सिद्धार्थनगर उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले की खेसरहा थाना पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये की ऑनलाइन ठगी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने महज 20 वर्षीय युवक नसीम अहमद को गिरफ्तार किया है, जिसके बैंक खातों का इस्तेमाल 15 करोड़ 47 लाख 63 हजार 520 रुपये से अधिक की साइबर ठगी में किया गया। आरोपी के कब्जे से ठगी की रकम से खरीदे गए आईफोन, वीवो मोबाइल, एचपी लैपटॉप, एटीएम कार्ड, पासबुक और 20 हजार रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं।यह कार्रवाई प्रदेश के पुलिस महानिदेशक द्वारा चलाए जा रहे ‘Cy-Vajra’ अभियान के तहत की गई, जिसे सिद्धार्थनगर पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

NCRP पोर्टल पर खुली ठगी की परतें
पूरे मामले का खुलासा उस समय हुआ जब थाना खेसरहा की साइबर सेल टीम NCRP (नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल) और समन्वय पोर्टल पर संदिग्ध बैंक खातों की जांच कर रही थी। जांच में सामने आया कि वर्ष 2024-25 के दौरान आरोपी के खातों के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों से कुल 9 साइबर फ्रॉड शिकायतें दर्ज थीं।पुलिस ने जब बैंक खातों का गहराई से विश्लेषण किया तो पता चला कि एक म्यूल (Mule) बैंक खाते के जरिए 15.47 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध ऑनलाइन ट्रांजैक्शन हुई थीं। हालांकि इस खाते में सीधे 24,230.66 रुपये आए, जिनका आरोपी ने निजी खर्चों में इस्तेमाल किया।इसके बाद पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर तकनीकी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

ऑनलाइन गेम बना साइबर ठगी का हथियार
पूछताछ में आरोपी नसीम अहमद ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि वह ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर साइबर फ्रॉड की रकम अपने बैंक खातों में मंगवाता था। इसके बाद उसी पैसे को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर ठगी की रकम को छिपाने और आगे भेजने का काम करता था।पुलिस के मुताबिक आरोपी ने अपने नाम से अलग-अलग बैंकों में छह बैंक खाते खुलवा रखे थे, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधियों के लिए ‘म्यूल अकाउंट’ के रूप में किया जा रहा था।
इन बैंकों में खुलवा रखे थे खाते
जांच में सामने आया कि आरोपी के नाम पर—
- यूनियन बैंक
- पंजाब नेशनल बैंक
- एक्सिस बैंक
- भारतीय स्टेट बैंक
- अर्बन कोऑपरेटिव बैंक
- इंडियन पोस्ट पेमेंट्स बैंक
में खाते संचालित थे।इन खातों के जरिए विभिन्न राज्यों से साइबर ठगी की रकम का लेन-देन किया जा रहा था।

7 करोड़ से ज्यादा की दूसरी ठगी का भी खुलासा
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के अन्य बैंक खातों के खिलाफ 8 अतिरिक्त NCRP शिकायतें दर्ज थीं, जिनमें कुल 7 करोड़ 8 लाख 28 हजार 78 रुपये की साइबर ठगी दर्ज हुई थी।इन खातों में करीब 36,916 रुपये की राशि सीधे आरोपी के खातों में आई, जिसे उसने खर्च कर दिया।पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या किसी बड़े अंतरराज्यीय साइबर गैंग का हिस्सा था।
क्या-क्या हुआ बरामद?
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से कई अहम सामान बरामद किए हैं, जिनमें शामिल हैं—
- 1 आईफोन
- 1 वीवो मोबाइल
- 1 एचपी लैपटॉप
- लैपटॉप चार्जर
- माउस
- चार बैंक पासबुक
- छह बैंक कार्ड और एटीएम
- ₹20,000 नकद, जिसे साइबर ठगी की रकम बताया जा रहा है।
इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि साइबर नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सके।
‘Cy-Vajra’ अभियान के तहत मिली बड़ी सफलता
यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद, क्षेत्राधिकारी बांसी शुभेंदु सिंह तथा थाना प्रभारी अनूप कुमार मिश्र के नेतृत्व में साइबर सेल टीम ने की।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल ट्रेल और बैंकिंग रिकॉर्ड की मदद से इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किया गया।
म्यूल अकाउंट क्या होता है?
साइबर अपराधी अक्सर ऐसे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं जिनके जरिए ठगी की रकम इधर-उधर भेजी जाती है। ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। कई बार लोग लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी दूसरों को दे देते हैं और बाद में वही खाते करोड़ों की ठगी का जरिया बन जाते हैं।पुलिस का कहना है कि ऐसे खातों का इस्तेमाल करना या उपलब्ध कराना भी गंभीर अपराध है।
पुलिस ने जनता से की खास अपील
सिद्धार्थनगर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि—
- किसी भी लालच में अपना बैंक खाता किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल न करने दें।
- एटीएम कार्ड, चेकबुक, ओटीपी और बैंकिंग विवरण किसी के साथ साझा न करें।
- संदिग्ध ऑनलाइन लेन-देन की सूचना तुरंत 1930 हेल्पलाइन या NCRP पोर्टल पर दें।
- साइबर ठगी से जुड़े किसी भी ऑफर, गेमिंग लिंक या फर्जी निवेश योजना से सतर्क रहें।
जांच अभी जारी, बड़े गिरोह तक पहुंचने की कोशिश
पुलिस का मानना है कि यह मामला केवल एक युवक तक सीमित नहीं हो सकता। बरामद मोबाइल, लैपटॉप और बैंक रिकॉर्ड से कई अन्य लोगों के नाम सामने आने की संभावना है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच के बाद पुलिस इस साइबर नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुट गई है।सिद्धार्थनगर पुलिस की यह कार्रवाई बताती है कि साइबर अपराधी अब ऑनलाइन गेमिंग, म्यूल अकाउंट और डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दे रहे हैं। पुलिस ने समय रहते बड़ी कार्रवाई कर एक अहम कड़ी को गिरफ्तार किया है, लेकिन यह मामला यह भी चेतावनी देता है कि थोड़े से लालच में अपना बैंक खाता या दस्तावेज किसी को देना आपको भी कानून के शिकंजे में ला सकता है।
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