वाराणसी सावन 2026 की शुरुआत से पहले भगवान शिव की नगरी काशी पूरी तरह शिवमय होती नजर आ रही है। बाबा विश्वनाथ की नगरी में श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मंदिरों की सजावट, सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के साथ-साथ इस बार रुद्राक्ष का बाजार भी पूरी तरह गुलजार हो चुका है। नेपाल और इंडोनेशिया से करीब दो करोड़ रुद्राक्ष वाराणसी पहुंच चुके हैं, जबकि बाजार में कुल मिलाकर लगभग तीन करोड़ रुद्राक्ष उपलब्ध हैं।व्यापारियों का अनुमान है कि इस वर्ष सावन के 30 दिनों में केवल रुद्राक्ष और उससे बने उत्पादों का कारोबार 30 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच सकता है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह कारोबार स्थानीय व्यापारियों के लिए भी बड़ी आर्थिक गतिविधि साबित होने वाला है।
सावन से पहले ही बढ़ी खरीदारी
गोदौलिया, विश्वनाथ गली, चौक, दशाश्वमेध, मैदागिन और चौखंभा जैसे प्रमुख बाजारों में रुद्राक्ष की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ दिखाई देने लगी है। सावन शुरू होने से पहले ही व्यापारी बड़ी मात्रा में स्टॉक मंगा चुके हैं।व्यापारियों का कहना है कि इस बार देशभर से आने वाले शिवभक्तों की संख्या अधिक रहने की संभावना है। इसी कारण महीनों पहले से नेपाल और इंडोनेशिया के डीलरों से रुद्राक्ष की खरीदारी शुरू कर दी गई थी।

नेपाल और इंडोनेशिया के रुद्राक्ष में क्या है अंतर?
नेपाल से आने वाले रुद्राक्ष बड़े आकार, गहरी धारियों और धार्मिक महत्व के कारण अधिक महंगे माने जाते हैं। एक मुखी से लेकर चौदह मुखी तक के नेपाली रुद्राक्ष की मांग सबसे अधिक रहती है।वहीं इंडोनेशिया (जावा) से आने वाले रुद्राक्ष आकार में छोटे और चिकने होते हैं। इनका उपयोग मुख्य रूप से कंठी माला, कंगन और पूजा सामग्री तैयार करने में किया जाता है। किफायती होने के कारण इनकी बिक्री भी बड़ी संख्या में होती है।

100 रुपये से लेकर लाखों तक की कीमत
इस बार बाजार में 100 रुपये से लेकर एक लाख रुपये और उससे अधिक कीमत वाले रुद्राक्ष उपलब्ध हैं। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और बजट के अनुसार रुद्राक्ष खरीद रहे हैं।व्यापारियों के अनुसार पांच मुखी रुद्राक्ष सबसे अधिक बिकने वाला उत्पाद है, जबकि एक मुखी और दुर्लभ मुखी रुद्राक्ष विशेष मांग में रहते हैं।
बाबा विश्वनाथ और कालभैरव मंदिर में होगा विशेष श्रृंगार
सावन के दौरान काशी विश्वनाथ मंदिर, कालभैरव मंदिर, महामृत्युंजय मंदिर, केदारेश्वर महादेव और अन्य प्रमुख शिवालयों में रुद्राक्ष से विशेष सजावट की जाएगी।कई धार्मिक समितियां पहले ही सवा लाख से लेकर 11 लाख रुद्राक्ष की मालाएं अर्पित करने की बुकिंग करा चुकी हैं। कालभैरव मंदिर में सावन के प्रत्येक सोमवार को गर्भगृह और मंदिर परिसर को रुद्राक्ष से सजाया जाएगा।
स्थानीय व्यापारियों को मिलेगा बड़ा लाभ
व्यापारियों का मानना है कि रुद्राक्ष के साथ-साथ पूजा सामग्री, माला, कंगन, शिवलिंग, बेलपत्र, वस्त्र और अन्य धार्मिक उत्पादों की बिक्री भी इस बार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती है।सावन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि वाराणसी की अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन से होटल, परिवहन, मिठाई, फूल और हस्तशिल्प कारोबार को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
श्रद्धालुओं के लिए सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि रुद्राक्ष खरीदते समय प्रमाणित विक्रेता से ही खरीदारी करें। अत्यधिक सस्ते दामों पर मिलने वाले रुद्राक्ष की गुणवत्ता की जांच अवश्य करें। यदि धार्मिक या ज्योतिषीय उद्देश्य से विशेष मुखी रुद्राक्ष खरीदा जा रहा है, तो उसकी प्रमाणिकता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
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