सिद्धार्थनगर जहां आए दिन पारिवारिक विवाद, घरेलू कलह और रिश्तों में बढ़ती दूरियों की खबरें सुर्खियां बनती हैं, वहीं सिद्धार्थनगर पुलिस ने संवेदनशील पुलिसिंग की ऐसी मिसाल पेश की है जिसने 11 बिखरते परिवारों में फिर से खुशियों की रोशनी भर दी। महिला थाना परिसर में स्थापित मिशन शक्ति केंद्र ने रविवार को एक साथ 11 दंपतियों के बीच चल रहे मनमुटाव को खत्म कर उन्हें फिर से एकजुट कर दिया। काउंसलिंग के बाद सभी दंपति आपसी सहमति से साथ रहने को तैयार हुए और खुशी-खुशी अपने घरों के लिए विदा हुए। इस भावुक पल का गवाह महिला थाना परिसर बना, जहां कई परिवारों की आंखों में खुशी के आंसू भी छलक उठे।यह पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन के कुशल नेतृत्व, अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद के निर्देशन तथा क्षेत्राधिकारी विश्वजीत सौरयान के पर्यवेक्षण में संपन्न हुई। महिला थाना प्रभारी निरीक्षक भाग्यवती पाण्डेय और उनकी काउंसलिंग टीम ने धैर्य, संवेदनशीलता और समझदारी के साथ दोनों पक्षों की बात सुनी और उन्हें रिश्तों की अहमियत समझाई। इसका परिणाम यह रहा कि तलाक और अलगाव की कगार पर पहुंचे 11 परिवार एक बार फिर साथ रहने के लिए राजी हो गए।महिला थाना प्रभारी निरीक्षक भाग्यवती पाण्डेय ने बताया कि मिशन शक्ति केंद्र का उद्देश्य केवल कानूनी कार्रवाई करना नहीं, बल्कि जहां संभव हो वहां परिवारों को टूटने से बचाना भी है। कई मामलों में छोटी-छोटी गलतफहमियां, संवादहीनता और पारिवारिक तनाव रिश्तों में बड़ी दरार पैदा कर देते हैं। यदि समय रहते दोनों पक्षों को बैठाकर बातचीत कराई जाए तो अधिकांश विवाद सुलझ सकते हैं। इसी सोच के साथ मिशन शक्ति केंद्र लगातार पारिवारिक विवादों की काउंसलिंग कर रहा है।

रविवार को जिन 11 परिवारों के बीच सुलह कराई गई, उनमें विभिन्न थाना क्षेत्रों के दंपति शामिल थे। इनमें शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर, बांसी, खेसराहा, चिल्हिया, जोगिया और कपिलवस्तु थाना क्षेत्रों के परिवार शामिल रहे। सभी मामलों में दोनों पक्षों को अलग-अलग और संयुक्त रूप से समझाया गया। रिश्तों में आई दूरियों के कारणों पर विस्तार से चर्चा की गई और भविष्य में आपसी सम्मान, विश्वास तथा संवाद बनाए रखने की सलाह दी गई। इसके बाद सभी दंपतियों ने एक-दूसरे के साथ रहने की सहमति व्यक्त की।महिला थाना की इस पहल में काउंसलिंग टीम की भूमिका भी बेहद अहम रही। महिला हेड कांस्टेबल रीना रावत, महिला आरक्षी संगीता गौतम, महिला आरक्षी शिखा खरवार, महिला आरक्षी प्रगति राय तथा महिला आरक्षी शिवानी सिंह ने पूरे धैर्य और संवेदनशीलता के साथ सभी मामलों की काउंसलिंग की। टीम ने न केवल दोनों पक्षों की समस्याओं को सुना बल्कि उन्हें कानून, परिवार और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूक किया। इसी सकारात्मक प्रयास का परिणाम रहा कि 11 परिवार बिखरने से बच गए।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मिशन शक्ति अभियान के तहत महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के साथ-साथ पारिवारिक विवादों का शांतिपूर्ण समाधान भी प्राथमिकता में शामिल है। जब किसी परिवार में आपसी सहमति और विश्वास दोबारा स्थापित हो जाता है तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है। बच्चों का भविष्य सुरक्षित होता है और परिवार में फिर से खुशहाली लौट आती है।
महिला थाना सिद्धार्थनगर की इस पहल की स्थानीय लोगों ने भी सराहना की है। लोगों का कहना है कि पुलिस की यह संवेदनशील कार्यशैली समाज के लिए प्रेरणादायक है। जहां एक ओर कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी ओर मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर टूटते रिश्तों को बचाने का यह प्रयास समाज में सकारात्मक संदेश देता है।महिला थाना परिसर से विदा होते समय कई दंपतियों के चेहरे पर संतोष और नई शुरुआत की उम्मीद साफ दिखाई दे रही थी। परिवार के सदस्य भी इस बात से खुश नजर आए कि वर्षों के रिश्ते टूटने से बच गए। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि संवाद, समझ और संवेदनशील काउंसलिंग से कई ऐसे विवाद समाप्त किए जा सकते हैं जो अदालतों तक पहुंचने की नौबत पैदा कर देते हैं।सिद्धार्थनगर पुलिस का यह प्रयास एक बार फिर यह संदेश देता है कि ‘मिशन शक्ति’ केवल महिलाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवारों को जोड़ने, रिश्तों को संवारने और समाज में विश्वास कायम करने का भी प्रभावी अभियान बन चुका है। एक ही दिन में 11 परिवारों को नया जीवन देकर महिला थाना ने यह साबित कर दिया कि संवेदनशील पुलिसिंग केवल कानून लागू करने का नाम नहीं, बल्कि टूटते रिश्तों में उम्मीद की नई डोर बांधने का भी माध्यम है।

