लोकसभा में राहुल गांधी का बड़ा हमला: ‘अंधभक्त मूर्ख को भगवान मानते हैं’, बयान पर सदन में मचा बवाल, पेपर लीक बिल पर गरमाई संसद

Editorial
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नई दिल्ली संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को लोकसभा में उस समय जबरदस्त हंगामा देखने को मिला जब कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरा। अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि “अंधभक्त मूर्ख को भगवान मानते हैं”, जिसके बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ा विरोध जताया और सदन में जोरदार शोर-शराबा शुरू हो गया।राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया जब लोकसभा में ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा चल रही थी। सरकार इस विधेयक को परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि केवल कानून बनाने से पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं रुकेंगी।

छात्रों की बातचीत का किया जिक्र

अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा कि हाल के दिनों में उन्होंने कई छात्रों और छात्राओं से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि युवाओं ने उन्हें शिक्षा व्यवस्था की कई कमियां समझाईं। राहुल के अनुसार, छात्रों ने उन्हें बताया कि एक सच्चा विद्यार्थी वही होता है जिसका मन और दिमाग खुला हो, जो यह स्वीकार करे कि उसे सब कुछ नहीं पता और वह लगातार सीखने को तैयार रहे।]राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों ने उन्हें यह भी बताया कि कुछ लोग यह मान लेते हैं कि सारा ज्ञान उनके भीतर ही है और उन्हें किसी से सीखने की जरूरत नहीं। राहुल के मुताबिक, जब उन्होंने छात्रों से पूछा कि ऐसे लोगों को क्या कहा जाए तो छात्रों ने जवाब दिया कि वे “बेवकूफ” होते हैं। इसी संदर्भ में राहुल गांधी ने कहा कि “अंधभक्त मूर्ख को भगवान मानते हैं।”इस टिप्पणी के सामने आते ही भाजपा सांसदों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और सदन में हंगामे की स्थिति बन गई। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने राहुल गांधी से बयान वापस लेने की मांग की, जबकि विपक्षी सांसद उनके समर्थन में खड़े दिखाई दिए।

शिक्षा व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था केवल परीक्षा तक सीमित होकर रह गई है। उन्होंने दावा किया कि एक छात्र के परिवार को केवल एक परीक्षा की तैयारी और उसे देने में इतना खर्च करना पड़ता है कि वह राशि शिक्षा बजट के बड़े हिस्से के बराबर महसूस होती है।उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं होनी चाहिए, बल्कि युवाओं के व्यक्तित्व, सोच और ज्ञान को विकसित करने का माध्यम बननी चाहिए। राहुल ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में छात्रों पर आर्थिक और मानसिक दोनों तरह का दबाव बढ़ता जा रहा है।

युवाओं के प्रदर्शन का किया समर्थन

राहुल गांधी ने हाल के छात्र आंदोलनों और प्रदर्शन का भी खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि युवाओं के विरोध को गुस्सा, हिंसा या नफरत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह देश के युवाओं की भावनाओं और भविष्य की चिंता का प्रदर्शन है।उन्होंने कहा कि यदि भाजपा के नेता अपने घर जाकर अपने बच्चों से पूछें कि वे छात्र आंदोलनों के बारे में क्या सोचते हैं, तो उन्हें पता चलेगा कि देश का युवा किस प्रकार की शिक्षा व्यवस्था चाहता है।राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं की आवाज सुनना हर राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है और सरकार को छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए।

सरकार पर साधा निशाना

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार पेपर लीक की घटनाओं को रोकने में पूरी तरह विफल रही है। उनका कहना था कि हर बार नया कानून बनाने की बात होती है, लेकिन परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था विकसित नहीं की जाती।उन्होंने कहा कि लाखों युवाओं की मेहनत उस समय बेकार हो जाती है जब परीक्षा प्रश्नपत्र लीक हो जाते हैं। इससे केवल उम्मीदवारों का नुकसान नहीं होता बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।

भाजपा का पलटवार

राहुल गांधी के बयान के बाद भाजपा सांसदों ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। सत्ता पक्ष का कहना था कि विपक्ष गंभीर विधायी चर्चा को राजनीतिक मंच में बदलने की कोशिश कर रहा है।भाजपा नेताओं ने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए लगातार कदम उठा रही है और नया संशोधन विधेयक भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उनका आरोप था कि कांग्रेस केवल राजनीतिक लाभ के लिए छात्रों के मुद्दे का इस्तेमाल कर रही है।

प्रियंका गांधी के बयान पर भी विवाद

इससे पहले कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को लेकर दिए गए बयान पर भी संसद में विवाद हुआ। प्रियंका गांधी ने कहा कि उन्होंने केवल सच कहा है और यदि सच बोलना असंसदीय माना जाता है तो वह इसके लिए किसी भी कार्रवाई का सामना करने को तैयार हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं से जुड़े कई मामलों में मंत्री के पुराने बयानों और घटनाओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इस पर भाजपा ने कांग्रेस पर व्यक्तिगत आरोप लगाने और संसदीय मर्यादा तोड़ने का आरोप लगाया।

शशि थरूर ने भी उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी संशोधन विधेयक पर चर्चा करते हुए कहा कि केवल कठोर सजा का प्रावधान कर देने से पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं रुकेंगी। उन्होंने कहा कि यदि जांच व्यवस्था, परीक्षा सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया मजबूत नहीं होगी तो नया कानून भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाएगा।थरूर ने फास्ट ट्रैक कोर्ट की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले से लंबित मामलों का बोझ कम किए बिना केवल नए प्रावधान जोड़ना पर्याप्त नहीं होगा।

संसद में जारी है टकराव

मानसून सत्र के दौरान शिक्षा, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य का मुद्दा केंद्र में बना हुआ है। विपक्ष लगातार सरकार को इन मुद्दों पर घेर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वह परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।राहुल गांधी के बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। एक ओर कांग्रेस इसे छात्रों की आवाज और शिक्षा सुधार की मांग बता रही है, वहीं भाजपा इसे संसद की गरिमा के खिलाफ बताते हुए कांग्रेस पर राजनीतिक बयानबाजी का आरोप लगा रही है।आने वाले दिनों में पेपर लीक विरोधी विधेयक पर चर्चा और विपक्ष-सरकार के बीच तीखी नोकझोंक जारी रहने की संभावना है। संसद के मानसून सत्र में शिक्षा और युवाओं का मुद्दा अब सबसे बड़े राजनीतिक विमर्शों में शामिल हो चुका है।

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