गोलीकांड मामले में घिरे खान सर, कोर्ट नहीं पहुंचे; वकील का दावा- पूरी FIR ही गलत

Editorial
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बिहार के चर्चित शिक्षक और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले खान सर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और संभावित गिरफ्तारी को लेकर पूरे राज्य में चर्चा तेज हो गई है। शनिवार को दिनभर यह अटकलें लगती रहीं कि खान सर पटना सिविल कोर्ट में आत्मसमर्पण कर सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बजाय उनके वकील अदालत पहुंचे और साफ शब्दों में कहा कि खान सर सरेंडर नहीं करेंगे। उनका दावा है कि पुलिस ने गलत तथ्यों के आधार पर मामला दर्ज किया है और अब कानूनी रास्ते से अग्रिम जमानत की मांग की जाएगी। प्राथमिकी दर्ज होने के 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पटना पुलिस खान सर, जिनका वास्तविक नाम फैसल खान है, को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। इस बीच मामले ने राजनीतिक और सामाजिक बहस का रूप ले लिया है। एक ओर उनके विरोधी कठोर कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर बड़ी संख्या में छात्र और समर्थक उन्हें निर्दोष बताते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं।

शनिवार सुबह से ही पटना सिविल कोर्ट परिसर में हलचल तेज हो गई थी। सोशल मीडिया पर यह खबर तेजी से फैल गई थी कि खान सर कोर्ट पहुंचकर आत्मसमर्पण करेंगे। इस संभावना को देखते हुए पुलिस भी पूरी तरह सतर्क रही। अदालत परिसर और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। हालांकि, घंटों इंतजार के बाद भी खान सर स्वयं अदालत नहीं पहुंचे। उनकी ओर से उनके वकील अदालत पहुंचे और मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि प्राथमिकी पूरी तरह गलत और तथ्यों से परे है। वकील ने कहा कि खान सर पर लगाए गए आरोप निराधार हैं। उन्होंने किसी को गोली चलाने का आदेश नहीं दिया और न ही किसी हिंसक गतिविधि में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानूनी प्रक्रिया के तहत अग्रिम जमानत याचिका दायर की जाएगी। हालांकि, शनिवार को समय समाप्त हो जाने के कारण याचिका दाखिल नहीं हो सकी। अब सोमवार को अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया जाएगा।

इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह बन गया है कि क्या अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल होने से पहले पुलिस खान सर को गिरफ्तार करेगी। चूंकि अभी तक उन्हें किसी प्रकार की राहत नहीं मिली है, इसलिए कानूनी रूप से पुलिस के पास कार्रवाई का विकल्प खुला हुआ है। हालांकि पुलिस फिलहाल पूरे मामले में सतर्क और संयमित रुख अपनाती दिखाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार शुक्रवार रात से लेकर शनिवार सुबह तक खान सर के कोचिंग संस्थान के बाहर छात्रों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। बड़ी संख्या में छात्र अपने शिक्षक के समर्थन में वहां पहुंचने लगे। पुलिस को आशंका थी कि यदि इस दौरान गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाती है तो कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से पुलिस ने कोई आक्रामक कदम नहीं उठाया।मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब शनिवार सुबह कई छात्रों के मोबाइल फोन पर संदेश पहुंचा कि खान सर सुबह 10 बजे से 11 बजे तक क्लास लेंगे। इससे छात्रों में उत्सुकता बढ़ गई, लेकिन निर्धारित समय पर न तो कोई क्लास हुई और न ही खान सर सार्वजनिक रूप से सामने आए। इसके बाद उनके वकील ने सामने आकर कानूनी पक्ष रखा और उन्हें निर्दोष बताया। पूरा विवाद उस घटना से जुड़ा है जिसमें कथित तौर पर कोचिंग संस्थान के बाहर फायरिंग हुई थी। पुलिस के अनुसार दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दो सुरक्षा गार्डों ने लोगों में भय और दहशत फैलाने के उद्देश्य से गोली चलाई। प्राथमिकी में यह भी दावा किया गया है कि दोनों अंगरक्षकों ने पूछताछ के दौरान कहा कि उन्होंने खान सर के निर्देश पर फायरिंग की थी।

आरोप है कि कोचिंग संस्थान के बाहर कुछ लोग हंगामा कर रहे थे और सुरक्षा कर्मियों के साथ मारपीट की स्थिति बन गई थी। शिकायत के अनुसार इसी दौरान कथित तौर पर खान सर ने सुरक्षा गार्डों से कार्रवाई करने को कहा, जिसके बाद फायरिंग हुई। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर खान सर की ओर से आरोपों को खारिज किया जा रहा है और कहा जा रहा है कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक यदि जांच और अदालत में यह साबित हो जाता है कि फायरिंग का आदेश वास्तव में खान सर ने दिया था, तो उनके खिलाफ दर्ज धाराएं गंभीर साबित हो सकती हैं। भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप सिद्ध हुए तो सजा 10 वर्ष तक पहुंच सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय अदालत और जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगा। फिलहाल पूरे मामले में राजनीतिक बयानबाजी, सोशल मीडिया पर बहस और छात्रों की प्रतिक्रियाओं के बीच एक बात साफ है कि आने वाले कुछ दिन खान सर के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। सोमवार को प्रस्तावित अग्रिम जमानत याचिका और पुलिस की अगली रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हैं। बिहार के सबसे चर्चित शिक्षकों में शामिल खान सर के खिलाफ दर्ज यह मामला अब केवल कानूनी नहीं, बल्कि जनचर्चा का भी बड़ा विषय बन चुका है।

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