UP Election 2027: कांग्रेस-सपा गठबंधन तय! मेरठ की सीटों पर बदलेंगे समीकरण, अखिलेश इन मुद्दों से BJP को घेरने की तैयारी में

Editorial
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मेरठउत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस एक बार फिर गठबंधन के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। सीटों के बंटवारे को लेकर रणनीतिकारों ने मंथन शुरू कर दिया है, वहीं पश्चिमी यूपी के मेरठ जिले की सात विधानसभा सीटों पर भी नए राजनीतिक समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं।  सूत्रों के मुताबिक, मेरठ जिले की सात विधानसभा सीटों में से पांच से छह सीटें समाजवादी पार्टी के खाते में जा सकती हैं, जबकि एक या दो सीटों पर कांग्रेस चुनाव लड़ सकती है। लोकसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव पहले ही साफ कर चुके हैं कि गठबंधन की राजनीति में सीटों से ज्यादा जीत अहम है। उनके इस बयान के बाद मेरठ समेत पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। चुनावी रणनीति के तहत समाजवादी पार्टी इस बार कई बड़े जनसरोकारों को मुद्दा बना सकती है। सबसे प्रमुख मुद्दा युवाओं का भविष्य और पेपर लीक की घटनाएं होंगी। मेरठ और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी, बेरोजगारी और रोजगार के अवसरों की कमी को सपा-कांग्रेस गठबंधन प्रमुखता से उठा सकता है। इसके अलावा किसानों की समस्याएं भी चुनावी केंद्र में रहेंगी। गन्ना किसानों के बकाया भुगतान, खाद-बीज की बढ़ती कीमतें, छुट्टा पशुओं से फसलों को हो रहे नुकसान और कृषि लागत में वृद्धि जैसे मुद्दों को विपक्ष भाजपा सरकार के खिलाफ हथियार बना सकता है।

व्यापारी वर्ग को लेकर भी गठबंधन की नजरें टिकी हैं। मेरठ के सराफा कारोबार, कपड़ा उद्योग और बुनकर समुदाय लंबे समय से बिजली दरों और व्यापारिक सुविधाओं को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। छोटे व्यापारियों की नाराजगी को राजनीतिक समर्थन में बदलने की कोशिश की जा सकती है। सपा का सबसे बड़ा दांव पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूला और महंगाई का मुद्दा माना जा रहा है। पार्टी इन वर्गों को महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक प्रतिनिधित्व के सवालों पर एकजुट करने की रणनीति बना रही है।अगर मेरठ की सीटों की बात करें तो मेरठ शहर, मेरठ दक्षिण, सरधना, किठौर और सिवालखास सीटों पर सपा की मजबूत दावेदारी मानी जा रही है। वहीं मेरठ कैंट सीट पर कांग्रेस अपना दावा ठोक सकती है। हस्तिनापुर सीट भी गठबंधन के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसे प्रदेश की सत्ता का राजनीतिक संकेतक माना जाता है। ऐसे में साफ है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में मेरठ पश्चिमी यूपी की राजनीति का केंद्र बनने जा रहा है। सपा-कांग्रेस गठबंधन जहां सामाजिक समीकरणों और जनहित के मुद्दों पर चुनावी रणनीति तैयार कर रहा है, वहीं भाजपा के लिए अपने मजबूत गढ़ को बचाए रखना बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

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