UP में AI क्रांति! लखनऊ यूनिवर्सिटी से बदलेगा युवाओं का भविष्य

Editorial
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लखनऊ उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए भविष्य की तकनीक और रोजगार के नए दरवाजे खोलने वाली एक ऐतिहासिक पहल शुक्रवार को लखनऊ विश्वविद्यालय में शुरू हुई। विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर में प्रदेश के पहले ग्रीन स्किल्स एवं एप्लाइड एआई सेंटर का भव्य शुभारंभ किया गया। यह सेंटर 1एम1बी (वन मिलियन फॉर वन बिलियन) फाउंडेशन, माइक्रोसॉफ्ट, एमईआईटीवाई स्टार्टअप हब और उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त सहयोग से स्थापित किया गया है।यह केवल एक प्रशिक्षण केंद्र नहीं, बल्कि ऐसा इनोवेशन हब होगा जहाँ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ग्रीन टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट इनोवेशन और भविष्य की इंडस्ट्री से जुड़ी व्यावहारिक स्किल्स सिखाई जाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में रोजगार का सबसे बड़ा आधार AI और हरित अर्थव्यवस्था होगी, ऐसे में यह सेंटर उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है।

भव्य समारोह में हुआ उद्घाटन, कई दिग्गज रहे मौजूद

सेंटर का उद्घाटन लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी, 1एम1बी फाउंडेशन के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी मानव सुबोध, माइक्रोसॉफ्ट की प्रोग्राम मैनेजर (CSR) अनीशा अव्राचन तथा कंप्यूटर विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) पुनीत मिश्रा ने संयुक्त रूप से किया।इस अवसर पर वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, शिक्षाविद, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में छात्र भी मौजूद रहे।उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने वीडियो संदेश के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह पहल प्रदेश के युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

 

कुलपति बोले— भविष्य की शिक्षा का नया अध्याय

लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी ने इस अवसर पर कहा,

“1एम1बी और माइक्रोसॉफ्ट के सहयोग से स्थापित यह सेंटर हमारे विश्वविद्यालय की आधुनिक सोच और शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रतीक है। अब हमारे छात्र केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि एआई और सस्टेनेबिलिटी जैसी भविष्य की तकनीकों पर व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त करेंगे।”

उन्होंने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) की भावना के अनुरूप है और इससे युवाओं की वैश्विक रोजगार क्षमता बढ़ेगी। साथ ही वे समाज और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार तकनीकी विशेषज्ञ बन सकेंगे।

AI बनाएगा नौकरी तलाशने वाला नहीं, नौकरी देने वाला

1एम1बी फाउंडेशन के संस्थापक एवं सीईओ मानव सुबोध ने बेहद महत्वपूर्ण बात कहते हुए कहा,

“भारत का वास्तविक AI लाभ उन 90 प्रतिशत लोगों से आएगा जो AI का उपयोग करेंगे, न कि केवल उन 10 प्रतिशत लोगों से जो AI बनाएंगे।”

उन्होंने कहा कि लखनऊ का यह सेंटर युवाओं को AI और ग्रीन स्किल्स से लैस करेगा ताकि वे मैन्युफैक्चरिंग, क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और उभरते उद्योगों में बेहतर अवसर हासिल कर सकें।उनका कहना था कि यह पहल केवल रोजगार तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि युवाओं को स्टार्टअप और उद्यमिता के लिए भी तैयार करेगी।

पहले ही साल 5 हजार से ज्यादा युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण

इस सेंटर के माध्यम से पहले वर्ष में 5,000 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा।देशभर में स्थापित किए जा रहे पाँच सेंटरों का लक्ष्य वर्ष 2030 तक एक लाख युवाओं को प्रशिक्षित करना है।

इनमें से—

  • 50,000 युवाओं को नौकरी, इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप के अवसर मिलेंगे।
  • पहले वर्ष में 20,000 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
  • 10,000 युवाओं को रोजगार और करियर से जोड़ा जाएगा।
  • AI आधारित क्लाइमेट इनोवेशन के 50 नए यूज केस विकसित किए जाएंगे।

बेंगलुरु और हैदराबाद के बाद अब लखनऊ की बारी

लखनऊ का यह सेंटर देशभर में बनाए जा रहे पाँच सेंटरों में तीसरा है।इससे पहले ऐसे सेंटर बेंगलुरु और हैदराबाद में शुरू किए जा चुके हैं।अब जल्द ही नोएडा और शिलांग में भी इसी प्रकार के सेंटर खोले जाएंगे, जिससे पूरे देश में AI और ग्रीन टेक्नोलॉजी का राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार होगा।

क्या-क्या सीखेंगे छात्र?

यह सेंटर पारंपरिक स्किल डेवलपमेंट सेंटर से बिल्कुल अलग होगा।

यहाँ छात्रों को केवल सैद्धांतिक पढ़ाई नहीं बल्कि वास्तविक उद्योगों से जुड़ी परियोजनाओं पर काम कराया जाएगा।

प्रमुख प्रशिक्षण क्षेत्रों में शामिल होंगे—

  • एप्लाइड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
  • सोलर एनर्जी
  • इलेक्ट्रिक व्हीकल टेक्नोलॉजी
  • विंड एनर्जी
  • क्लाइमेट चेंज समाधान
  • सर्कुलर इकोनॉमी
  • स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग
  • कृषि में AI
  • जलवायु अनुकूलन तकनीक
  • स्वच्छ ऊर्जा आधारित समाधान

इसके अलावा विद्यार्थियों को उद्योग आधारित प्रोजेक्ट, हैकाथॉन, इनोवेशन चैलेंज, इंटर्नशिप, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और जॉब फेयर का भी लाभ मिलेगा।

माइक्रोसॉफ्ट देगा तकनीक और वैश्विक मार्गदर्शन

माइक्रोसॉफ्ट की ओर से इस पहल को कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) कार्यक्रम के तहत सहयोग दिया जाएगा।कंपनी AI तकनीक, डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म, कर्मचारी मेंटरशिप, इनोवेशन चुनौतियाँ और स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों को वैश्विक स्तर की सीख उपलब्ध कराएगी।

माइक्रोसॉफ्ट की सीनियर डायरेक्टर मंजू धस्माना ने कहा,

“हम उत्तर प्रदेश को AI-सक्षम और भविष्य के लिए तैयार राज्य बनाने की दिशा में सरकार के साथ खड़े हैं। यह सेंटर युवाओं को नई तकनीक और हरित कौशल देकर उन्हें वैश्विक अवसरों के लिए तैयार करेगा।”

उन्होंने कहा कि यह केंद्र स्थानीय स्तर पर जलवायु परिवर्तन से जुड़ी समस्याओं के AI आधारित समाधान विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

रोजगार ही नहीं, स्टार्टअप और नवाचार का भी

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में दुनिया की सबसे बड़ी मांग AI, ग्रीन टेक्नोलॉजी और क्लाइमेट इनोवेशन से जुड़े पेशेवरों की होगी।लखनऊ विश्वविद्यालय का यह सेंटर छात्रों को केवल नौकरी के लिए तैयार नहीं करेगा बल्कि उन्हें नए स्टार्टअप शुरू करने, उद्योगों के लिए समाधान विकसित करने और नवाचार आधारित उद्यम स्थापित करने के लिए भी प्रोत्साहित करेगा।1एम1बी के जॉब फेयर, उद्योग साझेदारी और मेंटरशिप कार्यक्रम युवाओं को सीधे कंपनियों से जोड़ेंगे।

उत्तर प्रदेश के लिए क्यों है यह बड़ी उपलब्धि?

उत्तर प्रदेश देश का सबसे युवा राज्य माना जाता है। लाखों युवा हर वर्ष रोजगार की तलाश में निकलते हैं, लेकिन बदलती तकनीक के कारण पारंपरिक कौशल अब पर्याप्त नहीं रह गए हैं।ऐसे समय में AI और ग्रीन स्किल्स पर आधारित यह सेंटर युवाओं को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करेगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख AI और ग्रीन टेक्नोलॉजी हब के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत करेगालखनऊ विश्वविद्यालय में शुरू हुआ उत्तर प्रदेश का पहला ग्रीन स्किल्स एवं एप्लाइड एआई सेंटर केवल एक नई शैक्षणिक पहल नहीं, बल्कि भविष्य के भारत की नींव रखने वाला कदम माना जा रहा है। यदि तय लक्ष्यों के अनुसार प्रशिक्षण और रोजगार की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो आने वाले वर्षों में हजारों युवा आधुनिक तकनीक, हरित अर्थव्यवस्था और वैश्विक रोजगार बाजार में नई पहचान बना सकते हैं। AI, क्लाइमेट टेक्नोलॉजी और स्किल डेवलपमेंट का यह संगम उत्तर प्रदेश को तकनीकी और आर्थिक दृष्टि से नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है।

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