की पहचान सिर्फ दशहरी तक सीमित नहीं है। यहां कई अन्य प्रसिद्ध किस्मों के आम भी उगाए जाते हैं, जिनकी देश और विदेश में भारी मांग रहती है। लंगड़ा आम अपने खास खट्टे-मीठे स्वाद के लिए जाना जाता है। चौसा आम रस से भरपूर होता है और इसे चूसकर खाने का अलग ही आनंद मिलता है। सफेदा अपनी मलाईदार बनावट और हल्की मिठास के कारण पसंद किया जाता है, जबकि आम्रपाली अपने गहरे नारंगी रंग और अनोखे स्वाद के लिए मशहूर है।हर साल आम के मौसम में मलिहाबाद के बागों की रौनक देखने लायक होती है। हजारों एकड़ में फैले आम के बाग न केवल स्थानीय किसानों की आजीविका का आधार हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। यहां से आम देश के विभिन्न राज्यों के अलावा मध्य पूर्व, यूरोप और कई अन्य देशों में भी निर्यात किए जाते हैं।मलिहाबाद केवल आम उत्पादन का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय कृषि विरासत का भी प्रतीक है। यहां के किसान पीढ़ियों से आम की खेती कर रहे हैं और अपनी मेहनत से इस क्षेत्र की पहचान को दुनिया भर में पहुंचा रहे हैं। यही कारण है कि जब भी दुनिया की आम राजधानी की बात होती है, तो मलिहाबाद का नाम सबसे पहले लिया जाता है।अगर आप आम के असली स्वाद, उसकी खुशबू और उससे जुड़ी समृद्ध विरासत को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो मलिहाबाद आपके लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यह वह धरती है जहां आम सिर्फ उगाए नहीं जाते, बल्कि उन्हें एक संस्कृति, परंपरा और पहचान के रूप में जिया जाता है। इसलिए अगली बार जब कोई आपसे दुनिया की आम राजधानी के बारे में पूछे, तो बेझिझक कहिए— “मालदा नहीं, लखनऊ का मलिहाबाद है दुनिया की असली मैंगो कैपिटल।”

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