
पटना देश में लगाए गए आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ के अवसर पर गुरुवार को राजधानी पटना राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनी रही। गांधी मैदान स्थित ज्ञान भवन में भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित “संविधान हत्या दिवस” कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह सहित एनडीए के कई वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान आपातकाल के दौर को भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय बताते हुए कांग्रेस और विपक्ष पर तीखे राजनीतिक हमले किए गए। ज्ञान भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में भाजपा कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ उमड़ी। पूरा परिसर भगवा झंडों और पार्टी के बैनरों से सजा नजर आया। मंच से नेताओं ने 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल को लोकतंत्र और संविधान पर सबसे बड़ा हमला करार दिया। वक्ताओं ने कहा कि देश की नई पीढ़ी को उस दौर की सच्चाई से परिचित कराना जरूरी है ताकि भविष्य में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर ऐसा संकट दोबारा न आए।केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने अपने संबोधन में आपातकाल के दौर की घटनाओं को याद करते हुए भावुक और आक्रामक दोनों अंदाज में कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 को देश के लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचल दिया गया था और लाखों लोगों की आवाज दबाने का प्रयास किया गया था। उन्होंने कहा कि आज “लोकतंत्र हत्या दिवस” और “संविधान हत्या दिवस” के अवसर पर लिया गया संकल्प आने वाली पीढ़ियों को लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रेरित करेगा।गिरिराज सिंह ने छात्र आंदोलन और लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि गुजरात से शुरू हुआ आंदोलन दिल्ली के रामलीला मैदान तक पहुंचा और फिर पूरे देश में फैल गया। उन्होंने कहा कि जयप्रकाश नारायण उस दौर में लोकतंत्र बचाने की सबसे बड़ी आवाज बनकर उभरे थे। उन्होंने एक प्रसिद्ध प्रसंग का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय धर्मयुग पत्रिका में प्रकाशित एक पंक्ति बेहद चर्चित हुई थी—”अपने घरों की कुंडियां बंद कर लो, क्योंकि एक 72 साल का बूढ़ा सच कहने निकल पड़ा है।” गिरिराज सिंह ने कहा कि यह पंक्ति जयप्रकाश नारायण के संघर्ष और साहस का प्रतीक थी।

उन्होंने कहा कि आज 51 वर्ष बाद देश की जनता को यह बताना आवश्यक है कि किस प्रकार संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचला गया था। उनके अनुसार वर्तमान सरकार ने उस दौर की घटनाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है ताकि लोकतंत्र के महत्व को समझा जा सके।कार्यक्रम में मौजूद बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी आपातकाल को लोकतांत्रिक व्यवस्था पर काला धब्बा बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखना हर सरकार और नागरिक की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में विकास और सुशासन के साथ लोकतांत्रिक मूल्यों को भी सशक्त करने का काम किया जा रहा है।अपने संबोधन के दौरान सम्राट चौधरी ने हाल में चर्चा में रहे भोजपुर के भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब भी कोई गंभीर मामला सामने आता है, सरकार तत्काल उसकी समीक्षा करती है और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाती है। उन्होंने बताया कि इस मामले में सरकार ने उच्चस्तरीय जांच आयोग का गठन किया है और जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार लगातार विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है और राज्य में लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में निरंतर काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि लोकतंत्र पर कभी कोई नया काला अध्याय न जुड़ सके।इस दौरान मुख्यमंत्री ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा के बिहार दौरे का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने जानकारी दी कि पेंशन योजनाओं से वंचित रह गए लाभार्थियों को जोड़ने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा। साथ ही आगामी 25 तारीख को आयोजित कार्यक्रम में ऐसे लोगों को सम्मानित भी किया जाएगा।भाजपा नेताओं ने अपने भाषणों में आपातकाल के दौरान हुए प्रेस सेंसरशिप, राजनीतिक गिरफ्तारियों और नागरिक अधिकारों के दमन का भी उल्लेख किया। नेताओं का कहना था कि लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं चलता, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संविधान के सम्मान और जनता की भागीदारी से मजबूत होता है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले आयोजित यह कार्यक्रम केवल आपातकाल की याद तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके जरिए भाजपा ने लोकतंत्र और संविधान के मुद्दे पर अपनी राजनीतिक धार को भी मजबूत करने का प्रयास किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि पार्टी आगामी चुनावी चुनौतियों को लेकर संगठनात्मक स्तर पर सक्रिय हो चुकी है।पटना का ज्ञान भवन गुरुवार को केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम का मंच नहीं रहा, बल्कि वह लोकतंत्र, संविधान और आपातकाल की स्मृतियों पर केंद्रित एक बड़े राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन गया, जहां अतीत की घटनाओं को याद करते हुए भविष्य की राजनीति के संकेत भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिए।
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