‘सैलरी क्रेडिटेड’ के मैसेज से लेकर ‘बैंक बैलेंस’ तक: नौकरीपेशा लोग आज ही नोट कर लें बचत और निवेश का यह अचूक मंत्र

Editorial
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हर महीने जैसे ही मोबाइल की घंटी बजती है और ‘सैलरी क्रेडिटेड’ का मैसेज आता है, वैसे ही दिल को सुकून तो मिलता है, लेकिन हफ्ता-दस दिन बीतते ही जेब फिर से खाली हो जाती है। आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई चाहता है कि उसके पास बैंक बैलेंस की एक मजबूत दीवार हो, ताकि बुरे वक्त में किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े। लेकिन कड़वा सच यह है कि ज्यादातर नौकरीपेशा लोग बचत करना तो चाहते हैं, पर उन्हें सही तरीका और सही गणित ही नहीं पता होता। वे इसी कशमकश में रहते हैं कि आखिर सैलरी का 50% बचाएं, 30% बचाएं या फिर 20%? अगर आपके साथ भी यही कहानी दोहराई जा रही है, तो अब वक्त आ गया है अपनी जेब के इस लीकेज को हमेशा के लिए बंद करने का और बचत के उस सुनहरे नियम को समझने का जो बड़े-बड़े कद्दावर फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स दुनिया को सिखाते हैं। पैसे बचाने का सीधा और सबसे अचूक मंत्र यह है कि आपको हर महीने अपनी इनहैंड सैलरी में से कम से कम 20% हिस्सा बिना किसी बहाने के सीधे बचाना ही चाहिए। मान लीजिए आपकी सैलरी 50,000 रुपये है, तो 10,000 रुपये पर आपका कोई हक नहीं होना चाहिए। सैलरी आते ही सबसे पहले इस 20% रकम को अपने प्राइमरी अकाउंट से निकालकर एक ऐसे दूसरे बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दीजिए, जिसका एटीएम कार्ड आपके पास न हो या जिसे आप आसानी से खर्च न कर पाएं। इसे फाइनेंशियल दुनिया में ’50-30-20 का रूल’ कहा जाता है, जहाँ 50% आपकी बुनियादी जरूरतों (जैसे किराया, राशन, बिल) के लिए होता है, 30% आपकी इच्छाओं (जैसे घूमना, फिल्म देखना) के लिए और बाकी का बचा 20% बिना किसी समझौते के आपकी शुद्ध बचत होती है। यही वो 20% की छोटी सी आदत है जो आपके भविष्य को किसी भी तूफान से बचाने के लिए एक मजबूत ढाल तैयार करती है।

सिर्फ पैसे को बैंक खाते में सड़ाने से आप अमीर नहीं बनेंगे, बल्कि उस पैसे को सही जगह पर काम पर लगाना होगा। अपनी इस 20% की बचत को स्मार्ट तरीके से निवेश करना सीखें। इसके लिए आप म्यूचुअल फंड में एक छोटी सी मंथली एसआईपी (SIP) शुरू कर सकते हैं, जो लंबी अवधि में कंपाउंडिंग की ताकत से आपके पैसे को कई गुना बढ़ा देती है। इसके अलावा, किसी अच्छी कंपनी की लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी और आज के दौर में सबसे जरूरी एक मजबूत हेल्थ इंश्योरेंस जरूर लें, ताकि किसी बीमारी या मेडिकल इमरजेंसी के वक्त आपकी जमा-पूंजी एक झटके में साफ न हो जाए। टर्म इंश्योरेंस भी आपके परिवार के सुरक्षित भविष्य के लिए एक बेहतरीन और बेहद सस्ता विकल्प है। पैसा बचाना और उसे सही जगह निवेश करना, आर्थिक आजादी की पहली सीढ़ी है। इसके साथ ही एक नौकरीपेशा इंसान के जीवन में सबसे बड़ा हथियार होता है उसका ‘इमरजेंसी फंड’। प्राइवेट नौकरियों के इस दौर में कब क्या हो जाए, किसी को नहीं पता। इसलिए एक्सपर्ट्स मानते हैं कि हर कामकाजी व्यक्ति के पास कम से कम अपनी 6 महीने की सैलरी के बराबर का पैसा इमरजेंसी फंड के रूप में हमेशा तैयार होना चाहिए।

इसे एक सीधे उदाहरण से समझें, अगर आपकी मासिक सैलरी 40,000 रुपये है, तो आपके पास कम से कम 2 लाख 40 हजार रुपये का एक ऐसा फंड होना चाहिए जिसे आप बेहद मुश्किल वक्त या नौकरी जाने की स्थिति में ही छुएं। यह फंड आपको किसी भी मानसिक तनाव से बचाता है और आपको समाज में आत्मसम्मान के साथ खड़े रहने की ताकत देता है। आखिरकार  इस बचत के मिशन को कामयाब बनाने के लिए आपको अपनी रोजमर्रा की कुछ आदतों पर सर्जिकल स्ट्राइक करनी होगी। हर छोटी-मोटी खुशी पर ऑनलाइन ऐप्स से बाहर का खाना ऑर्डर करने की आदत पर लगाम लगानी होगी। सैलरी आते ही मॉल्स या ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर जाकर अंधाधुंध शॉपिंग करने के बजाय अपनी जरूरतों की एक लिस्ट बनाएं। फालतू के सब्सक्रिप्शन और दिखावे के खर्चों को अपनी जिंदगी से तुरंत बाहर का रास्ता दिखाएं। अपनी असली जरूरत और महज एक पल की चाहत के बीच का फर्क पहचानें। याद रखिए, आज बचाया गया एक-एक रुपया कल आपकी कामयाबी और आजादी की कहानी लिखेगा, इसलिए आज से ही अपनी सैलरी का वो जादुई 20% बचाना शुरू कीजिए और अपने कल के राजा बनिए।

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