अफेयर का राज न खुल जाए… डर ने बना दिया हैवान, छह साल के मासूम की मौत से दहला मेरठ

Editorial
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मेरठ के बहसूमा क्षेत्र से सामने आई एक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। एक छह वर्षीय मासूम की मौत ने न केवल एक परिवार की खुशियां छीन लीं, बल्कि रिश्तों, विश्वास और जिम्मेदारी को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने इस मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। आरोप है कि बच्चे की मां के परिचित और एक निजी बैंक में कार्यरत अधिकारी ने अपने निजी संबंधों का राज खुलने के डर से इस वारदात को अंजाम दिया। जानकारी के अनुसार, बहसूमा थाना क्षेत्र के रामराज इलाके में रहने वाला छह वर्षीय अंगदवीर मंगलवार को अचानक लापता हो गया था। परिवार ने जब उसकी तलाश शुरू की और कोई सुराग नहीं मिला, तो पुलिस को सूचना दी गई। जांच के दौरान सामने आए सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों ने पुलिस को एक ऐसे व्यक्ति तक पहुंचाया, जिस पर परिवार पहले भरोसा करता था। धीरे-धीरे जांच की दिशा उसी ओर मुड़ती चली गई।

परिजनों के अनुसार, मासूम के लापता होने के बाद पूरे गांव में चिंता और बेचैनी का माहौल था। परिवार को उम्मीद थी कि बच्चा जल्द सुरक्षित मिल जाएगा, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, आशंकाएं बढ़ती चली गईं। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कई टीमों का गठन किया और संदिग्धों से पूछताछ शुरू की। इसी दौरान बैंक अधिकारी अर्पित पाराशर का नाम सामने आया। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती पूछताछ में आरोपी लगातार जांच को भटकाने की कोशिश करता रहा। अलग-अलग बयान देकर वह जांच टीम को भ्रमित करता रहा, जिसके चलते कई घंटों तक पुलिस विभिन्न स्थानों पर तलाश करती रही। लेकिन जब तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और पूछताछ के दौरान मिले तथ्यों को एक-दूसरे से जोड़ा गया, तो कहानी की परतें खुलनी शुरू हो गईं।

 

जांच में सामने आया कि आरोपी और बच्चे की मां की पहचान करीब तीन वर्ष पहले हुई थी। दोनों की मुलाकात रोजमर्रा के सफर के दौरान हुई और समय के साथ यह परिचय गहरे संबंधों में बदल गया। पुलिस का दावा है कि इसी संबंध को लेकर आरोपी के मन में डर पैदा हो गया था। उसे आशंका थी कि बच्चा कुछ ऐसी बातें जानता है, जो उसके निजी जीवन और संबंधों को उजागर कर सकती हैं। यही डर धीरे-धीरे एक खतरनाक मानसिकता में बदल गया। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दुखद पहलू यह है कि जिस मासूम को दुनिया और रिश्तों की जटिलताओं का कोई ज्ञान नहीं था, वह बड़ों के फैसलों और गलतियों का शिकार बन गया। परिवार के लोग अब भी इस सदमे से उबर नहीं पाए हैं। घर में जहां कभी बच्चे की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब मातम पसरा हुआ है। मां, दादी और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

 

पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर विस्तृत पूछताछ की है और मामले से जुड़े हर पहलू की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस पूरे घटनाक्रम में किसी अन्य व्यक्ति की भी कोई भूमिका थी या नहीं। जांच एजेंसियां बच्चे की मां से भी पूछताछ कर रही हैं ताकि सभी तथ्यों को स्पष्ट किया जा सके और किसी भी संभावित कड़ी को नजरअंदाज न किया जाए। इस घटना ने समाज को एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि व्यक्तिगत संबंधों और निजी फैसलों का असर कई बार निर्दोष लोगों, खासकर बच्चों, पर कितना गंभीर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब रिश्तों में पारदर्शिता, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की कमी हो जाती है, तो उसके परिणाम बेहद दुखद हो सकते हैं।

 

फिलहाल पूरा क्षेत्र इस घटना से स्तब्ध है और लोग यही सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर एक मासूम की क्या गलती थी। जिस उम्र में उसे स्कूल, खेल और सपनों की दुनिया में होना चाहिए था, उसी उम्र में उसकी जिंदगी असमय समाप्त हो गई। यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि व्यक्तिगत स्वार्थ, भय और गलत फैसले किस तरह निर्दोष जिंदगियों को प्रभावित कर सकते हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच पूरी गंभीरता और निष्पक्षता के साथ की जा रही है। सभी साक्ष्यों और बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, परिवार को अब न्याय का इंतजार है। पूरे इलाके की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस दर्दनाक मामले में सच पूरी तरह सामने आए और दोषियों को कानून के अनुसार सख्त सजा मिले।

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