लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से पुलिस महकमे को कटघरे में खड़ा करने वाला एक कथित ऑडियो-वीडियो सामने आया है, जिसने कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे इस कथित वीडियो में एक दरोगा, एक पीड़ित और एक कथित दलाल के बीच बातचीत सुनाई दे रही है। बातचीत में कथित तौर पर एक मामले को दबाने और कार्रवाई में राहत देने के बदले डेढ़ लाख रुपये की मांग किए जाने का दावा किया जा रहा है।वीडियो के वायरल होते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित दरोगा गुड्डू प्रसाद को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं पूरे प्रकरण की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
‘छांव में चलिए… आराम से बात करते हैं’ से शुरू हुई कथित डील
वायरल वीडियो में कथित दलाल पहले दरोगा को कुर्सी से उठाकर एक किनारे ले जाता है और कहता है, “इधर आ जाइए… यहां सब बैठे हैं… आराम से छांव में बात करते हैं।” इसके बाद वह पीड़ित पक्ष का परिचय कराते हुए दरोगा से पुराने संबंधों का हवाला देता है और माहौल बनाने की कोशिश करता है।वीडियो में कथित दलाल बार-बार यह जताता नजर आता है कि दरोगा उसके बेहद करीबी हैं और वर्षों पुराने संबंध हैं। इसी दौरान पीड़ित से जुड़े मामले पर बातचीत शुरू होती है।
‘मैं चाहता तो उनको भी टांग लाता…’
कथित बातचीत में दरोगा कहते सुनाई देते हैं कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ चाहें तो और सख्त कार्रवाई कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसके बाद दलाल उनकी तारीफ करते हुए कहता है, “ये तो आपकी इंसानियत है।”इस पर दरोगा जवाब देते हैं, “इंसानियत नहीं है… इस लेवल तक नहीं गिर सकता मैं।”बातचीत आगे बढ़ती है और कथित तौर पर गुमशुदगी के मामले में बयान दर्ज कराने और जांच को सीमित रखने की बात होती है।

‘मैं घर आकर बयान ले लूंगा… आगे तलाश नहीं करूंगा’
वीडियो में दरोगा कथित तौर पर कहते हैं कि वह पीड़ित के घर जाकर बयान दर्ज कर लेंगे और रिकॉर्ड में वही दर्ज रहेगा कि संबंधित व्यक्ति अब तक नहीं मिला। साथ ही यह भी कहते सुनाई देते हैं कि वह आगे उसकी तलाश की कोशिश नहीं करेंगे।यह कथित बातचीत पुलिस जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती है, क्योंकि इसमें जांच की दिशा को प्रभावित करने की बात कही जा रही है।
‘क्या देना होगा?’… जवाब मिला- ‘डेढ़ लाख’
वीडियो का सबसे चर्चित हिस्सा तब सामने आता है, जब कथित दलाल सीधे पूछता है, “क्या देना होगा?”इस पर दरोगा कथित तौर पर जवाब देते हैं, “जो बताया था वही होगा… डेढ़ लाख।”दलाल फिर कहता है कि सामने वाले उनके दोस्त हैं और कुछ रियायत की जाए। लेकिन दरोगा कथित रूप से अंग्रेजी में दोहराते हैं, “वन फिफ्टी… वन फिफ्टी… डेढ़ लाख… इससे कम नहीं होगा।”यही हिस्सा सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा वायरल हो रहा है और लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
‘यहां हम दरोगा नहीं… छोटे भाई हैं’
बातचीत के अंत में कथित तौर पर दरोगा कहते हैं, “यहां हम दरोगा नहीं हैं… ये हमारे छोटे भाई हैं।”इसके बाद कथित दलाल आगे की रणनीति पूछता है, जिस पर दो दिन के भीतर बयान दर्ज कराने और मामला वहीं खत्म करने की बात कही जाती है। कथित तौर पर कहा जाता है कि “ये बात यहीं पर दब जानी चाहिए।”
जिस पर था भरोसा, उसी ने बना लिया वीडियो
इस पूरे प्रकरण का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि जिस कथित दलाल को दरोगा अपना करीबी और “छोटा भाई” बताते नजर आ रहे हैं, उसी पर वीडियो रिकॉर्ड करने और बाद में उसे वायरल करने का आरोप लगाया जा रहा है।बताया जा रहा है कि पूरी बातचीत की रिकॉर्डिंग गुप्त रूप से की गई और बाद में सोशल मीडिया पर वायरल कर दी गई। वीडियो सामने आते ही मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया और पुलिस विभाग को तत्काल कार्रवाई करनी पड़ी।
दरोगा सस्पेंड, विभागीय जांच शुरू
वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस प्रशासन ने संबंधित दरोगा गुड्डू प्रसाद को निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि वायरल वीडियो और ऑडियो वास्तविक हैं या नहीं, बातचीत किस संदर्भ में हुई और क्या वास्तव में रिश्वत की मांग की गई थी।यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

सोशल मीडिया पर उठे सवाल
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई लोग पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि वीडियो सामने नहीं आता, तो क्या यह कथित लेन-देन कभी उजागर हो पाता?
पुलिस की छवि पर बड़ा सवाल
यह मामला सिर्फ एक कथित रिश्वत मांगने तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस की कार्यशैली, जांच प्रक्रिया और विभाग की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है। कानून का पालन कराने वाली एजेंसी पर यदि ऐसे आरोप लगते हैं, तो आम जनता का भरोसा प्रभावित होना स्वाभाविक है।हालांकि यह भी महत्वपूर्ण है कि वायरल ऑडियो-वीडियो की सत्यता की पुष्टि सक्षम जांच एजेंसी द्वारा की जाए। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए।
फिलहाल क्या है स्थिति?
फिलहाल संबंधित दरोगा को निलंबित कर दिया गया है और विभागीय जांच जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, वायरल वीडियो ने राजधानी लखनऊ में पुलिस व्यवस्था और कथित दलालों की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला पुलिस विभाग में जवाबदेही और भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का आधार बन सकता है।
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