देशभर में इस समय भीषण गर्मी का कहर जारी है। अप्रैल के महीने में ही तापमान तेजी से बढ़ने के कारण कई राज्यों में हालात गंभीर होते जा रहे हैं। AQI.in के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया के 20 सबसे गर्म शहरों में से 19 शहर भारत के हैं, जो चिंता का बड़ा कारण है।
उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में तापमान 43 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। मौसम विभाग ने 22 अप्रैल से 24 अप्रैल तक कई इलाकों में लू (हीटवेव) की स्थिति बने रहने की चेतावनी जारी की है।
लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी और गोरखपुर जैसे शहरों में भी गर्मी का असर साफ देखा जा रहा है, जहां दिन के समय बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।
दुनिया के सबसे गर्म शहरों में भारत का दबदबा
44 डिग्री तक पहुंचा तापमान
रिपोर्ट के अनुसार, बिहार का भागलपुर, ओडिशा का तालचेर और पश्चिम बंगाल का आसनसोल दुनिया के सबसे गर्म शहरों की सूची में शीर्ष पर हैं, जहां तापमान 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
इसके अलावा बिहार के बेगूसराय, मोतिहारी, मुंगेर, भोजपुर और सीवान जैसे शहरों में भी तापमान 43 डिग्री के आसपास पहुंच गया है।
उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में भी हालात गंभीर हैं, जहां गर्म हवाएं लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही हैं।

नेपाल का एकमात्र शहर सूची में
इस सूची में भारत के अलावा केवल नेपाल का लुम्बिनी शहर शामिल है। यह दर्शाता है कि दक्षिण एशिया के इस क्षेत्र में गर्मी का प्रभाव व्यापक रूप से देखा जा रहा है।
क्यों बढ़ रही है इतनी तेजी से गर्मी?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस अत्यधिक गर्मी का मुख्य कारण तीव्र सौर विकिरण है। अप्रैल के महीने में सूरज की किरणें सीधे जमीन पर पड़ती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ता है।
इसके अलावा, उत्तरी और मध्य भारत में आसमान साफ रहने के कारण सूर्य की गर्मी बिना किसी बाधा के धरती तक पहुंच रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की चरम गर्मी जलवायु परिवर्तन का संकेत हो सकती है। तापमान का लगातार बढ़ना और हीटवेव की घटनाओं का बढ़ना भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी है।
यूपी में गर्मी का असर, आम जनजीवन प्रभावित
उत्तर प्रदेश में भी गर्मी का असर लगातार बढ़ रहा है। लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज और वाराणसी में दिन का तापमान 42-43 डिग्री तक पहुंच चुका है।
गर्मी के कारण बाजारों में भीड़ कम हो गई है और लोग जरूरी काम के अलावा घर से बाहर निकलने से बच रहे हैं। स्कूलों के समय में बदलाव और स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी भी जारी की गई है।
ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती और पानी की कमी से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
स्वास्थ्य पर पड़ सकता है गंभीर असर
हीटवेव का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर पड़ता है। तेज गर्मी के कारण डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और थकावट जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
डॉक्टरों की सलाह है कि लोग ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं, धूप में निकलने से बचें और हल्के कपड़े पहनें।
प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग (IMD) ने साफ कहा है कि आने वाले कुछ दिनों तक गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम है।
प्रशासन ने भी लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक से निपटने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अप्रैल के अंत तक तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है। मई और जून में गर्मी और अधिक गंभीर रूप ले सकती है।
हालांकि, कुछ क्षेत्रों में हल्की आंधी या बारिश की संभावना जताई गई है, जिससे अस्थायी राहत मिल सकती है।
भीषण गर्मी के इस दौर में सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। छोटी-छोटी सावधानियां जैसे पानी पीना, धूप से बचना और स्वास्थ्य का ध्यान रखना बड़े खतरे से बचा सकता है।
उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में लोग इस समय गर्मी की मार झेल रहे हैं, ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
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