
बरेली के चौकी चौराहा स्थित सिटी सेंटर एलए मॉल में रविवार रात जो हुआ, उसने वहां मौजूद लोगों को दहला दिया। चंद मिनटों की शॉपिंग और मस्ती अचानक दहशत में बदल गई, जब मॉल की लिफ्ट में 13 लोग फंस गए। बिजली गुल होते ही लिफ्ट बीच रास्ते में अटक गई और अंदर मौजूद लोगों की सांसें थमने लगीं। भीषण गर्मी, उमस और घुटन के बीच महिलाएं और बच्चे चीखते-चिल्लाते रहे, लेकिन मदद पहुंचने में लंबा वक्त लग गया। करीब 35 मिनट तक लोग लिफ्ट में कैद रहे। हालात इतने बिगड़ गए कि एक किशोरी बेहोश हो गई। अंदर से लगातार “हेल्प… हेल्प…” की आवाजें आती रहीं, जबकि बाहर मौजूद लोगों ने किसी तरह हिम्मत दिखाकर लिफ्ट का गेट तोड़ा और सभी को सुरक्षित बाहर निकाला।
शॉपिंग का दिन बना खौफनाक अनुभव
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रविवार रात मॉल में सामान्य चहल-पहल थी। लोग खरीदारी और मनोरंजन में व्यस्त थे। इसी दौरान कुछ परिवार और बच्चे लिफ्ट के जरिए नीचे जाने के लिए उसमें सवार हुए। तभी अचानक बिजली चली गई और लिफ्ट बीच फ्लोर पर रुक गई। शुरुआत में लोगों को लगा कि कुछ ही मिनटों में समस्या ठीक हो जाएगी, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, अंदर का माहौल भयावह होता चला गया। गर्मी और उमस के कारण बच्चों का रोना शुरू हो गया। महिलाओं की हालत बिगड़ने लगी और घबराहट पूरे लिफ्ट में फैल गई।

‘ऐसा लगा कि अब बच नहीं पाएंगे’
सुभाषनगर निवासी हरनीत कौर ने बताया कि वह अपने पति नमनदीप सिंह, डेढ़ साल की बेटी हरनूर, ननद जसप्रीत कौर और उनके बच्चों के साथ मॉल घूमने आई थीं। अचानक लिफ्ट बंद हो गई और काफी देर तक कोई मदद नहीं मिली। हरनीत के मुताबिक, “एक समय ऐसा आया जब लगा कि अब शायद हम जिंदा बाहर नहीं निकल पाएंगे। बच्चे लगातार रो रहे थे, सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और घुटन बढ़ती जा रही थी। हम सिर्फ ऊपर वाले से दुआ कर रहे थे।” उन्होंने बताया कि इसी दौरान एक किशोरी बेहोश होकर गिर गई। लिफ्ट खुलने के बाद उसे पानी पिलाकर और प्राथमिक सहायता देकर होश में लाया गया।

अलार्म भी फेल, कॉल बटन ने भी नहीं दिया जवाब
घटना ने मॉल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लिफ्ट में मौजूद लोगों ने मदद के लिए अलार्म बटन दबाया, लेकिन वह काम नहीं कर रहा था। कॉल बटन से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। यश और सिद्धांत कुमार नाम के दो युवकों ने बताया कि उन्होंने लिफ्ट पर लिखे हेल्पलाइन नंबर पर आठ से दस बार फोन किया, लेकिन किसी ने कॉल रिसीव नहीं की। अंदर मौजूद लोगों की हालत बिगड़ती देख उन्होंने खुद राहत कार्य शुरू करने का फैसला किया।

देवदूत बनकर पहुंचे लोग, तोड़ा गेट और बचाई जान
जब लिफ्ट पहली मंजिल के पास अटकी हुई थी, तब अंदर से चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद लोग मौके पर पहुंचे। राजेंद्र निगम, जितेंद्र सक्सेना, अमन सिंह और अन्य लोगों ने पहले सिक्योरिटी स्टाफ को बुलाने की कोशिश की, लेकिन तत्काल कोई मदद नहीं पहुंची। इसके बाद लोगों ने खुद मोर्चा संभाला। लोहे की रॉड की मदद से लिफ्ट का गेट खोलने की कोशिश शुरू की गई। काफी मशक्कत के बाद गेट तोड़ा गया और एक-एक कर सभी लोगों को बाहर निकाला गया। मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि यदि कुछ मिनट और देरी होती तो अंदर फंसे लोगों की हालत और गंभीर हो सकती थी।
ऑपरेटर नहीं था, बढ़ गया संकट
जांच में सामने आया कि जिस समय घटना हुई, उस वक्त लिफ्ट में कोई ऑपरेटर मौजूद नहीं था। बताया गया कि दिन के समय ऑपरेटर तैनात रहता है, लेकिन रात में यह व्यवस्था नहीं थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई प्रशिक्षित ऑपरेटर मौजूद होता तो वह अंदर फंसे लोगों को घबराने से रोक सकता था और सुरक्षा नियमों की जानकारी देकर स्थिति को नियंत्रित रख सकता था।

मॉल प्रबंधन ने दी सफाई
मॉल के ऑपरेशन मैनेजर विदित कुमार भार्गव ने कहा कि बिजली जाने के बाद लिफ्ट का सिस्टम प्रभावित हुआ। उनके अनुसार अंदर फंसे लोगों ने घबराहट में गेट को लातें मारना और जोर-जोर से पीटना शुरू कर दिया, जिससे सेंसर ने काम करना बंद कर दिया। उन्होंने दावा किया कि मॉल में 12 सुरक्षाकर्मी तैनात थे और सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंच गए थे। हालांकि लोगों का कहना है कि मदद पहुंचने में काफी देर हुई।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
बरेली में लिफ्ट से जुड़े हादसे पहले भी सामने आ चुके हैं। फरवरी 2026 में प्रेमनगर स्थित एक रेस्टोरेंट में लिफ्ट फेल होने से दस लोग फंस गए थे। वहीं 2019 में जिला महिला अस्पताल में क्षमता से अधिक लोगों के चढ़ने पर लिफ्ट खराब हो गई थी और करीब दो घंटे बाद लोगों को बाहर निकाला जा सका था।
बड़े सवाल छोड़ गया हादसा
सिटी सेंटर एलए मॉल की यह घटना केवल तकनीकी खराबी का मामला नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी की ओर भी इशारा करती है। अलार्म सिस्टम का फेल होना, कॉल रिस्पॉन्स न मिलना, ऑपरेटर का न होना और समय पर राहत न पहुंचना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल सभी लोग सुरक्षित हैं, लेकिन 35 मिनट तक मौत के साये में बिताए गए वे पल शायद ही कोई भूल पाए। यह घटना मॉल प्रबंधन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक चेतावनी है कि भविष्य में ऐसी लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
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