रायबरेली उत्तर प्रदेश के रायबरेली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने एक बार फिर आधुनिक चिकित्सा तकनीक और विशेषज्ञ डॉक्टरों की दक्षता का शानदार उदाहरण पेश किया है। एम्स रायबरेली के जनरल सर्जरी विभाग ने एक बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण मामले में बिना किसी ऑपरेशन के सिर्फ एंडोस्कोपी के माध्यम से 53 वर्षीय मरीज के पेट में फंसी लगभग 3 सेंटीमीटर लंबी आम की गुठली सफलतापूर्वक निकालकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस सफल उपचार के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और उसकी हालत में तेजी से सुधार हुआ है।यह मामला इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि सामान्य तौर पर पेट में इस तरह का बड़ा विदेशी पदार्थ (Foreign Body) फंस जाने पर कई बार सर्जरी की आवश्यकता पड़ जाती है। लेकिन एम्स रायबरेली की विशेषज्ञ टीम ने आधुनिक एंडोस्कोपिक तकनीक का उपयोग करते हुए बिना किसी चीरे, बिना ऑपरेशन और बिना जटिल सर्जरी के इस चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया।
लगातार उल्टी और पेट में बेचैनी के बाद अस्पताल पहुंचा मरीज
जानकारी के अनुसार, 53 वर्षीय मरीज पिछले कुछ समय से लगातार उल्टी, पेट में भारीपन और असहजता महसूस कर रहा था। परेशानी बढ़ने पर वह इलाज के लिए एम्स रायबरेली पहुंचा। डॉक्टरों ने मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री लेने के बाद प्रारंभिक जांच शुरू की।सबसे पहले मरीज का एक्स-रे कराया गया, लेकिन उसमें आम की गुठली स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दी। इसके बाद डॉक्टरों को आशंका हुई कि मरीज के ऊपरी पाचन तंत्र में कोई विदेशी वस्तु फंसी हो सकती है। स्थिति को गंभीरता से देखते हुए विशेषज्ञों ने अपर जीआई एंडोस्कोपी (Upper GI Endoscopy) कराने का फैसला किया।

एंडोस्कोपी में सामने आया चौंकाने वाला दृश्य
जब डॉक्टरों ने एंडोस्कोपी के जरिए मरीज के पेट की जांच की तो उन्हें एक बड़ा विदेशी पदार्थ दिखाई दिया। जांच में पता चला कि मरीज के पेट में लगभग 3 सेंटीमीटर लंबी आम की गुठली फंसी हुई थी, जिसकी वजह से उसे लगातार उल्टी और पेट में तकलीफ हो रही थी।इतनी बड़ी गुठली पेट में फंसी रहने से आगे चलकर आंतों में रुकावट, संक्रमण, रक्तस्राव या अन्य गंभीर जटिलताएं भी पैदा हो सकती थीं। ऐसे में चिकित्सकों ने तत्काल उसे निकालने का निर्णय लिया।
बिना ऑपरेशन के निकाली गई गुठली
एम्स रायबरेली के जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. अमृतांशु सौरभ और उनकी विशेषज्ञ टीम ने अत्याधुनिक एंडोस्कोपिक उपकरणों की मदद से बेहद सावधानीपूर्वक यह प्रक्रिया पूरी की। डॉक्टरों ने एंडोस्कोप के माध्यम से विशेष उपकरणों का उपयोग करते हुए पेट में फंसी आम की गुठली को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाल लिया।पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज को किसी प्रकार का बड़ा ऑपरेशन नहीं करना पड़ा और न ही शरीर पर कोई चीरा लगाया गया। यही इस उपचार की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है।
प्रक्रिया के बाद तेजी से स्वस्थ हुआ मरीज
सफल एंडोस्कोपी के बाद मरीज की हालत में तुरंत सुधार देखने को मिला। उल्टी की शिकायत बंद हो गई और पेट की असहजता भी खत्म हो गई। डॉक्टरों की निगरानी में कुछ समय रखने के बाद मरीज को पूरी तरह स्वस्थ घोषित कर दिया गया।चिकित्सकों का कहना है कि यदि समय रहते मरीज अस्पताल नहीं पहुंचता या गुठली लंबे समय तक पेट में फंसी रहती, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी और बड़े ऑपरेशन की नौबत भी आ सकती थी।
कार्यकारी निदेशक ने टीम को दी बधाई
इस उल्लेखनीय सफलता पर एम्स रायबरेली की कार्यकारी निदेशक डॉ. अमिता जैन ने जनरल सर्जरी विभाग की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि संस्थान में उपलब्ध आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, अत्याधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की दक्षता का प्रमाण है।उन्होंने कहा कि एम्स रायबरेली मरीजों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार नई तकनीकों और आधुनिक उपचार पद्धतियों का उपयोग कर रहा है। इस तरह की सफलताएं संस्थान की चिकित्सा गुणवत्ता और मरीजों के प्रति समर्पण को दर्शाती हैं।
क्या होती है अपर जीआई एंडोस्कोपी?
अपर जीआई एंडोस्कोपी एक आधुनिक चिकित्सीय प्रक्रिया है, जिसमें एक पतली और लचीली ट्यूब के सिरे पर कैमरा लगाकर मुंह के रास्ते भोजन नली, पेट और छोटी आंत के शुरुआती हिस्से की जांच की जाती है। इसी उपकरण के जरिए कई बार फंसी हुई वस्तुओं को बिना ऑपरेशन के बाहर भी निकाला जा सकता है।यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत सुरक्षित होती है और इसमें मरीज को जल्दी आराम मिल जाता है। ऑपरेशन की तुलना में इसमें संक्रमण का खतरा कम होता है, अस्पताल में कम समय रुकना पड़ता है और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकता है।
विशेषज्ञों ने लोगों को दी सलाह
डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि भोजन करते समय विशेष सावधानी बरतें। आम, लीची, जामुन या अन्य फलों की गुठलियों को गलती से निगलने से गंभीर समस्या हो सकती है। यदि किसी व्यक्ति को कोई विदेशी वस्तु निगलने के बाद लगातार उल्टी, पेट दर्द, निगलने में परेशानी या सांस लेने में दिक्कत जैसी शिकायत हो तो घरेलू उपचार करने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
आधुनिक चिकित्सा तकनीक का शानदार उदाहरण
एम्स रायबरेली की यह सफलता साबित करती है कि आधुनिक एंडोस्कोपिक तकनीकों की मदद से कई जटिल मामलों का इलाज अब बिना बड़े ऑपरेशन के भी संभव हो गया है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की समय पर पहचान, सटीक निर्णय और अत्याधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि सही इलाज मिलने पर जटिल से जटिल समस्या का भी सुरक्षित समाधान किया जा सकता है।रायबरेली एम्स की यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए गर्व का विषय है, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी एक बड़ी मिसाल बनकर सामने आई है। मरीजों को बेहतर, सुरक्षित और आधुनिक चिकित्सा उपलब्ध कराने की दिशा में यह सफलता निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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