देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 के री-एग्जाम को लेकर पूरे देश में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी गई है। पेपर लीक विवाद के बाद रद्द हुई परीक्षा के लगभग सात सप्ताह बाद अब राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) किसी भी कीमत पर कोई चूक नहीं होने देना चाहती। यही वजह है कि परीक्षा से एक दिन पहले देशभर में व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित की गई, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था, परीक्षा सामग्री की ढुलाई, केंद्रों की निगरानी और अभ्यर्थियों के प्रवेश से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं का बारीकी से परीक्षण किया गया। रविवार को होने वाली इस परीक्षा में 22.79 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल होंगे, जिससे यह दुनिया की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में से एक बन गई है। पिछले कुछ महीनों से नीट परीक्षा लगातार विवादों के केंद्र में रही है। पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के आरोपों के बाद देशभर में छात्रों का आक्रोश देखने को मिला था। मामला अदालतों तक पहुंचा और अंततः परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित करने का फैसला लिया गया। अब एनटीए और केंद्र सरकार की प्रतिष्ठा भी इस परीक्षा से जुड़ गई है, इसलिए सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर कोई जोखिम नहीं लिया जा रहा। शनिवार को आयोजित मॉक ड्रिल के दौरान परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी नेटवर्क, बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली, प्रश्नपत्रों की सुरक्षित ढुलाई और कंट्रोल रूम की निगरानी प्रणाली का परीक्षण किया गया। दिल्ली स्थित एनटीए मुख्यालय में भी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस बार परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के लिए बहुस्तरीय निगरानी तंत्र तैयार किया गया है। रविवार को होने वाली परीक्षा भारत के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में आयोजित की जाएगी। परीक्षा दोपहर 2 बजे शुरू होकर शाम 5 बजकर 15 मिनट तक चलेगी। वहीं दिव्यांग अभ्यर्थियों को अतिरिक्त समय की सुविधा दी गई है। ऐसे उम्मीदवार, जो अतिरिक्त समय के पात्र हैं, उन्हें शाम 6 बजकर 20 मिनट तक परीक्षा देने की अनुमति होगी। एनटीए ने सभी अभ्यर्थियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे सुबह 11 बजे से दोपहर 1:30 बजे के बीच अपने परीक्षा केंद्र पर पहुंच जाएं। दोपहर 1:30 बजे के बाद किसी भी उम्मीदवार को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। एनटीए ने इस बार सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए हैं, जो पहले कभी देखने को नहीं मिले। पहली बार प्रश्नपत्रों और गोपनीय परीक्षा सामग्री को सुरक्षित ढंग से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना की सहायता ली जा रही है। परीक्षा सामग्री ले जाने वाले वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाया गया है और उनके साथ पुलिस एस्कॉर्ट भी मौजूद रहेगा। इससे हर गतिविधि पर वास्तविक समय में नजर रखी जा सकेगी। परीक्षा की निगरानी के लिए 674 सिटी कोऑर्डिनेटर और 6,669 ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए हैं। इसके अलावा केंद्रों पर सेंटर सुपरिटेंडेंट, इनविजिलेटर और अन्य कर्मचारियों की तैनाती की गई है। एनटीए के अनुसार पुलिस, जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों के दो लाख से अधिक कर्मचारी परीक्षा संचालन में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल रहेंगे। यह संख्या अपने आप में इस परीक्षा के विशाल स्वरूप को दर्शाती है। फर्जी अभ्यर्थियों और पहचान संबंधी धोखाधड़ी को रोकने के लिए इस बार आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन को अनिवार्य बनाया गया है। सत्यापन प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने के लिए अतिरिक्त बायोमेट्रिक मशीनें तथा प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की भी व्यवस्था की गई है। सभी परीक्षा केंद्रों पर लगे सीसीटीवी कैमरे केंद्रीय कंट्रोल रूम से जुड़े होंगे, जहां से हर गतिविधि की लाइव निगरानी की जाएगी। गर्मी और मौसम को ध्यान में रखते हुए भी विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। सभी परीक्षा केंद्रों पर पर्याप्त बिजली, पंखों, रोशनी, पीने के पानी, साफ-सफाई और मेडिकल सहायता की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। अभ्यर्थियों को पारदर्शी पानी की बोतल ले जाने की अनुमति होगी। वहीं डायबिटीज से पीड़ित उम्मीदवार निर्धारित नियमों के अनुसार शुगर टैबलेट और केला, सेब, संतरा जैसे फल भी साथ ला सकेंगे।

एनटीए ने छात्रों को सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से सावधान रहने की सलाह दी है। एजेंसी ने स्पष्ट कहा है कि पेपर लीक, फर्जी आंसर-की या पैसे लेकर परीक्षा में मदद दिलाने जैसे दावों पर विश्वास न करें। छात्रों तक सही और आधिकारिक जानकारी पहुंचाने के लिए एनटीए ने विशेष व्हाट्सएप चैनल भी शुरू किया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी परीक्षा की तैयारियों की समीक्षा के लिए कई उच्चस्तरीय बैठकें की हैं। सरकार इस परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए लगातार निगरानी कर रही है। वहीं राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने अपने अधीन सभी मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों को 20 और 21 जून के दौरान छात्रों को छुट्टी नहीं देने का निर्देश दिया है, ताकि परीक्षा से जुड़ी किसी भी गतिविधि पर प्रभाव न पड़े।कई राज्य सरकारों ने भी अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए विशेष कदम उठाए हैं। कुछ राज्यों में परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने वाले छात्रों को सरकारी बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा दी जा रही है, ताकि उन्हें किसी प्रकार की परिवहन संबंधी परेशानी का सामना न करना पड़े।नीट-यूजी 2026 का यह री-एग्जाम केवल एक प्रवेश परीक्षा नहीं, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता की भी परीक्षा माना जा रहा है। लाखों छात्रों की उम्मीदें, सरकार की साख और एनटीए की प्रतिष्ठा इस परीक्षा से जुड़ी हुई है। यही कारण है कि इस बार हर स्तर पर अभूतपूर्व सतर्कता बरती जा रही है। अब पूरे देश की नजर रविवार को होने वाली परीक्षा पर टिकी है, जहां 22 लाख से अधिक अभ्यर्थी अपने मेडिकल करियर का सपना साकार करने के लिए परीक्षा केंद्रों में बैठेंगे।
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