
लखनऊ सपा में संभावित टूट और सांसदों की नाराजगी को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया भूचाल खड़ा हो गया है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर एक बार फिर तीखा हमला बोलते हुए कई बड़े दावे किए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए अपने ताजा पोस्ट में राजभर ने न सिर्फ सपा के भीतर चल रही कथित अंदरूनी खींचतान का जिक्र किया, बल्कि सांसदों के टूटने और पार्टी में असंतोष बढ़ने के संकेत भी दिए। राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए लिखा, “अखिलेश बाबू, छुप-छुप के मुंबई क्यों जा रहे हो? अरे वहां तो केवल दो ही विधायक हैं, वो टूट जाएंगे तो भी कोई दिक्कत नहीं है। यहां वाले जो भागने की तैयारी में हैं, उन्हें कौन देखेगा?” उन्होंने आगे दावा किया कि मानसून सत्र शुरू होने से पहले सपा अपने सांसदों को कर्नाटक के किसी रिसॉर्ट में ले जाने की तैयारी कर रही है, लेकिन यह योजना सफल नहीं होगी। राजभर ने कहा, “मानसून सत्र शुरू होने से पहले अपने सांसदों को कर्नाटक के जिस रिसॉर्ट में ले जाना चाहते हैं, वो हो नहीं पाएगा। क्योंकि मैंने जो कहा है न कि सपा में गड़बड़ चल रहा है, ये स्क्रीन शॉट उसका एक नमूना भर है। बात इससे आगे जा चुकी है।” राजभर के इस बयान ने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। सपा में टूट की खबरों के बीच उनके इस दावे को विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों गंभीरता से देख रहे हैं। हालांकि समाजवादी पार्टी की ओर से इन आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अपने हमले को और तेज करते हुए राजभर ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी के सांसदों के एक संभावित बागी गुट का नेतृत्व पूर्वांचल के एक बड़े नेता द्वारा किया जा सकता है। उन्होंने बिना नाम लिए संकेत दिया कि यह सांसद बलिया से संबंध रखता है। राजभर ने लिखा, “सपा सांसदों के टूटने वाले गुट का नेतृत्व बागी बलिया की धरती से ताल्लुक रखने वाला एक सांसद करेगा।” उन्होंने सपा कार्यालय में आयोजित हालिया सम्मेलन का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि वहां ब्राह्मण समाज का अपमान किया गया। राजभर के अनुसार, “सपा कार्यालय में आयोजित सम्मेलन में ब्राह्मणों का जिस तरह तिरस्कार किया गया, उससे बागी बलिया का लाल बहुत आहत है। इस घटना ने आग में घी डालने का काम किया है।”राजभर यहीं नहीं रुके। उन्होंने सपा नेतृत्व और यादव परिवार पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने लिखा, “मेरी एक प्रतिक्रिया पर जिस तरह से पूरा सैफई खानदान मुझे गाली देने और सफाई देने में जुट गया, उससे ज्यादा बेहतर है कि अखिलेश ट्विटर, एक्स और पीसी वाली नेतागिरी छोड़कर अब सांसद बचाओ अभियान शुरू करें और दुखी एवं निराश सांसदों के घर जाकर उनसे माफी मांगें।”

राजनीतिक हमलों के साथ-साथ राजभर ने दलित उत्पीड़न के मुद्दे पर भी समाजवादी पार्टी को घेरने की कोशिश की। उन्होंने सपा पर दलितों के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया और पुलिस रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कई आंकड़े पेश किए। राजभर ने दावा किया, “सपा अध्यक्ष जिन शहरों में सर्वाधिक दलितों पर अत्याचार होने की बात कह रहे हैं, वहां अत्याचार करने वालों में सबसे ज्यादा यादव और मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हैं।”उन्होंने गोरखपुर जोन के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कुल 760 मामलों में 297 यादव और 344 मुस्लिम आरोपी हैं। इसी तरह बनारस जोन में दर्ज मामलों में बड़ी संख्या में यादव और मुस्लिम समुदाय के लोगों पर दलित उत्पीड़न के मुकदमे दर्ज हैं। राजभर के मुताबिक, आगरा जोन में 287 मामलों में 85 यादव और 93 मुस्लिम आरोपित हैं, जबकि कानपुर जोन में दर्ज 334 मुकदमों में 166 यादव और 57 मुस्लिमों के खिलाफ दलितों को धमकाने, गाली देने, मारपीट और हत्या जैसे गंभीर आरोपों में मुकदमे दर्ज हैं। उन्होंने प्रयागराज, बरेली, मेरठ, लखनऊ और अन्य जोनों के आंकड़े भी साझा करते हुए समाजवादी पार्टी पर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि दलित उत्पीड़न के मुद्दे पर सपा जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है, जबकि पुलिस रिकॉर्ड कुछ और ही कहानी बयान करते हैं।राजभर के लगातार आक्रामक तेवरों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। एक तरफ वे सपा में संभावित टूट और सांसदों की नाराजगी का दावा कर रहे हैं, तो दूसरी ओर सामाजिक समीकरणों और दलित उत्पीड़न के आंकड़ों के जरिए विपक्ष को घेरने का प्रयास भी कर रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या यह केवल राजनीतिक बयानबाजी है या फिर वास्तव में समाजवादी पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। आने वाले दिनों में सपा की प्रतिक्रिया और राजनीतिक घटनाक्रम इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगे।
or advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

