बहराइच उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। घाघरा (सरयू) नदी के किनारे 12 वर्षीय मासूम सुनील सिंह की जिंदगी कुछ ही मिनटों में खत्म हो गई। खेत में काम खत्म करने के बाद वह सिर्फ हाथ-मुंह धोने नदी किनारे गया था, लेकिन झाड़ियों में छिपा एक मगरमच्छ उसकी मौत बनकर बैठा था।जैसे ही सुनील पानी के पास पहुंचा, मगरमच्छ ने बिजली की तेजी से हमला किया और उसका पैर जबड़े में दबाकर गहरे पानी की ओर खींचने लगा। मासूम की चीख सुनकर उसके चाचा विजय राज सिंह बिना एक पल गंवाए नदी में कूद पड़े। इसके बाद जो हुआ, वह किसी दर्दनाक फिल्मी दृश्य से कम नहीं था।
7 मिनट तक मौत से लड़ता रहा चाचा
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक विजय राज सिंह ने मगरमच्छ के जबड़े से अपने भतीजे को छुड़ाने की भरसक कोशिश की। उन्होंने सुनील का हाथ कसकर पकड़ लिया और पूरी ताकत से उसे अपनी ओर खींचते रहे।करीब सात मिनट तक इंसान और मगरमच्छ के बीच जिंदगी की जंग चलती रही। नदी किनारे मौजूद ग्रामीण भी दौड़ पड़े। किसी ने ईंट उठाई, किसी ने पत्थर फेंके, तो किसी ने जोर-जोर से शोर मचाकर मगरमच्छ को डराने की कोशिश की।लेकिन नदी का खूंखार शिकारी किसी की कोशिशों से नहीं डरा।आखिरकार मगरमच्छ की ताकत इंसानों पर भारी पड़ गई। उसने सुनील को गहरे पानी में खींच लिया और देखते ही देखते सबकी आंखों के सामने मौत का सबसे भयावह मंजर सामने आ गया।

दो-तीन बार पानी में पटका, फिर निगल गया
ग्रामीणों के अनुसार मगरमच्छ ने बच्चे को पानी में कई बार झटका दिया और डुबोया। काफी देर तक नदी में हलचल होती रही, लेकिन कोई भी सुनील को बचा नहीं सका।रात करीब 10:30 बजे ग्रामीणों ने काफी तलाश के बाद नदी से बच्चे का शव बरामद किया। शव की हालत देखकर हर किसी की रूह कांप गई। बताया गया कि मगरमच्छ उसके शरीर का एक हिस्सा खा चुका था।घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पहले ही अनाथ था सुनील, अब परिवार पूरी तरह टूट गया
इस हादसे की सबसे दर्दनाक बात यह है कि सुनील पहले से ही जिंदगी के सबसे बड़े दुख झेल चुका था।करीब सात साल पहले उसकी मां का बीमारी से निधन हो गया था।इसके बाद पांच साल पहले पिता भी दुनिया छोड़ गए।माता-पिता की मौत के बाद चाचा विजय राज सिंह ही इन बच्चों के लिए पिता, अभिभावक और सहारा बन गए थे।अब उसी परिवार पर एक और ऐसा दुख टूट पड़ा, जिसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो सकेगी।
तीन छोटे भाई-बहनों के सिर से भी छिन गया सहारा
सुनील के निधन के बाद अब परिवार में उसकी 14 वर्षीय बहन सुमन, 10 वर्षीय भाई संजय और 7 वर्षीय बहन सीमा ही बचे हैं।परिवार पहले से बेहद गरीब है। रोज मजदूरी करके किसी तरह घर का खर्च चलता था।अब गांव के लोग इस बेसहारा परिवार की मदद के लिए आगे आने लगे हैं। ग्रामीण चंदा इकट्ठा कर बच्चों की पढ़ाई और पालन-पोषण की व्यवस्था करने की कोशिश कर रहे हैं।
पूरा गांव दहशत में
घटना के बाद बौंडी थाना क्षेत्र के मुरौवा गांव समेत आसपास के तटीय इलाकों में भय का माहौल है।किसान अब नदी किनारे स्थित खेतों में जाने से डर रहे हैं।बच्चों को घर से बाहर निकलने से रोका जा रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि नदी में पहले भी मगरमच्छ दिखाई देते थे, लेकिन इस तरह का हमला पहली बार हुआ है।
वन विभाग अलर्ट मोड पर
घटना के बाद वन विभाग ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी है।वन क्षेत्राधिकारी मोहम्मद शाकिब ने बताया कि नदी किनारे बसे गांवों में मुनादी कराकर लोगों से नदी के पास नहीं जाने की अपील की जा रही है।
इसके अलावा—
- नदी किनारे चेतावनी बोर्ड लगाए जा रहे हैं।
- अतिरिक्त वनकर्मियों की तैनाती की गई है।
- मगरमच्छ को पकड़ने के लिए जाल बिछाए जा रहे हैं।
- संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त बढ़ा दी गई है।
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि नदी के किनारे अकेले न जाएं और बच्चों को बिल्कुल भी पानी के पास न जाने दें।
वीडियो ने हिला दिया सोशल मीडिया
घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों में भारी आक्रोश और दुख है। हालांकि वीडियो बेहद संवेदनशील है और इसे साझा करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। लोगों ने प्रशासन से नदी किनारे सुरक्षा बढ़ाने, चेतावनी व्यवस्था मजबूत करने और वन्यजीव-मानव संघर्ष को रोकने के लिए स्थायी कदम उठाने की मांग की है।
वन्यजीव और इंसान के बढ़ते टकराव का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि नदियों के किनारे बढ़ती मानवीय गतिविधियां, आवासों में बदलाव और जलस्तर के उतार-चढ़ाव के कारण कई इलाकों में मगरमच्छ और इंसानों का आमना-सामना बढ़ रहा है।ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए केवल घटना के बाद कार्रवाई नहीं, बल्कि पहले से निगरानी, चेतावनी प्रणाली और स्थानीय लोगों में जागरूकता बेहद जरूरी है।
12 वर्षीय सुनील की मौत सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक ऐसा दर्द है जिसने पूरे गांव को झकझोर दिया है। एक बच्चा जिसने पहले ही माता-पिता को खो दिया था, वह अब मगरमच्छ का शिकार बन गया। चाचा ने सात मिनट तक अपनी जान की परवाह किए बिना भतीजे को बचाने की कोशिश की, लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया।अब पूरे इलाके की नजर वन विभाग की कार्रवाई पर है। सवाल सिर्फ एक मगरमच्छ को पकड़ने का नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का भी है कि किसी और परिवार को सुनील जैसा दर्द कभी न झेलना पड़े।
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