लखनऊ विश्वविद्यालय (LU) में छात्रों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। फीस वृद्धि, छात्रों के निष्कासन और छात्रसंघ चुनाव बहाली समेत कई मांगों को लेकर छात्र पिछले 37 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। बुधवार को भी आंदोलन जारी रहा और खराब मौसम व बारिश के बावजूद छात्रों का हौसला नहीं डिगा। भीगते हुए भी छात्र हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर अपनी मांगों को बुलंद करते रहे।धरने को उस समय और मजबूती मिली जब समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज मौके पर पहुंचे और छात्रों के आंदोलन का खुलकर समर्थन किया। सांसद ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं और मांगों को संसद में मजबूती से उठाया जाएगा।

37 दिन से जारी है आंदोलन, छात्र बोले— ‘अब आर-पार की लड़ाई’
लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में चल रहा यह धरना अब सिर्फ फीस वृद्धि का विरोध नहीं रह गया है, बल्कि इसे छात्र अपने अधिकारों की लड़ाई बता रहे हैं। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।धरने पर बैठे छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार छात्र हितों की अनदेखी कर रहा है और विरोध करने वाले छात्रों पर निष्कासन जैसी कार्रवाई की जा रही है।
छात्रों की प्रमुख मांगें
धरने पर बैठे छात्रों ने प्रशासन के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं—
- विश्वविद्यालय में बढ़ाई गई फीस तत्काल वापस ली जाए।
- निष्कासित छात्रों का निष्कासन तुरंत रद्द किया जाए।
- छात्रसंघ चुनाव शीघ्र बहाल किए जाएं।
- विश्वविद्यालय परिषद में पुलिस की स्थायी तैनाती समाप्त की जाए।
- विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन, वॉल पेंटिंग और धरना स्थल के लिए स्थायी स्थान निर्धारित किया जाए।
छात्रों का कहना है कि ये मांगें किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक माहौल बनाए रखने के लिए हैं।
बारिश भी नहीं तोड़ सकी छात्रों का हौसला
धरने के दौरान अचानक तेज बारिश शुरू हो गई, लेकिन छात्रों ने आंदोलन समाप्त नहीं किया। कई छात्र भीगते हुए धरना स्थल पर डटे रहे और लगातार नारेबाजी करते रहे।बारिश के बीच पोस्टर और बैनर हाथों में लिए बैठे छात्रों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही हैं। कई लोगों ने इसे छात्रों के दृढ़ संकल्प का प्रतीक बताया।
धरने में पहुंचे सांसद पुष्पेंद्र सरोज, दिया बड़ा आश्वासन
धरना स्थल पर पहुंचे समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने छात्रों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं।उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए और लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखना हर छात्र का अधिकार है। सांसद ने भरोसा दिलाया कि वे छात्रों की मांगों को संसद में उठाएंगे और सरकार तथा संबंधित अधिकारियों तक उनकी बात पहुंचाएंगे।उनके पहुंचने के बाद आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिलने की चर्चा भी तेज हो गई।
फीस वृद्धि को लेकर छात्रों में नाराजगी
छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी का सीधा असर आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है। उनका आरोप है कि शिक्षा का अधिकार महंगा होता जा रहा है और कई छात्रों के लिए पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो सकता है।छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों से संवाद कर समाधान निकालना चाहिए, न कि विरोध करने वालों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
निष्कासन के विरोध में भी बुलंद हुई आवाज
धरने का एक बड़ा मुद्दा निष्कासित छात्रों की वापसी भी है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि निष्कासन जैसी कार्रवाई से विश्वविद्यालय में भय का माहौल बन रहा है।वे मांग कर रहे हैं कि निष्कासन वापस लेकर सभी छात्रों को पढ़ाई जारी रखने का अवसर दिया जाए।37 दिनों से लगातार चल रहे इस आंदोलन ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर छात्र अपनी मांगों पर अड़े हैं, वहीं दूसरी ओर अब तक कोई ऐसा समाधान सामने नहीं आया है जिससे गतिरोध समाप्त हो सके।यदि जल्द बातचीत का रास्ता नहीं निकला, तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों का आंदोलन अब लंबा और महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुका है। 37 दिनों से जारी अनिश्चितकालीन धरना, बारिश में भी छात्रों का डटे रहना और सांसद पुष्पेंद्र सरोज का समर्थन इस आंदोलन को नई चर्चा दे रहा है। अब निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या छात्रों की मांगों पर संवाद होगा या आंदोलन और तेज होगा।
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