NEET पुनर्परीक्षा में अभूतपूर्व सुरक्षा: हेलीकॉप्टर, डिजिटल निगरानी और कड़ा पहरा, देशभर की नजरें 21 जून पर

Editorial
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नीट पुनर्परीक्षा को लेकर इस बार जो तस्वीर सामने आ रही है, वह पहले कभी देखने को नहीं मिली। कथित प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद रद्द की गई परीक्षा अब अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था के बीच दोबारा आयोजित की जा रही है। परीक्षा की गोपनीयता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए प्रशासन ने ऐसी तैयारियां की हैं, जिन्होंने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। प्रश्नपत्रों को सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर का सहारा लिया जा रहा है, सोशल मीडिया मंचों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और हर कदम पर सुरक्षा एजेंसियां चौकन्नी नजर आ रही हैं। तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में नीट पुनर्परीक्षा की तैयारियों ने अचानक लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी, जब शहर के आसमान में सैन्य हेलीकॉप्टर उड़ान भरते नजर आए। शुरुआत में लोगों को समझ नहीं आया कि आखिर यह गतिविधि किस लिए हो रही है, लेकिन जल्द ही स्पष्ट हो गया कि यह कोई सामान्य अभ्यास नहीं, बल्कि नीट पुनर्परीक्षा के लिए की जा रही विशेष सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। दरअसल पिछले महीने आयोजित नीट परीक्षा पर प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप लगे थे। इस विवाद के बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने 21 जून को पुनर्परीक्षा कराने का निर्णय लिया। परीक्षा की विश्वसनीयता पर उठे सवालों के बाद इस बार एजेंसी किसी भी तरह की चूक के लिए तैयार नहीं है। यही वजह है कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर असाधारण कदम उठाए गए हैं। प्रश्नपत्रों की ढुलाई के लिए विशेष योजना तैयार की गई है। तय व्यवस्था के अनुसार प्रश्नपत्र पहले दिल्ली से विमान के जरिए मदुरै पहुंचाए जाएंगे। इसके बाद उन्हें भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर से तिरुनेलवेली के आर्म्ड रिजर्व ग्राउंड तक पहुंचाया जाएगा। पूरी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा की जिम्मेदारी सेना और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों के हाथों में रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था का मकसद प्रश्नपत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखना और किसी भी तरह की लीक या गड़बड़ी की आशंका को खत्म करना है। इसी योजना को परखने के लिए तिरुनेलवेली आर्म्ड रिजर्व ग्राउंड में हेलीकॉप्टर की ट्रायल लैंडिंग कराई गई। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था की बारीकी से जांच की गई। अधिकारियों ने हर पहलू का परीक्षण किया, ताकि वास्तविक परीक्षा के दिन किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक परेशानी सामने न आए। मॉक ड्रिल के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती, प्रश्नपत्रों के परिवहन की प्रक्रिया और हेलीकॉप्टर की आवाजाही का पूरा अभ्यास किया गया। शहर के ऊपर अचानक सैन्य हेलीकॉप्टर की उड़ान ने स्थानीय लोगों का ध्यान भी खींचा। कई लोग घरों की छतों और सड़कों पर खड़े होकर इस दृश्य को देखते रहे। सोशल मीडिया पर भी हेलीकॉप्टर की तस्वीरें और वीडियो तेजी से साझा किए गए। हालांकि अधिकारियों ने साफ किया कि यह केवल सुरक्षा तैयारियों का हिस्सा है और इसका उद्देश्य परीक्षा की पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। केवल प्रश्नपत्रों की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि डिजिटल माध्यमों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के अनुरोध और उच्च शिक्षा विभाग की सिफारिश पर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। यह प्रतिबंध 22 जून तक प्रभावी रहेगा, जिसमें परीक्षा का दिन और उसके बाद की अवधि भी शामिल है। अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ समय से कुछ संगठित नकल गिरोह सोशल मीडिया मंचों का इस्तेमाल कर परीक्षा से जुड़ी फर्जी जानकारियां फैलाते रहे हैं। कथित प्रश्नपत्र लीक के नाम पर अभ्यर्थियों को भ्रमित किया जाता था और उनसे ठगी की जाती थी। इसी खतरे को देखते हुए इस बार डिजिटल निगरानी को और मजबूत किया गया है।

 

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि टेलीग्राम के मैसेज संपादन फीचर को भी अस्थायी रूप से बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। यह व्यवस्था 30 जून तक लागू रहेगी। एजेंसी का मानना है कि कुछ लोग पुराने संदेशों में बदलाव कर उन्हें प्रश्नपत्र लीक के सबूत के रूप में पेश करते थे, जिससे अभ्यर्थियों के बीच भ्रम और तनाव का माहौल पैदा हो जाता था। परीक्षा एजेंसी ने अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। केवल आधिकारिक वेबसाइट और एजेंसी के सत्यापित माध्यमों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें। अगर कोई व्यक्ति प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा करता है या किसी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि सामने आती है, तो उसकी सूचना तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दें। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी उम्मीदों का नाम है। ऐसे में उसकी पारदर्शिता और निष्पक्षता पर किसी भी तरह का सवाल पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि इस बार प्रशासन कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिखाई दे रहा। हेलीकॉप्टर के जरिए प्रश्नपत्रों की ढुलाई, मॉक ड्रिल, सोशल मीडिया पर सख्त निगरानी और डिजिटल सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम यह साफ संकेत देते हैं कि इस बार परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के लिए हर संभव कदम उठाया जा रहा है। अब देशभर के लाखों अभ्यर्थियों की नजर 21 जून पर टिकी है, जब यह पुनर्परीक्षा आयोजित होगी और यह तय होगा कि कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच परीक्षा कितनी सफल और विवादों से मुक्त रह पाती है।

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