
उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में चल रही अंतरजनपदीय तबादला प्रक्रिया ने हजारों शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है। जिन तबादलों को शिक्षक वर्षों से राहत और पारिवारिक स्थिरता का माध्यम मान रहे थे, वही प्रक्रिया अब उनके लिए परेशानी और असमंजस का कारण बनती जा रही है। सबसे अधिक संकट शिक्षक दंपतियों के सामने खड़ा हो गया है। हालात ऐसे हैं कि बड़ी संख्या में शिक्षकों ने पहले उत्साह के साथ तबादले के लिए आवेदन किया, लेकिन नियमों और संभावित परिणामों को समझने के बाद अब वे किसी भी तरह अपने आवेदन निरस्त कराने की कोशिश में जुट गए हैं। प्रदेशभर में तबादला प्रक्रिया शुरू होने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग के कार्यालयों और निदेशालय में शिक्षकों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। कई शिक्षक दंपती इस आशंका से परेशान हैं कि तबादले के बाद उन्हें अपनी पसंद के स्थान पर नहीं बल्कि ऐसे क्षेत्रों में भेजा जा सकता है, जहां शिक्षक-छात्र अनुपात कम है। यही वजह है कि आवेदन करने वाले अनेक शिक्षक अब विभागीय अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं और आवेदन वापस लेने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

दरअसल शासन की ओर से जारी तबादला नीति में यह व्यवस्था की गई है कि यदि पति-पत्नी दोनों बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं, तो उन्हें एक ही स्थान पर तैनात करने का प्रयास किया जाएगा। पहली नजर में यह व्यवस्था शिक्षकों के हित में दिखाई देती है, लेकिन इसके साथ जो शर्त जोड़ी गई है, उसने दंपतियों की चिंता बढ़ा दी है। नियम के अनुसार ऐसे शिक्षकों को वहां भेजा जाएगा जहां शिक्षक-छात्र अनुपात कम होगा और शिक्षकों की आवश्यकता अधिक होगी। इसी बिंदु को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम और नाराजगी सामने आ रही है। शिक्षकों का कहना है कि शासनादेश में नियमों को लेकर जो स्पष्टता दिखाई गई थी, विभाग द्वारा जारी विस्तृत दिशा-निर्देशों में वह पूरी तरह नजर नहीं आ रही। कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब नहीं मिलने से शिक्षकों के मन में आशंकाएं पैदा हो गई हैं। उन्हें डर है कि वर्षों से जिस जिले या क्षेत्र में परिवार बसाया है, तबादले के बाद उन्हें दूरदराज के इलाकों में भेजा जा सकता है, जिससे पारिवारिक और सामाजिक जीवन प्रभावित होगा। इसी असमंजस का असर यह है कि बेसिक शिक्षा निदेशालय में रोजाना बड़ी संख्या में शिक्षक पहुंच रहे हैं। कोई नियमों की जानकारी लेने के लिए अधिकारियों से मुलाकात कर रहा है तो कोई आवेदन वापस लेने की प्रक्रिया जानना चाहता है। विभागीय दफ्तरों में इन दिनों तबादला प्रक्रिया ही सबसे बड़ा चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि विभाग की ओर से लगातार यह कहा जा रहा है कि शिक्षकों को घबराने की जरूरत नहीं है। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेंद्र तिवारी का कहना है कि तबादला नीति पूरी तरह पारदर्शी है और सभी निर्णय निर्धारित नियमों के अनुसार लिए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षक दंपतियों के मामले में भी शिक्षक-छात्र अनुपात को ध्यान में रखते हुए ही स्थानांतरण किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सरप्लस शिक्षकों की सूची शनिवार को जारी की जाएगी, जिसके बाद प्रक्रिया और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।दूसरी ओर तबादला प्रक्रिया को लेकर केवल शिक्षक दंपती ही परेशान नहीं हैं। वर्षों से स्थानांतरण का इंतजार कर रहे वरिष्ठ शिक्षकों में भी गहरा असंतोष दिखाई दे रहा है। उनका आरोप है कि लंबे समय से सेवा देने वाले शिक्षकों की उपेक्षा की जा रही है, जबकि नई व्यवस्थाओं और विशेष श्रेणियों को प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे शिक्षक अब खुलकर विरोध की राह पर उतर आए हैं।
वरिष्ठ शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने 10 से 15 वर्ष तक कठिन परिस्थितियों में सेवाएं दी हैं, लेकिन उन्हें अब तक अपनी पसंद के जिले में स्थानांतरण का अवसर नहीं मिला। कई शिक्षक ऐसे हैं जो वर्षों से परिवार से दूर रहकर नौकरी कर रहे हैं। उनका मानना है कि यदि तबादला प्रक्रिया में वरिष्ठता को प्राथमिक आधार नहीं बनाया गया तो उनके साथ अन्याय होगा।इसी मुद्दे को लेकर वरिष्ठ शिक्षकों ने आंदोलन का ऐलान कर दिया है। शिक्षक नेता राजीव गौड़ ने कहा कि वर्तमान तबादला प्रक्रिया में उन शिक्षकों की अनदेखी की जा रही है जो लंबे समय से स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि प्रदेशभर में तबादले वरिष्ठता के आधार पर किए जाएं ताकि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को न्याय मिल सके। वरिष्ठ शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इसी क्रम में 22 जून को बेसिक शिक्षा निदेशालय पर धरना देने का निर्णय लिया गया है। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शिक्षकों के शामिल होने की संभावना है।तबादला प्रक्रिया शुरू होने के साथ जिस राहत और उम्मीद की तस्वीर दिखाई दे रही थी, वह अब विवाद, असंतोष और आशंकाओं में बदलती नजर आ रही है। एक तरफ शिक्षक दंपती अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं तो दूसरी ओर वरिष्ठ शिक्षक अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए सड़क पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में सबकी नजर अब सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग पर टिकी है कि वह नियमों को लेकर पैदा हुए भ्रम को कैसे दूर करता है और शिक्षकों की नाराजगी को किस तरह शांत करता है। आने वाले दिनों में यह तबादला प्रक्रिया प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ शिक्षकों की राजनीति का भी बड़ा मुद्दा बन सकती है।
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