नई दिल्ली। यूट्यूबर और सोशल मीडिया कमेंटेटर अजीत भारती को SC/ST एक्ट से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट की ओर से कहा गया कि मामले में प्रथम दृष्टया अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत अपराध बनता है। इसके बाद भारती ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। भारती ने अपने बयान में कहा है कि वह कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि हाईकोर्ट का आदेश अग्रिम जमानत के स्तर पर है और इसे उनके दोषी होने का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। दूसरी ओर, पुलिस और शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि सोशल मीडिया पर की गई कथित टिप्पणियां आपत्तिजनक थीं और SC/ST एक्ट की धाराएं लागू होती हैं।
हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की अग्रिम जमानत याचिका?
दिल्ली हाईकोर्ट में अजीत भारती की अग्रिम जमानत याचिका पर न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की पीठ ने सुनवाई की। अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले में SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) के तहत अपराध बनने की बात कही। रिपोर्ट के मुताबिक, इन धाराओं के लागू होने की स्थिति में कानून में अग्रिम जमानत पर रोक से संबंधित प्रावधान सामने आता है।इसी आधार पर अदालत ने भारती की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। इससे पहले 7 सितंबर 2026 को दिल्ली की निचली अदालत भी उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुकी थी। निचली अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था।अदालत का यह फैसला मामले की अंतिम सुनवाई या दोषसिद्धि का निर्णय नहीं है। फिलहाल मामला आपराधिक जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के दायरे में है।

अजीत भारती ने क्या कहा?
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अजीत भारती ने कहा कि वह आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। उनका कहना है कि अदालत की टिप्पणी को उनके खिलाफ अंतिम दोषसिद्धि के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।भारती ने अपनी ओर से यह दावा भी किया कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य किसी व्यक्ति या समुदाय का जाति के आधार पर जानबूझकर अपमान करना नहीं था। उन्होंने कहा कि उनकी प्रतिक्रिया परिवार से जुड़ी एक कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के जवाब में आई थी।उन्होंने यह भी कहा कि वह SC/ST एक्ट को लेकर अपनी आपत्तियां उठाते रहेंगे। रिपोर्ट के अनुसार, भारती ने यह रुख भी जाहिर किया कि जरूरत पड़ने पर वह जेल जाने के लिए तैयार हैं और मामले में पीछे नहीं हटेंगे।

पुलिस और शिकायतकर्ता पक्ष की दलील क्या है?
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने भारती की अग्रिम जमानत का विरोध किया। पुलिस की ओर से कहा गया कि सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से की गई कथित टिप्पणियों में एक जाति को लेकर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया और इसी आधार पर SC/ST एक्ट की धाराएं लगाई गई हैं।शिकायतकर्ता पक्ष ने भी कथित टिप्पणियों को आपत्तिजनक और जानबूझकर की गई टिप्पणी बताया। इसके विपरीत, भारती की ओर से पेश वकील ने अदालत में तर्क दिया कि उनके मुवक्किल का उद्देश्य जाति के आधार पर किसी व्यक्ति या समुदाय को अपमानित करना नहीं था। बचाव पक्ष ने कथित टिप्पणी के संदर्भ और उसके पीछे की परिस्थितियों का भी हवाला दिया।इस तरह मामले में फिलहाल पुलिस और शिकायतकर्ता के आरोप तथा भारती का बचाव दोनों अलग-अलग हैं। अंतिम कानूनी निष्कर्ष आगे की न्यायिक प्रक्रिया में तय होगा।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
मामला अगस्त 2026 में सामने आया। रिपोर्टों के मुताबिक, 22 अगस्त को एक साझा किए गए वीडियो में अजीत भारती की कुछ टिप्पणियां सामने आई थीं। इसके बाद 23 अगस्त को दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू थाने में FIR दर्ज की गई।FIR में SC/ST एक्ट के साथ-साथ IT एक्ट की धारा 67 और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं का उल्लेख किया गया। शिकायत में सांसद चंद्रशेखर आजाद, डॉ. भीमराव आंबेडकर और अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित कथित आपत्तिजनक एवं जातिसूचक टिप्पणियों का आरोप लगाया गया।अजीत भारती की ओर से इन आरोपों से अलग पक्ष रखा गया। उनका कहना है कि उनकी टिप्पणी किसी जाति या समुदाय को निशाना बनाने के इरादे से नहीं थी, बल्कि परिवार से जुड़ी एक कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के जवाब में दी गई थी।

पहले निचली अदालत से भी नहीं मिली थी राहत
अजीत भारती ने मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत की मांग की थी। लेकिन 7 सितंबर को दिल्ली की अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने कथित टिप्पणियों को लेकर गंभीरता से विचार किया। 16 सितंबर को अदालत ने मामले में फैसला सुरक्षित रखा था। रिपोर्ट के अनुसार उस दौरान अदालत ने टिप्पणी करते समय सावधानी बरतने की बात भी कही थी।इसके बाद 24 सितंबर को हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत से इनकार कर दिया। अदालत का कहना था कि प्रथम दृष्टया SC/ST एक्ट के तहत मामला बनता है और संबंधित कानूनी रोक के कारण अग्रिम जमानत की याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती।
अब सुप्रीम कोर्ट पर टिकी नजर
दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद अब अजीत भारती की ओर से सुप्रीम कोर्ट का रुख किए जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सुप्रीम कोर्ट में उनकी याचिका कब दाखिल होती है और उस पर अदालत क्या रुख अपनाती है।फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश अग्रिम जमानत से संबंधित है, न कि मामले में दोष या निर्दोष होने का अंतिम फैसला। मामले में लगाए गए आरोपों का न्यायिक परीक्षण अभी बाकी है।SC/ST एक्ट से जुड़े इस मामले ने सोशल मीडिया पर सार्वजनिक टिप्पणियों, अभिव्यक्ति की सीमाओं और जातिसूचक कथित टिप्पणियों से जुड़े कानूनी प्रावधानों को लेकर भी बहस को सामने ला दिया है। हालांकि, अजीत भारती के मामले में अंतिम कानूनी स्थिति आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
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