देश की राजधानी दिल्ली सोमवार को उस समय राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल का केंद्र बन गई, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले हजारों छात्र और युवा ‘संसद चलो मार्च’ के लिए सड़कों पर उतर आए। शिक्षा व्यवस्था में सुधार, NEET पेपर लीक जैसे मामलों की निष्पक्ष जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन देखते ही देखते इतना बड़ा हो गया कि संसद मार्ग, जंतर-मंतर और आसपास का पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो गया।प्रदर्शन के दौरान कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़पें, लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले, पत्थरबाजी और हिरासत की खबरों ने पूरे देश का ध्यान दिल्ली की ओर खींच लिया। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर एक सोशल मीडिया अभियान कैसे हजारों युवाओं के आंदोलन में बदल गया?
एक व्यंग्य से शुरू हुआ आंदोलन, फिर बना राष्ट्रीय अभियान
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की शुरुआत किसी पारंपरिक राजनीतिक दल की तरह नहीं हुई थी। इसकी शुरुआत सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक अभियान के रूप में हुई।बताया जाता है कि सरकार के आलोचकों और बेरोजगार युवाओं को लेकर की गई एक विवादित टिप्पणी के बाद अमेरिका से पढ़ाई कर लौटे अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सवाल उठाया—
“अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं तो क्या होगा?”
यहीं से आंदोलन की चिंगारी भड़की।कुछ ही दिनों में लाखों युवा इस अभियान से जुड़ गए। सोशल मीडिया पर संगठन की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी और बेरोजगारी, परीक्षा घोटाले, शिक्षा व्यवस्था, युवाओं के भविष्य और सरकारी जवाबदेही जैसे मुद्दे इसके केंद्र में आ गए।

NEET विवाद ने आंदोलन में भर दी नई जान
हाल ही में सामने आए NEET परीक्षा से जुड़े विवाद, पेपर लीक के आरोप और परीक्षा प्रणाली पर उठे सवालों ने इस आंदोलन को नई ताकत दे दी।युवाओं ने आरोप लगाया कि लगातार परीक्षा घोटालों से लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगाया जा रहा है।CJP ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए आंदोलन तेज कर दिया।
20 जून से जंतर-मंतर बना आंदोलन का केंद्र
20 जून को दिल्ली पुलिस से अनुमति मिलने के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू हुआ।पहले दिन यह केवल एक शांतिपूर्ण धरना था।
छात्र हाथों में पोस्टर लेकर बैठे थे।थालियां बजाई जा रही थीं।नारे लगाए जा रहे थे—
“NEET है या CHEAT?”
लेकिन शाम तक आंदोलन खत्म करने के बजाय अभिजीत दीपके ने ऐलान कर दिया—
“जब तक जवाब नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा।”

बिजली-पानी विवाद से बढ़ा तनाव
आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि धरना स्थल पर बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित की गई।हालांकि बाद में सुविधाएं बहाल कर दी गईं।इसके बावजूद आंदोलन और आक्रामक होता चला गया।
सोनम वांगचुक की एंट्री ने बदली तस्वीर
आंदोलन का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पहुंचे।उन्होंने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी और फिर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी।उनके जुड़ते ही आंदोलन को राष्ट्रीय पहचान मिल गई।देशभर से छात्र, सामाजिक संगठन और कई समूह इस आंदोलन के समर्थन में उतर आए।
21 दिन के अनशन के बाद बिगड़ी तबीयत
लगातार भूख हड़ताल के कारण सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने लगी।डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी करती रही।बताया गया कि उनका वजन तेजी से घट रहा था।आखिरकार पुलिस ने अदालत के निर्देशों और स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उन्हें जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया।इसी कार्रवाई ने आंदोलन को और भड़का दिया।

अभिजीत दीपके ने संभाली कमान
सोनम वांगचुक के अस्पताल पहुंचने के बाद CJP संस्थापक अभिजीत दीपके खुद अनशन पर बैठ गए।उन्होंने 20 जुलाई को “संसद चलो मार्च” का आह्वान किया।सोशल मीडिया के जरिए हजारों युवाओं से दिल्ली पहुंचने की अपील की गई।
20 जुलाई: दिल्ली बनी आंदोलन का मैदान
सोमवार सुबह हजारों छात्र जंतर-मंतर पर जमा हो गए।पुलिस पहले से हाई अलर्ट पर थी।संसद जाने वाले सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई।राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक समेत कई मेट्रो स्टेशनों के गेट अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए।सुरक्षा एजेंसियों की भारी तैनाती कर दी गई।

बैरिकेड टूटे… फिर शुरू हुई झड़प
जब प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की।इसके बाद दोनों पक्षों में धक्का-मुक्की शुरू हो गई।कुछ स्थानों पर पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया।आगे बढ़ने की कोशिश में हालात और बिगड़ गए।
आंसू गैस और लाठीचार्ज से मची अफरा-तफरी
स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख पुलिस ने कई स्थानों पर आंसू गैस के गोले छोड़े।इसके बाद लाठीचार्ज भी किया गया।सैकड़ों प्रदर्शनकारी इधर-उधर भागने लगे।पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
पुलिस पर पथराव, जवान घायल
दिल्ली पुलिस के अनुसार प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की।पुलिस का कहना है कि उन पर पत्थर भी फेंके गए, जिसमें एक सब-इंस्पेक्टर घायल हो गया।वहीं प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने बिना पर्याप्त चेतावनी के बल प्रयोग किया।
अभिजीत दीपके की हिरासत का दावा
दोपहर बाद CJP प्रवक्ता सौरव दास ने दावा किया कि अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।हालांकि इस संबंध में पुलिस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई।
नड्डा से बातचीत की कोशिश
इसी बीच CJP प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मिलने पहुंचा।प्रतिनिधियों ने दावा किया कि सरकार ने उनकी मांगों पर विचार करने के लिए समय मांगा है।इसी वजह से कुछ समय के लिए संसद मार्च भी रोका गया।
युवाओं की मांग क्या है?
प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगें हैं—
- NEET समेत सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता।
- पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच।
- दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई।
- शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार।
- जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई।
देशभर में छिड़ी नई बहस
दिल्ली की घटनाओं ने पूरे देश में नई बहस छेड़ दी है।एक पक्ष इसे युवाओं के भविष्य की लड़ाई बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दे रहा है।राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर आमने-सामने आ गए हैं।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संभावित वार्ता पर टिकी है। यदि बातचीत सफल होती है तो आंदोलन शांत हो सकता है, लेकिन यदि मांगों पर सहमति नहीं बनती, तो आने वाले दिनों में यह विरोध और व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है और घटनाक्रम पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।
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