राम मंदिर चढ़ावा विवाद में बड़ा भूचाल! चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने छोड़ा पद, SIT जांच के बीच ट्रस्ट में मची हलचल

Editorial
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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा राशि में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रही जांच के बीच शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। यह फैसला ऐसे समय आया है जब चढ़ावा राशि में कथित हेरफेर के मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच लगातार तेज होती जा रही है। सूत्रों के अनुसार, दोनों ने जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से अपने पद छोड़ने का निर्णय लिया है। हालांकि, इस संबंध में ट्रस्ट की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार है।इस्तीफे की खबर सामने आते ही अयोध्या से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने कहा कि उन्हें वर्तमान स्थिति की पूरी जानकारी नहीं है और वे आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद ही इस पर कुछ कह पाएंगे।उधर पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए एफआईआर में नामजद आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। सभी आरोपियों का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उन्हें न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी निष्पक्षता के साथ आगे बढ़ रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी।गौरतलब है कि चढ़ावा मामले का खुलासा होने के करीब 19 दिन बाद और एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट मिलने के दो दिन बाद आखिरकार एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के रिश्तेदार अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा समेत गणना प्रक्रिया से जुड़े मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र और गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव को नामजद किया गया है। इनके अलावा कुछ अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि सभी ने मिलकर साजिश के तहत चढ़ावा राशि और कीमती सामान में कथित हेरफेर किया।जांच एजेंसियों के अनुसार, एसआईटी की प्रारंभिक पड़ताल में करोड़ों रुपये की नकदी और सोना-चांदी सहित बहुमूल्य जेवरातों में कथित अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। बताया जा रहा है कि ट्रस्ट की आंतरिक कार्रवाई के दौरान कुछ आरोपियों की निशानदेही पर करीब तीन करोड़ रुपये बरामद किए गए थे। अब पुलिस की विस्तृत विवेचना से यह स्पष्ट होगा कि कथित हेरफेर की वास्तविक राशि कितनी थी और कितनी नकदी एवं आभूषण गायब हुए।जांच में सीसीटीवी फुटेज को भी अहम साक्ष्य माना जा रहा है। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में जिन लोगों की गतिविधियां संदिग्ध बताई हैं, उन्हें आरोपी बनाया गया है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू कथित रूप से पूरी व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। आरोप है कि गणना प्रक्रिया में ड्यूटी लगाने और व्यवस्थाओं पर इनका विशेष नियंत्रण था। पुलिस अब डिजिटल साक्ष्यों, बैंक लेन-देन और बरामद सामग्री के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

इस बीच मामला केवल चढ़ावा राशि तक सीमित नहीं रहा। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एसआईटी को 11 दस्तावेज सौंपते हुए आरोप लगाया है कि राम मंदिर के लिए जमीन खरीद में भी बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुईं। उन्होंने दावा किया कि कई जमीनें बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदी गईं, जिससे ट्रस्ट को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। संजय सिंह ने एसआईटी अध्यक्ष विजय विश्वास पंत और सदस्य नील रतन से मुलाकात कर इन सौदों की गहन जांच की मांग की।संजय सिंह ने आरोप लगाया कि एक जमीन, जिसकी कीमत लगभग दो करोड़ रुपये बताई गई थी, उसे वर्ष 2021 में करीब 18.5 करोड़ रुपये में ट्रस्ट को बेचा गया। इसी तरह एक अन्य जमीन, जिसे पहले 20 लाख रुपये में खरीदा गया था, कुछ ही महीनों बाद ट्रस्ट को 2.5 करोड़ रुपये में बेचे जाने का आरोप लगाया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ अन्य भूमि सौदों में भी बाजार मूल्य और खरीद मूल्य के बीच भारी अंतर है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और इनकी जांच जारी है।सांसद ने कुछ नजूल भूमि के सौदों पर भी सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जमीनों को अत्यधिक कीमत पर खरीदा गया। उन्होंने संबंधित दस्तावेज एसआईटी को सौंपते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।उधर पुलिस और एसआईटी का कहना है कि जांच अभी जारी है और सभी तथ्यों की गहन पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति की भूमिका साक्ष्यों के आधार पर तय की जाएगी। यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो आगे और लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।राम मंदिर से जुड़े इस पूरे घटनाक्रम ने देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है। जहां एक ओर जांच एजेंसियां चढ़ावा राशि और जमीन खरीद से जुड़े सभी पहलुओं की जांच में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर विभिन्न राजनीतिक दल निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। अब सभी की नजर एसआईटी की विस्तृत रिपोर्ट और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी है, जिससे पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके।

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