हर साल मानसून आते ही देश में एक डर भी दस्तक देता है… डेंगू का डर। अस्पतालों में बढ़ती भीड़, प्लेटलेट्स गिरने की चिंता और परिवारों की बेचैनी अब शायद कुछ हद तक कम हो सकेगी। भारत ने डेंगू से लड़ाई में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। पहली बार देश में डेंगू से बचाव के लिए QDENGA वैक्सीन को मंजूरी मिल गई है। यह सिर्फ एक वैक्सीन नहीं, बल्कि उस बीमारी के खिलाफ बड़ा हथियार है जिसने पिछले दो दशकों में लाखों लोगों को अपनी चपेट में लिया।जापान की दिग्गज फार्मा कंपनी टाकेदा फार्मास्युटिकल्स द्वारा विकसित इस वैक्सीन को भारतीय दवा नियामक की मंजूरी मिल चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसका सही तरीके से इस्तेमाल किया गया तो भारत में डेंगू के गंभीर मामलों और मौतों में बड़ी कमी आ सकती है।
भारत में क्यों बढ़ रहा है डेंगू का खतरा?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां डेंगू सबसे तेजी से फैल रहा है। पिछले 20 वर्षों में देश में डेंगू के मामलों में करीब 11 गुना वृद्धि दर्ज की गई है।विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया में डेंगू के कुल मामलों का लगभग एक-तिहाई बोझ अकेले भारत पर है।चिंता की बात यह है कि संक्रमित लोगों में से लगभग 75 से 80 प्रतिशत लोगों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन वे एडीज मच्छर के जरिए दूसरे लोगों तक वायरस पहुंचाते रहते हैं। यही वजह है कि डेंगू तेजी से फैलता है और कई बार महामारी का रूप ले लेता है।

क्या है डेंगू और कैसे फैलता है यह जानलेवा वायरस?
डेंगू एक वायरल बीमारी है, जो एडीज एजिप्टी (Aedes aegypti) मच्छर के काटने से फैलती है।यह मच्छर साफ पानी में पनपता है और दिन के समय अधिक सक्रिय रहता है।डेंगू वायरस के चार अलग-अलग प्रकार (सीरोटाइप) होते हैं।यही वजह है कि एक बार डेंगू होने के बाद भी व्यक्ति दोबारा किसी दूसरे प्रकार के वायरस से संक्रमित हो सकता है। दूसरी बार संक्रमण होने पर बीमारी अधिक गंभीर होने का खतरा रहता है।

डेंगू के लक्षण जिन्हें कभी नजरअंदाज न करें
डेंगू के लक्षण आमतौर पर संक्रमित मच्छर के काटने के 4 से 10 दिन बाद दिखाई देते हैं।
इनमें शामिल हैं—
- तेज बुखार
- सिरदर्द
- आंखों के पीछे दर्द
- शरीर और जोड़ों में तेज दर्द
- उल्टी और मतली
- त्वचा पर लाल चकत्ते
- कमजोरी और थकान
अगर बीमारी गंभीर हो जाए तो मरीज में—
- लगातार उल्टी
- पेट में असहनीय दर्द
- मसूड़ों या नाक से खून
- सांस लेने में तकलीफ
- ठंडी और पीली त्वचा
- अत्यधिक कमजोरी
जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में तुरंत अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी है।

क्या है QDENGA? जिसने बढ़ाई करोड़ों भारतीयों की उम्मीद
QDENGA दुनिया की उन चुनिंदा वैक्सीन में शामिल है जिन्हें डेंगू वायरस के चारों प्रकारों से सुरक्षा देने के लिए विकसित किया गया है।इसमें वायरस के कमजोर रूप (Live Attenuated Virus) का इस्तेमाल किया गया है, जो बीमारी नहीं फैलाते लेकिन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं।यही वजह है कि शरीर भविष्य में असली वायरस से लड़ने के लिए पहले से तैयार हो जाता है।सबसे बड़ी बात यह है कि इस वैक्सीन को लगवाने के लिए पहले डेंगू होना जरूरी नहीं है और न ही किसी विशेष जांच की आवश्यकता होती है।
कैसे काम करती है यह नई वैक्सीन?
QDENGA वैक्सीन लगने के बाद शरीर वायरस के कमजोर रूप को पहचानता है और उसके खिलाफ एंटीबॉडी बनाना शुरू कर देता है।बाद में यदि व्यक्ति असली डेंगू वायरस के संपर्क में आता है तो यही एंटीबॉडी वायरस को तेजी से निष्क्रिय करने का प्रयास करती हैं।यानी यह वैक्सीन बीमारी होने के बाद इलाज नहीं करती, बल्कि बीमारी होने से पहले शरीर को लड़ने के लिए तैयार करती है।
कितनी डोज लगेंगी और कैसे दिया जाएगा टीका?
QDENGA का पूरा कोर्स दो डोज का है।
- पहली डोज डॉक्टर की सलाह पर दी जाएगी।
- दूसरी डोज कम से कम तीन महीने बाद लगाई जाएगी।
अगर किसी कारण से दूसरी डोज समय पर नहीं लग पाती तो पूरा कोर्स दोबारा शुरू करने की जरूरत नहीं होगी। उपलब्ध होते ही दूसरी डोज दी जा सकती है।यह वैक्सीन हाथ की त्वचा के नीचे इंजेक्शन के रूप में लगाई जाती है।

कितनी असरदार है QDENGA?
इस वैक्सीन की प्रभावशीलता को लेकर दुनिया के कई देशों में बड़े क्लीनिकल ट्रायल किए गए।करीब 20 हजार बच्चों पर किए गए अध्ययन में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए।
- डेंगू के मामलों में लगभग 80 प्रतिशत तक कमी
- अस्पताल में भर्ती होने की संभावना 90 प्रतिशत तक कम
विशेषज्ञ इसे डेंगू नियंत्रण की दिशा में बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं।
क्या इसके दुष्प्रभाव भी हैं?
हर वैक्सीन की तरह QDENGA के भी कुछ सामान्य दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
जैसे—
- इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द
- हल्की सूजन या लालपन
- सिरदर्द
- मांसपेशियों में दर्द
- कमजोरी
- हल्का बुखार
हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार ये लक्षण सामान्य होते हैं और कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाते हैं।
किन लोगों को नहीं लगानी चाहिए यह वैक्सीन?
विशेषज्ञों के मुताबिक यह वैक्सीन सभी लोगों के लिए उपयुक्त नहीं है।
इन लोगों को फिलहाल इससे बचना चाहिए—
- जिन लोगों को पहले इसकी डोज से एलर्जी हुई हो।
- कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले मरीज।
- एचआईवी संक्रमण के कारण प्रतिरक्षा क्षमता कम होने वाले लोग।
- इम्यून सिस्टम दबाने वाली दवाएं लेने वाले मरीज।
- गर्भवती महिलाएं।
- गर्भधारण की योजना बना रही महिलाएं।
- स्तनपान कराने वाली महिलाएं।
ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना वैक्सीन नहीं लगवानी चाहिए।
दुनिया के 43 देशों ने अपनाई यह वैक्सीन
QDENGA को सबसे पहले 2022 में इंडोनेशिया ने मंजूरी दी थी।इसके बाद अब तक 43 देशों में इसे स्वीकृति मिल चुकी है।दुनिया भर में इसकी 3.2 करोड़ से अधिक डोज वितरित की जा चुकी हैं।भारत में इसकी उपलब्धता बढ़ाने के लिए टाकेदा ने Biological E के साथ साझेदारी की है, ताकि हर साल लगभग 5 करोड़ डोज तैयार की जा सकें।
WHO की क्या है सलाह?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने डेंगू संक्रमण वाले क्षेत्रों में 6 से 16 वर्ष के बच्चों के लिए इस वैक्सीन की सिफारिश की है।साथ ही गंभीर जोखिम वाले क्षेत्रों में 6 से 60 वर्ष तक के लोगों को भी चिकित्सकीय सलाह के आधार पर वैक्सीन देने पर विचार किया जा सकता है।हालांकि WHO यह भी स्पष्ट करता है कि वैक्सीन के बावजूद मच्छरों से बचाव, साफ-सफाई, समय पर इलाज और जागरूकता उतनी ही जरूरी रहेगी।
डेंगू के खिलाफ भारत की नई उम्मीद
भारत में डेंगू हर साल हजारों परिवारों की चिंता बन जाता है। ऐसे में QDENGA वैक्सीन की मंजूरी स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।यह वैक्सीन डेंगू के खिलाफ सुरक्षा का मजबूत कवच बन सकती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ वैक्सीन पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। घर और आसपास पानी जमा न होने देना, मच्छरों से बचाव, समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह का पालन करना आज भी सबसे प्रभावी उपाय हैं।अगर यह वैक्सीन व्यापक स्तर पर उपलब्ध होती है, तो आने वाले वर्षों में भारत डेंगू के खिलाफ अपनी सबसे बड़ी लड़ाई जीतने की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ा सकता है।
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