अम्बेडकरनगर: उधार के 2 हजार रुपये मांगने पर महिला से मारपीट का आरोप

Editorial
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रिपोर्ट :इसरार अहमद

अम्बेडकरनगर जिले के जलालपुर थाना क्षेत्र के रुकुनपुर कासिमपुर गांव में उधार दिए गए दो हजार रुपये वापस मांगना एक महिला को भारी पड़ने का आरोप है। पीड़िता तरीकुन निशा पत्नी सेराज अहमद ने गांव के ही एक परिवार के चार लोगों पर मारपीट करने का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि जब वह अपने रुपये मांगने पहुंची तो आरोपियों ने कथित तौर पर लात-घूंसों और डंडे से उसकी पिटाई कर दी। घटना के बाद पीड़िता ने डायल 112 पर सूचना देने के साथ जलालपुर थाने में लिखित शिकायत भी दी।महिला का आरोप है कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने उसकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया और न ही उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया।

उधार के रुपये मांगने पर विवाद होने का आरोप

पीड़िता तरीकुन निशा के मुताबिक, गांव के संदीप कुमार पुत्र करमराज ने उनसे दो हजार रुपये उधार लिए थे। महिला का कहना है कि जब वह अपने रुपये वापस मांगने के लिए पहुंचीं तो विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि इस दौरान संदीप कुमार, उसकी पत्नी फूल कुमारी, सोनम पुत्री करमराज और मालती पत्नी करमराज ने मिलकर उनके साथ मारपीट की।पीड़िता का आरोप है कि उनके साथ लात-घूंसों और डंडे से मारपीट की गई तथा रुपये लौटाने से भी इनकार कर दिया गया। महिला के अनुसार, वह अपने उधार दिए गए रुपये मांगने गई थीं, लेकिन वहां उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार और मारपीट की घटना हो गई।मामले में दूसरे पक्ष का बयान सामने नहीं आया है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता पुलिस जांच के बाद ही चल सकेगा।

उधार के 2 हजार रुपये मांगने पर महिला से मारपीट
उधार के 2 हजार रुपये मांगने पर महिला से मारपीट

पति मुंबई में रहते हैं, बच्चों के साथ घर पर अकेली होने की बात

तरीकुन निशा ने बताया कि उनके पति सेराज अहमद मुंबई में रहते हैं। ऐसे में वह अपने बच्चों के साथ गांव में घर पर अकेली रहती हैं। पीड़िता के मुताबिक, इस परिस्थिति में उनके लिए किसी विवाद या घटना के बाद सहायता प्राप्त करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।महिला का आरोप है कि मारपीट की घटना के बाद उन्होंने मदद के लिए डायल 112 पर सूचना दी। इसके बाद वह अपनी शिकायत लेकर जलालपुर थाने पहुंचीं और लिखित प्रार्थना पत्र देकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।पीड़िता चाहती हैं कि उनकी शिकायत पर निष्पक्ष तरीके से जांच हो और यदि मारपीट की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि पुलिस ने शिकायत पर कोई औपचारिक जांच शुरू की है या नहीं।

पुलिस पर मेडिकल परीक्षण न कराने का आरोप

इस मामले में पीड़िता ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि थाने में शिकायत देने के बाद भी उनकी बात पर उचित कार्रवाई नहीं की गई। महिला का कहना है कि पुलिस ने उनका मेडिकल परीक्षण कराने की व्यवस्था भी नहीं की। उन्हें कथित तौर पर यह कहकर वापस जाने को कहा गया कि वह अपना मेडिकल परीक्षण खुद करा लें और घर चली जाएं। यदि महिला का यह आरोप सही पाया जाता है, तो यह शिकायत के निस्तारण और पीड़ित को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर सकता है। पुलिस की ओर से इस मामले में आधिकारिक पक्ष या कार्रवाई का विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए पुलिस ने शिकायत पर क्या कदम उठाए, मेडिकल परीक्षण को लेकर क्या प्रक्रिया अपनाई गई और आरोपों की जांच की स्थिति क्या है, इसकी पुष्टि संबंधित अधिकारियों के बयान से होना आवश्यक है।

महिला सुरक्षा के दावों के बीच शिकायत पर कार्रवाई की मांग

महिला ने पुलिस से न्याय की गुहार लगाते हुए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि एक ओर महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूकता के लिए अभियान चलाए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर यदि किसी महिला की शिकायत पर सुनवाई नहीं होती है तो उसका भरोसा प्रभावित होता है।महिला सुरक्षा केवल जागरूकता कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है। किसी भी पीड़ित की शिकायत मिलने पर उसकी बात सुनना, तथ्यों की जांच करना और जरूरत के अनुसार उचित सहायता उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है। ऐसे मामलों में पुलिस की निष्पक्ष और संवेदनशील भूमिका पीड़ित को न्याय दिलाने की दिशा में अहम होती है।रुकुनपुर कासिमपुर की इस घटना में भी मुख्य सवाल यही है कि महिला के लगाए गए मारपीट के आरोपों की जांच किस तरह की जाती है और उसकी शिकायत पर क्या कार्रवाई होती है। पीड़िता का कहना है कि वह अपने उधार दिए गए रुपये मांगने गई थीं, लेकिन विवाद के बाद उन्हें पुलिस से भी अपेक्षित मदद नहीं मिली।

निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

इस मामले में सामने आई जानकारी पीड़िता के आरोपों पर आधारित है। घटना के संबंध में पुलिस का आधिकारिक बयान, शिकायत की वर्तमान स्थिति और दूसरे पक्ष का पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की जांच जरूरी है।पीड़िता की मांग है कि उनकी लिखित शिकायत पर उचित कार्रवाई की जाए, मारपीट के आरोपों की जांच हो और मेडिकल परीक्षण से संबंधित शिकायत की भी पड़ताल की जाए। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जलालपुर पुलिस इस मामले में क्या कदम उठाती है और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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