आगरा। उत्तर प्रदेश में एमएलसी चुनाव के दौरान कथित धांधली और बूथ कैप्चरिंग की शिकायतों के बाद भारत निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान के दौरान निगरानी और नियंत्रण में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर आयोग ने छह अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। इनमें दो सेक्टर मजिस्ट्रेट और चार पुलिस अधिकारी शामिल हैं। इसके साथ ही संबंधित मतदान केंद्रों पर तैनात पांच मतदान अधिकारियों और 16 पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।यह कार्रवाई 23 अक्टूबर को हुए मतदान के दौरान सामने आई शिकायतों और आगरा मंडलायुक्त एवं निर्वाचन अधिकारी की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। आयोग ने सैंया और फतेहाबाद के मतदान केंद्रों पर प्रभावी निगरानी नहीं रखने को गंभीर लापरवाही माना। अधिकारियों को आरोपपत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू करने और उसका मसौदा 10 दिनों के भीतर आयोग को भेजने का निर्देश दिया गया है।

सैंया और फतेहाबाद के बूथों पर कार्रवाई
निर्वाचन आयोग की कार्रवाई का संबंध आगरा जिले के दो मतदान केंद्रों से है। सैंया के मतदान केंद्र संख्या 21 और फतेहाबाद के मतदान केंद्र संख्या 26 पर मतदान के दौरान कथित अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। इन केंद्रों पर तैनात पर्यवेक्षण अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए आयोग ने छह अधिकारियों को निलंबित करने के निर्देश जारी किए।
सैंया के बूथ संख्या 21 से जुड़े अधिकारी:
- ओपी चक, सेक्टर मजिस्ट्रेट एवं जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी।
- हरिशरण सिंह, निरीक्षक एवं सेक्टर पुलिस अधिकारी।
- संदीप कुमार, उपनिरीक्षक।
फतेहाबाद के बूथ संख्या 26 से जुड़े अधिकारी:
- विशाल राठौर, सेक्टर मजिस्ट्रेट एवं क्षेत्रीय वन अधिकारी।
- पुरुषोत्तम पाल, निरीक्षक एवं सेक्टर पुलिस अधिकारी।
- सुमित त्यागी, उपनिरीक्षक।
आयोग के अनुसार, इन अधिकारियों की जिम्मेदारी मतदान केंद्रों के भीतर और आसपास प्रभावी निगरानी तथा व्यवस्था बनाए रखना थी। जांच में पर्यवेक्षण और नियंत्रण से जुड़ी गंभीर कमियां सामने आने के बाद कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
21 अन्य कर्मचारियों पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई
मामला केवल छह अधिकारियों के निलंबन तक सीमित नहीं है। आयोग ने दोनों मतदान केंद्रों पर तैनात अन्य कर्मचारियों के खिलाफ भी नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई करने को कहा है। इसमें पांच मतदान अधिकारी और 16 पुलिसकर्मी शामिल हैं।पांच मतदान अधिकारियों में दो पीठासीन अधिकारी और तीन मतदान अधिकारी शामिल हैं। पुलिसकर्मियों में पांच हेड कांस्टेबल और 11 कांस्टेबल हैं। संबंधित अधिकारियों को मामले में नियमानुसार विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ाने और आयोग को अनुपालन रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं।निर्वाचन आयोग की इस कार्रवाई का उद्देश्य मतदान प्रक्रिया के दौरान जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करना है। चुनाव में तैनात अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे नियमों का पालन कराएं, मतदान केंद्रों पर व्यवस्था बनाए रखें और किसी भी अनियमितता की स्थिति में समय रहते उचित कदम उठाएं।अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया अपने निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ेगी। निलंबन और आरोपपत्र जारी करने के निर्देश को अंतिम विभागीय निष्कर्ष से अलग समझना जरूरी है।
सपा प्रत्याशी आकाश अग्रवाल ने लगाए थे गंभीर आरोप
आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी आकाश अग्रवाल ने मतदान के दौरान अनियमितताओं और अपने समर्थकों को परेशान किए जाने के आरोप लगाए थे। उनके मुताबिक, चुनाव के दौरान उनके समर्थकों पर दबाव बनाया गया और अलग-अलग विभागों की ओर से कार्रवाई की गई।आकाश अग्रवाल ने आरोप लगाया कि उनके समर्थकों के चालान काटे गए। उन्होंने पेट्रोल पंप कर्मचारियों से जुड़े अनापत्ति प्रमाण पत्र की जांच तथा बिजली विभाग और जिला पंचायत विभाग की टीमों के पहुंचने का भी उल्लेख किया। सपा प्रत्याशी ने इन घटनाओं को अपने समर्थकों पर दबाव बनाने की कोशिश बताया।उन्होंने औरैया जिले के तीन बूथों पर भी कथित बूथ कैप्चरिंग के आरोप लगाते हुए पुनर्मतदान की मांग की थी। ये आरोप सपा प्रत्याशी की ओर से लगाए गए थे। इनके संबंध में सभी तथ्यों और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया को अलग-अलग सत्यापित करना आवश्यक है।निर्वाचन आयोग की ओर से आगरा के दो बूथों पर निगरानी में लापरवाही को लेकर कार्रवाई की गई है। इसे प्रत्याशी की ओर से लगाए गए हर आरोप की पुष्टि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
शिकायतों के बाद तीन बूथों पर दोबारा मतदान
शिकायतों के बाद आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के तीन मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान कराया गया। इनमें सैंया का बूथ संख्या 21, फतेहाबाद का बूथ संख्या 26 और खेरागढ़ का बूथ संख्या 20 शामिल था।23 अक्टूबर को हुए मूल मतदान के संबंध में अनियमितताओं की शिकायतें मिलने के बाद निर्वाचन आयोग ने इन केंद्रों पर दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया। 26 अक्टूबर को पुनर्मतदान की प्रक्रिया पूरी कराई गई। आयोग की कार्रवाई और पुनर्मतदान का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बीच निर्धारित नियमों के अनुसार मतदान कराना था। पुनर्मतदान के दौरान भी सैंया क्षेत्र में हंगामे की खबर सामने आई। सपा और भाजपा समर्थकों के बीच तनाव की स्थिति बनने पर पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को शांत कराया। इस घटनाक्रम के बाद चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था और मतदान केंद्रों की निगरानी को लेकर चर्चा तेज हो गई।
आयोग ने 10 दिन में आरोपपत्र का मसौदा मांगा
निर्वाचन आयोग के सचिव सुमन कुमार दास ने 26 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा को पत्र भेजकर कार्रवाई के निर्देश दिए। यह कदम आगरा मंडलायुक्त एवं निर्वाचन अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर उठाया गया।आयोग ने छह अधिकारियों के खिलाफ आरोपपत्र तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करने और मसौदे को औपचारिक रूप से जारी करने से पहले जांच के लिए भेजने को कहा है। इसके लिए 10 दिनों की समयसीमा निर्धारित की गई है। संबंधित अधिकारियों से अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी गई है।इस कार्रवाई से साफ है कि आयोग मतदान प्रक्रिया में निगरानी की जिम्मेदारी को गंभीरता से ले रहा है। चुनाव के दौरान किसी भी बूथ पर निष्पक्षता, सुरक्षा और नियमों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की अहम जिम्मेदारी है। यदि निगरानी में कमी सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
एमएलसी चुनाव की निष्पक्षता पर टिकी निगाहें
आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में हुई घटनाओं ने चुनावी प्रक्रिया की निगरानी और अधिकारियों की जिम्मेदारी को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक ओर सपा प्रत्याशी ने चुनाव के दौरान दबाव और अनियमितताओं के आरोप लगाए, वहीं दूसरी ओर निर्वाचन आयोग ने जांच रिपोर्ट के आधार पर छह अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए और अन्य कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई का आदेश दिया।अब आगे की प्रक्रिया में आरोपपत्र, विभागीय जांच और आयोग को भेजी जाने वाली अनुपालन रिपोर्ट महत्वपूर्ण होंगी। इन प्रक्रियाओं के जरिए संबंधित अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारी के बारे में औपचारिक निष्कर्ष सामने आ सकते हैं।सबसे बड़ा घटनाक्रम यह है कि आगरा एमएलसी चुनाव में निगरानी की गंभीर खामियों पर निर्वाचन आयोग ने छह अधिकारियों को निलंबित करने और 21 अन्य कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। तीन बूथों पर पुनर्मतदान और उसके बाद हुई कार्रवाई ने इस चुनाव को लेकर राजनीतिक तथा प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
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