सीतापुर उत्तर प्रदेश के सीतापुर में सोमवार को एक ऐसी प्रशासनिक कार्रवाई हुई जिसने जिले की राजनीति में हलचल मचा दी। टाउन हॉल परिसर में पिछले 21 वर्षों से संचालित समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय पर प्रशासन का बुलडोजर गरज उठा। कुछ ही घंटों में वह इमारत, जो दो दशकों से अधिक समय तक राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रही, मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके को पुलिस छावनी में बदल दिया गया था। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में चार बुलडोजरों ने एक साथ मोर्चा संभाला और इमारत को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई की सूचना मिलते ही मौके पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। देखते ही देखते पूरा परिसर लोगों की भीड़ और चर्चा का केंद्र बन गया।
- 21 साल से चल रहा था सपा का जिला कार्यालय
- डीएम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई कार्रवाई
- सुबह पहुंची टीम, दोपहर तक ढह गई पूरी इमारत
- इलाके में चर्चा का विषय बनी कार्रवाई
- प्रशासन का दावा—कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद हुई कार्रवाई
- राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल
- सरकारी जमीन पर कब्जे के खिलाफ बड़ा संदेश
- मलबे में बदली इमारत, पीछे छोड़ गई कई सवाल
21 साल से चल रहा था सपा का जिला कार्यालय
जानकारी के अनुसार समाजवादी पार्टी का जिला कार्यालय वर्ष 2004 से टाउन हॉल परिसर में संचालित हो रहा था। यह कार्यालय जिले में पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों, बैठकों और कार्यक्रमों का प्रमुख केंद्र माना जाता था। वर्षों से यहां नेताओं और कार्यकर्ताओं का आना-जाना लगा रहता था। लेकिन हाल ही में जमीन के स्वामित्व को लेकर चली कानूनी प्रक्रिया के बाद प्रशासन ने इस परिसर को सरकारी भूमि घोषित करते हुए कब्जा मुक्त कराने की कार्रवाई शुरू कर दी। इसके बाद से ही इस भवन पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही थी।
डीएम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई कार्रवाई
सूत्रों के मुताबिक टाउन हॉल परिसर की जमीन को लेकर लंबे समय से प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया चल रही थी। मामले की सुनवाई के बाद जिलाधिकारी न्यायालय ने संबंधित भूमि को राज्य सरकार में निहित करने का आदेश दिया था।,प्रशासन का कहना है कि यह जमीन सरकारी संपत्ति है और इसे खाली कराने के लिए कई बार नोटिस जारी किए गए थे। संबंधित पक्षों को परिसर खाली करने के निर्देश भी दिए गए, लेकिन निर्धारित समय तक भूमि खाली नहीं की गई। इसके बाद प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई का फैसला लिया।

सुबह पहुंची टीम, दोपहर तक ढह गई पूरी इमारत
सोमवार सुबह प्रशासनिक अधिकारियों, राजस्व विभाग की टीम और पुलिस बल ने टाउन हॉल परिसर पहुंचकर पूरे इलाके को अपने नियंत्रण में ले लिया। किसी भी प्रकार के विरोध या अव्यवस्था की आशंका को देखते हुए पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। इसके बाद चार जेसीबी मशीनों ने इमारत को गिराने का काम शुरू किया। भारी मशीनों की गड़गड़ाहट के बीच कुछ ही समय में भवन की दीवारें और छत धराशायी हो गईं। दो दशक पुरानी इमारत धीरे-धीरे टूटकर मलबे के ढेर में बदल गई।
इलाके में चर्चा का विषय बनी कार्रवाई
कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए। लोग दूर-दूर तक खड़े होकर बुलडोजर की कार्रवाई देखते रहे। कई लोगों के लिए यह दृश्य चौंकाने वाला था क्योंकि यह भवन लंबे समय से जिले की राजनीतिक पहचान का हिस्सा रहा था। स्थानीय लोगों का कहना था कि वर्षों से जिस भवन में राजनीतिक गतिविधियां होती थीं, उसका अचानक इस तरह ध्वस्त होना जिले के राजनीतिक इतिहास का बड़ा घटनाक्रम है।
प्रशासन का दावा—कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद हुई कार्रवाई
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। भूमि को सरकारी संपत्ति घोषित किए जाने के बाद कब्जा हटाने की कार्रवाई अनिवार्य हो गई थी। अधिकारियों के अनुसार संबंधित पक्षों को पर्याप्त समय दिया गया था और सभी आवश्यक नोटिस जारी किए गए थे। प्रशासन का यह भी कहना है कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जाएगा और आगे भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल
सपा जिला कार्यालय पर चली बुलडोजर कार्रवाई के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। जिले में यह मुद्दा दिनभर चर्चा का विषय बना रहा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस कार्रवाई का असर स्थानीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है। हालांकि प्रशासन इसे पूरी तरह राजस्व और सरकारी भूमि से जुड़ा मामला बता रहा है, लेकिन घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
सरकारी जमीन पर कब्जे के खिलाफ बड़ा संदेश
सीतापुर में हुई यह कार्रवाई केवल एक भवन को गिराने तक सीमित नहीं मानी जा रही। इसे सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने के अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि चाहे जमीन कितनी भी महत्वपूर्ण क्यों न हो या उस पर कितने भी वर्षों से कब्जा क्यों न हो, यदि वह सरकारी संपत्ति है तो उसे खाली कराया जाएगा।
मलबे में बदली इमारत, पीछे छोड़ गई कई सवाल
करीब 21 वर्षों तक जिले की राजनीति का केंद्र रहे समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय की इमारत अब इतिहास बन चुकी है। जहां कभी राजनीतिक रणनीतियां तैयार होती थीं, वहां अब मलबा फैला हुआ है। बुलडोजर की यह कार्रवाई जिले में लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहेगी।फिलहाल प्रशासन ने भूमि को पूरी तरह कब्जा मुक्त करा लिया है और आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। लेकिन इस कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी भूमि, राजनीतिक संस्थानों और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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