
लखनऊ राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को हुआ भीषण अग्निकांड पूरे प्रदेश को झकझोर गया। जिस इमारत में बच्चों के सपने आकार ले रहे थे, वही इमारत देखते ही देखते मौत का जाल बन गई। आग की भयावह लपटों ने 15 छात्रों की जिंदगी निगल ली, जबकि कई छात्र गंभीर रूप से घायल होकर अस्पतालों में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं। इस दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) और फोरेंसिक टीम ने मंगलवार सुबह घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी। फोरेंसिक विशेषज्ञों ने पूरी इमारत को सील कर दिया है। टीम आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए हर कोने से सबूत जुटा रही है। हालांकि शुरुआती जांच में एसी का कंप्रेसर फटने और शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, लेकिन अधिकारी अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रहे हैं।
सात दिन में रिपोर्ट, दोषियों पर गिरेगी गाज
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात उच्चस्तरीय बैठक कर हादसे की विस्तृत जांच के आदेश दिए। उनके निर्देश पर गठित एसआईटी में संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के एडीजी प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। जांच दल को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि इस हादसे के लिए जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। इसी क्रम में प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने पर चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इनमें बिजली विभाग के एक्सईएन गौरव कुमार, फायर विभाग के एफएसएसओ कमलेंद्र कुमार सिंह, एलडीए के एई अनिल कुमार और जेई प्रमोद पांडे शामिल हैं। इतना ही नहीं, लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने भी पांच सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। माना जा रहा है कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद और अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक सकती है।
बिल्डिंग मालिक समेत चार गिरफ्तार
हादसे के बाद पुलिस ने भी तेजी दिखाते हुए बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, पेट शॉप संचालक रामकृष्ण उपाध्याय, एनीमेशन सेंटर संचालक तूशॉक कृष्णा जायसवाल और किरायेदार सुरेश कुमार साहू को गिरफ्तार कर लिया है।वहीं एफआईआर में नामजद दो अन्य आरोपी धीरेंद्र शुक्ला और सुरेंद्र शुक्ला अभी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) बबलू कुमार के मुताबिक पुरनिया चौकी प्रभारी की तहरीर पर छह नामजद और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं तथा उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस पूरे मामले में और कौन-कौन लोग जिम्मेदार हैं।
कैसे मौत का फंदा बनी तीन मंजिला इमारत?
जानकारी के अनुसार अलीगंज के पुरनिया इलाके में स्थित इस इमारत के भूतल पर पेट शॉप संचालित होती थी। पहली मंजिल को गोदाम के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, जबकि दूसरी और तीसरी मंजिल पर थ्री-डी एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर, गेमिंग जोन और छात्रों के लिए कोचिंग सेंटर चल रहा था।सोमवार दोपहर करीब ढाई बजे अचानक गोदाम में आग लग गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। देखते ही देखते धुएं और लपटों ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया।ऊपरी मंजिलों पर मौजूद छात्र बाहर निकलने का रास्ता तलाशते रह गए। कई छात्र धुएं के कारण बेहोश हो गए तो कुछ ने जान बचाने के लिए ऊंचाई से छलांग लगा दी। कई बच्चों के चीखने और मदद की गुहार लगाने की तस्वीरें लोगों को झकझोर गईं।
दो घंटे तक चला मौत से मुकाबला
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं। आग इतनी भयावह थी कि बचाव दल को अंदर पहुंचने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।करीब दो घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में एक-एक कर 15 छात्रों के शव बाहर निकाले गए। कई बच्चे गंभीर रूप से झुलसी हालत में मिले। घायल छात्रों को तत्काल विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कई की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है।राहतकर्मियों के मुताबिक अगर इमारत में पर्याप्त अग्नि सुरक्षा व्यवस्था होती और आपातकालीन निकास मार्ग उपलब्ध होते तो शायद इतनी बड़ी जनहानि टाली जा सकती थी।
जनसभा छोड़ लौटे मुख्यमंत्री
हादसे के समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। घटना की सूचना मिलते ही उन्होंने अपना कार्यक्रम बीच में छोड़ा और तत्काल लखनऊ लौट आए।मुख्यमंत्री ने घटनास्थल का निरीक्षण किया, घायलों का हाल जाना और अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए।वहीं रक्षा मंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने भी घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और स्थिति की जानकारी लेने के लिए राजधानी पहुंचने का निर्णय लिया।
कई सवालों के जवाब अभी बाकी
इस दर्दनाक हादसे ने प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या इमारत में फायर एनओसी थी? क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था? क्या कोचिंग सेंटर और एनीमेशन संस्थान के संचालन की अनुमति वैध थी? और सबसे बड़ा सवाल—अगर समय रहते सुरक्षा इंतजाम किए गए होते तो क्या 15 बच्चों की जान बच सकती थी?इन सभी सवालों के जवाब अब एसआईटी और फोरेंसिक जांच से सामने आएंगे।फिलहाल लखनऊ के अलीगंज की वह इमारत खामोश खड़ी है, लेकिन उसकी दीवारों पर दर्ज दर्दनाक चीखें पूरे प्रदेश को झकझोर रही हैं। 15 परिवारों के घरों में पसरा मातम यह याद दिला रहा है कि सुरक्षा नियमों में छोटी सी लापरवाही भी कितनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है।
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