जहां इंसानों की नहीं, हैकर्स की होती है एंट्री! FBI के रहस्यमयी Ghost Town का चौंकाने वाला सच

Editorial
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दुनिया में साइबर अपराध जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए अब सुरक्षा एजेंसियां भी पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर नई रणनीतियां अपना रही हैं। लेकिन क्या आपने कभी ऐसा शहर देखा है, जहां सड़कें हों, अस्पताल हो, होटल हों, अदालत हो, गैस स्टेशन हों, ट्रैफिक लाइट्स भी लगी हों, लेकिन वहां कोई इंसान नहीं रहता हो? और सबसे हैरान करने वाली बात यह कि इस शहर में आम लोगों के जाने पर रोक है, जबकि हैकर्स को यहां खुली छूट दी गई है। सुनने में यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी लग सकती है, लेकिन यह पूरी तरह सच है। अमेरिका की सबसे बड़ी जांच एजेंसी एफबीआई ने ऐसा ही एक ‘भूतिया शहर’ बसाया है, जो आज पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। अमेरिका के अलबामा राज्य के हंट्सविले शहर में स्थित इस अनोखे प्रोजेक्ट का नाम ‘काइनेटिक साइबर रेंज’ रखा गया है। यह कोई साधारण ट्रेनिंग सेंटर नहीं, बल्कि एक ऐसा नकली शहर है जिसे पूरी तरह वास्तविक शहर की तरह डिजाइन किया गया है। यहां अस्पताल हैं, बिजली सप्लाई सिस्टम है, होटल हैं, सरकारी कार्यालय हैं, सड़कें हैं और ट्रैफिक व्यवस्था भी मौजूद है। लेकिन इसके बावजूद यहां न तो कोई परिवार रहता है और न ही कोई आम नागरिक घूमने आ सकता है।एफबीआई ने इस शहर को खास तौर पर साइबर सुरक्षा से जुड़े खतरों से निपटने के लिए तैयार किया है। यहां अधिकारियों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को ऐसे हालात में ट्रेनिंग दी जाती है, जैसे वे किसी असली शहर में साइबर हमले का सामना कर रहे हों। यही वजह है कि इसे दुनिया का सबसे अनोखा और रहस्यमयी ट्रेनिंग सेंटर भी कहा जा रहा है। करीब 22 हजार वर्गफुट में फैला यह शहर बाहर से बिल्कुल सामान्य नजर आता है। अगर कोई दूर से देखे तो उसे लगेगा कि यह एक छोटा लेकिन आधुनिक शहर है। लेकिन इसकी असली पहचान इसके डिजिटल नेटवर्क और अत्याधुनिक तकनीक में छिपी हुई है। यहां लगाए गए सभी उपकरण, सर्वर, नेटवर्क और डिजिटल सिस्टम वही हैं, जो वास्तविक दुनिया में अस्पतालों, बिजली कंपनियों और सरकारी संस्थानों में इस्तेमाल किए जाते हैं।

एफबीआई का मानना है कि साइबर अपराधों से लड़ाई सिर्फ किताबों और क्लासरूम के जरिए नहीं जीती जा सकती। आज के दौर में हैकर्स इतनी तेजी से तकनीक बदल रहे हैं कि सुरक्षा एजेंसियों को भी उसी स्तर की तैयारी करनी होगी। इसी सोच के तहत इस नकली शहर को बनाया गया है, जहां अधिकारियों को असली जैसी परिस्थितियों में ट्रेनिंग दी जाती है।सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां हैकर्स को भी आने की अनुमति दी जाती है, लेकिन एक नियंत्रित और सुरक्षित माहौल में। दरअसल, एफबीआई और साइबर विशेषज्ञ जानबूझकर इस शहर के नेटवर्क पर नकली साइबर हमले करवाते हैं। कई बार अस्पताल की डिजिटल व्यवस्था को हैक करने की कोशिश की जाती है, तो कभी बिजली आपूर्ति सिस्टम पर हमला कराया जाता है। इसके बाद अधिकारियों को बेहद कम समय में समस्या की पहचान करनी होती है और पूरे सिस्टम को फिर से सामान्य करना पड़ता है। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अगर भविष्य में किसी असली शहर, अस्पताल या सरकारी संस्था पर साइबर हमला हो, तो अधिकारी तुरंत कार्रवाई कर सकें और नुकसान को कम से कम किया जा सके। चूंकि यह सब एक नकली शहर में होता है, इसलिए आम लोगों या किसी वास्तविक नेटवर्क को कोई खतरा नहीं होता।एफबीआई के मुताबिक साइबर अपराध अब दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल हो चुका है। हैकर्स केवल लोगों के मोबाइल या बैंक खातों तक सीमित नहीं हैं। अब वे अस्पतालों की लाइफ सपोर्ट मशीनों, बिजली ग्रिड, सरकारी डाटाबेस और बड़ी कंपनियों के नेटवर्क को भी निशाना बना रहे हैं। कई बार ये हमले इतने खतरनाक होते हैं कि पूरे शहर की जरूरी सेवाएं ठप हो सकती हैं।अमेरिका में साइबर अपराधों से होने वाला नुकसान लगातार बढ़ रहा है। एफबीआई के आंकड़ों के अनुसार हाल के वर्षों में साइबर अपराधों से होने वाला आर्थिक नुकसान 20.9 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जो पिछले वर्षों की तुलना में लगभग 26 प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि रैंसमवेयर हमले सबसे ज्यादा खतरनाक बन चुके हैं। इन हमलों में हैकर्स किसी संस्था के पूरे सिस्टम को लॉक कर देते हैं और उसे दोबारा चालू करने के लिए भारी रकम की मांग करते हैं।ऐसे खतरनाक दौर में एफबीआई का यह ‘भूतिया शहर’ साइबर सुरक्षा की नई प्रयोगशाला बनकर उभरा है। यहां अब तक 1400 से ज्यादा अधिकारियों और विशेषज्ञों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस तरह के और भी साइबर शहर विकसित किए जा सकते हैं, ताकि बढ़ते डिजिटल खतरों का मुकाबला प्रभावी ढंग से किया जा सके।यह शहर भले ही आबादी से खाली हो, लेकिन यहां हर दिन तकनीक और सुरक्षा की एक नई जंग लड़ी जाती है। शायद यही वजह है कि दुनिया इसे ‘घोस्ट टाउन’ नहीं, बल्कि भविष्य की साइबर सुरक्षा का सबसे बड़ा किला मानने लगी है।

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