गाजियाबाद की मासूम से दरिंदगी: चीखी तो पाइप से कुचला सिर, फिर बेसमेंट में फेंक दिया शव!

Editorial
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गाजियाबाद उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से इंसानियत को झकझोर देने वाली वारदात में हर दिन नए और रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे हो रहे हैं। सात वर्षीय मासूम बच्ची के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले में पुलिस जांच ने उस रात की भयावह कहानी सामने रख दी है। जांच के मुताबिक, बच्ची जब दरिंदगी के दौरान चीखने लगी तो आरोपी विनय ने पास पड़ा लोहे का पाइप उठाकर उसके सिर पर जोरदार वार किया। गंभीर चोट लगते ही बच्ची अचेत हो गई। इसके बाद आरोपी विनय और उसके साथी शहाबुद्दीन ने मासूम को निर्माणाधीन मॉल के लिफ्ट शाफ्ट से नीचे बेसमेंट में फेंक दिया, ताकि वारदात का कोई सुराग न मिल सके।पुलिस का कहना है कि आरोपियों को पहले से पता था कि बेसमेंट में पानी भरा हुआ है। उन्हें उम्मीद थी कि शव पानी में डूब जाएगा और घटना का खुलासा देर से होगा। लेकिन उनकी यह साजिश ज्यादा देर तक नहीं चल सकी और कुछ ही घंटों में पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

चीख बनी मौत की वजह

पुलिस जांच के अनुसार, वारदात के दौरान मासूम ने विरोध किया और जोर-जोर से चीखने लगी। इसी दौरान आरोपी विनय घबरा गया और पास रखा लोहे का पाइप उठाकर उसके सिर पर वार कर दिया। इस हमले से बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई। इसके बाद दोनों आरोपियों ने उसे उठाया और निर्माणाधीन मॉल की लिफ्ट के खाली शाफ्ट में फेंक दिया।शव छह मंजिल नीचे बेसमेंट-3 में जाकर गिरा, जहां बाद में खून से लथपथ हालत में मिला।

दीवारों पर मिले खून के छींटे, संघर्ष के मिले निशान

फॉरेंसिक टीम की जांच में तीसरी मंजिल के उस कमरे में कई जगह खून के छींटे मिले हैं, जहां कथित तौर पर वारदात हुई। पुलिस का मानना है कि बच्ची ने आरोपियों का डटकर विरोध किया और खुद को बचाने की पूरी कोशिश की। कमरे के आसपास संघर्ष के कई निशान भी मिले हैं।घटनास्थल से बरामद लोहे का पाइप, बच्ची की चप्पल, टूटे बाल और अन्य जैविक साक्ष्यों को फॉरेंसिक लैब भेजा गया है। दोनों आरोपियों के डीएनए सैंपल भी जांच के लिए सुरक्षित किए गए हैं।

आधार कार्ड दिखाकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश

गिरफ्तारी के बाद आरोपी विनय ने पुलिस को गुमराह करने की भी कोशिश की। उसने अपना आधार कार्ड दिखाया, जिसमें जन्म वर्ष 2008 दर्ज था। इसी आधार पर शुरुआती तौर पर उसे नाबालिग माना गया और मेडिकल परीक्षण कराया गया।हालांकि मेडिकल जांच में साफ हो गया कि वह बालिग है। पुलिस के अनुसार, विनय सातवीं कक्षा तक पढ़ा है। मेडिकल रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट हुआ कि वारदात के समय आरोपी नशे में नहीं थे।

सीसीटीवी फुटेज बना सबसे बड़ा सबूत

जांच के दौरान पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में दोनों आरोपी मासूम बच्ची को अपने साथ ले जाते हुए दिखाई दिए। बच्ची के हाथ में चिप्स का पैकेट था, जबकि आरोपियों के हाथ में कोल्ड ड्रिंक और शराब दिखाई दी।इसी फुटेज के आधार पर पुलिस ने दोनों संदिग्धों की पहचान की और कुछ ही घंटों में उन्हें झुग्गी से पकड़ लिया।

वारदात के बाद झुग्गी में जाकर छिपे आरोपी

घटना को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपी अपनी-अपनी झुग्गियों में लौट गए। उधर, बच्ची के परिजन और स्थानीय मजदूर उसकी तलाश में जुटे थे। तलाश के दौरान जब लोगों को आरोपियों पर शक हुआ तो उन्हें पकड़ लिया गया।इसी बीच मौके पर पहुंचे एक सुरक्षाकर्मी ने पूरी घटना के बाद का वीडियो बना लिया, जिसमें आरोपी भीड़ से घिरे दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

निर्माणाधीन मॉल बना असामाजिक तत्वों का अड्डा?

घटना के बाद निर्माणाधीन मॉल की सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। जांच के दौरान परिसर के कई हिस्सों से बीयर की खाली केन, शराब के गिलास और अन्य सामान बरामद हुआ।मजदूरों का आरोप है कि रात में काम बंद होने के बाद असामाजिक तत्व अक्सर परिसर में शराब पीने और हुड़दंग करने आते थे। उनका कहना है कि कई बार सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी में भी यह सब होता था, लेकिन शिकायत करने पर नौकरी जाने का डर रहता था।

ऐसे हुआ पूरे मामले का खुलासा

जानकारी के अनुसार, बिहार के नालंदा जिले का एक मजदूर परिवार राजनगर एक्सटेंशन स्थित निर्माणाधीन मॉल में काम कर रहा था। शुक्रवार शाम करीब साढ़े सात बजे उनकी सात वर्षीय बेटी अचानक लापता हो गई।करीब दो घंटे तक तलाश के बाद भी बच्ची नहीं मिली तो परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद परिवार और अन्य मजदूर बच्ची की तलाश करते हुए निर्माणाधीन मॉल पहुंचे, जहां रात करीब साढ़े बारह बजे बेसमेंट-3 में सीढ़ियों के पास बच्ची का खून से लथपथ शव मिला।पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

हत्या में इस्तेमाल पाइप और कपड़े बरामद

पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त लोहे का पाइप, बच्ची के कपड़े, चप्पल और अन्य अहम साक्ष्य बरामद कर लिए हैं। सभी साक्ष्यों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।डॉग स्क्वॉड और फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल से कई महत्वपूर्ण सबूत जुटाए हैं, जिनके आधार पर चार्जशीट तैयार की जा रही है।

फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा मुकदमा

डीसीपी धवल जायसवाल ने बताया कि पुलिस ने मामले से जुड़े लगभग सभी महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटा लिए हैं। इनमें सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट, खून से सने कपड़े, लोहे का पाइप और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य शामिल हैं।पुलिस एक सप्ताह के भीतर अदालत में चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है और इस जघन्य मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने की अपील करेगी, ताकि पीड़ित परिवार को जल्द न्याय मिल सके।गाजियाबाद की यह घटना केवल एक जघन्य अपराध नहीं, बल्कि समाज और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी खड़े करती है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ा रही है। अदालत में दोष सिद्ध होने के बाद ही आरोपियों की अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी तय होगी। फिलहाल पुलिस वैज्ञानिक साक्ष्यों और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर मजबूत चार्जशीट तैयार करने में जुटी है।

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