

राजधानी लखनऊ में सोमवार का दिन उस वक्त मातम में बदल गया, जब अलीगंज इलाके में स्थित एक एनीमेशन कोचिंग सेंटर में भीषण आग लग गई। कुछ ही मिनटों में धुएं और आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। अंदर मौजूद छात्र जान बचाने के लिए चीखते-चिल्लाते रहे, कई ने दूसरी मंजिल से छलांग लगा दी, लेकिन 15 मासूम जिंदगियां इस अग्निकांड की भेंट चढ़ गईं। हादसे की भयावहता ऐसी थी कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपना अलीगढ़ दौरा बीच में छोड़कर तुरंत लखनऊ लौटना पड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गहरा शोक व्यक्त करते हुए मुआवजे की घोषणा की है।

लखनऊ के अलीगंज इलाके में स्थित एक कोचिंग सेंटर… जहां रोज़ाना सैकड़ों युवा अपने सपनों को उड़ान देने पहुंचते थे… सोमवार को वही इमारत चीखों, धुएं और मौत का मंजर बन गई।दोपहर करीब ढाई बजे अलीगंज सेक्टर-डी के एमएस-102 स्थित “हेड एंड हॉपर्स एनीमेशन एंड गेमिंग जोन” में अचानक आग भड़क उठी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक एसी का कंप्रेशर फटने से आग लगी और देखते ही देखते धुएं ने पूरी बिल्डिंग को भर लिया। दूसरी मंजिल पर मौजूद छात्रों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।धुएं का गुबार बढ़ता गया… सांसें घुटने लगीं… और जान बचाने की जद्दोजहद शुरू हो गई। कई छात्रों ने खिड़कियों और बालकनी से छलांग लगा दी। कोई गंभीर रूप से घायल हुआ तो कोई जिंदगी और मौत के बीच झूलता रहा।प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक घटनास्थल पर कुछ ही मिनटों में अफरा-तफरी मच गई। चारों तरफ चीख-पुकार गूंज रही थी। स्थानीय लोग सबसे पहले मदद के लिए आगे आए और कई छात्रों को बाहर निकालने का प्रयास किया।
सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंच गए। आग इतनी भीषण थी कि रेस्क्यू टीम को बगल के मकान की छत से कोचिंग सेंटर की दीवार तोड़कर अंदर पहुंचना पड़ा। घंटों तक चले अभियान में कई लोगों को बाहर निकाला गया और ट्रॉमा सेंटर भेजा गया।लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। आग और जहरीले धुएं के बीच फंसे 15 छात्रों की मौत हो गई। अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या बढ़ भी सकती है क्योंकि कई घायल गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं।हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अलीगढ़ में चल रहा अपना कार्यक्रम बीच में ही छोड़ दिया। मंच से संबोधन करते हुए उन्होंने कहा कि लखनऊ में हुई इस दुखद घटना की वजह से उन्हें तत्काल राजधानी लौटना पड़ रहा है।लखनऊ पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री सीधे घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने राहत और बचाव कार्यों की जानकारी ली और अधिकारियों को घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके दुख की भरपाई कभी नहीं की जा सकती। साथ ही उन्होंने पुलिस महानिदेशक और अपर मुख्य सचिव गृह को मौके पर जाकर विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि हादसे की हर परत की जांच होगी और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस हृदयविदारक हादसे पर गहरा दुख जताया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी संदेश में प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।इसके साथ ही प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को पचास हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।हादसे ने राजनीतिक गलियारों को भी झकझोर दिया है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि इस तरह की जानलेवा घटनाएं परिवारों की उम्मीदों को हमेशा के लिए तोड़ देती हैं। उन्होंने ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया।
वहीं घटनास्थल पर पहुंचे उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद कई शव देखे हैं और यह दृश्य बेहद पीड़ादायक है।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कोचिंग सेंटर में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे? क्या फायर एनओसी और सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था? क्या आपात स्थिति में छात्रों को बाहर निकालने के लिए पर्याप्त रास्ते मौजूद थे?इन सवालों के जवाब जांच के बाद सामने आएंगे, लेकिन फिलहाल 15 परिवारों के घरों में मातम पसरा हुआ है। जिन माता-पिता ने सुबह अपने बच्चों को बेहतर भविष्य बनाने के लिए कोचिंग भेजा था, शाम तक उन्हें उनके शव मिलने की खबर मिली।लखनऊ का यह अग्निकांड सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्थाओं पर एक बड़ा सवाल है। यह हादसा याद दिलाता है कि शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी कितनी भयावह कीमत वसूल सकती है। लखनऊ के अलीगंज में हुआ यह अग्निकांड राजधानी के इतिहास के सबसे दर्दनाक हादसों में दर्ज हो गया है। 15 मासूम जिंदगियां बुझ चुकी हैं, कई घायल अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं और पूरा प्रदेश शोक में डूबा है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर हैं, ताकि यह पता चल सके कि आखिर सपनों की इस इमारत को मौत के जाल में किसकी लापरवाही ने बदला।
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