रिपोर्ट : दीपचंद्र दीक्षित
फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के शमशाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम कासिमपुर तराई से अवैध मिट्टी खनन के गंभीर आरोप सामने आए हैं। सोशल मीडिया पर एक कथित वीडियो वायरल होने के बाद पूरे क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों का दावा है कि दिनदहाड़े खेतों से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए बड़े पैमाने पर मिट्टी निकाली जा रही है, जिससे उपजाऊ कृषि भूमि को भारी नुकसान पहुंच रहा है। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक प्रशासनिक स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच की मांग उठाई गई है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो खेती-किसानी के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा मंडरा सकता है। अब ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और खनन विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
वायरल वीडियो के बाद बढ़ी हलचल
कासिमपुर तराई में कथित अवैध मिट्टी खनन का मामला तब चर्चा में आया, जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो में कथित रूप से खेतों से मिट्टी निकालने का दृश्य दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और न ही प्रशासन की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि की गई है।
ग्रामीणों का आरोप—दिनदहाड़े निकाली जा रही मिट्टी
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से खेतों से मिट्टी निकाली जा रही है। उनका कहना है कि यह कार्य खुलेआम किया जा रहा है और इससे खेती योग्य भूमि लगातार प्रभावित हो रही है।ग्रामीणों के अनुसार, कई खेतों में इतनी अधिक मिट्टी निकाली जा चुकी है कि वहां 10 से 15 फीट तक गहरे गड्ढे बन गए हैं। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में कृषि योग्य भूमि का स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है।
खेती और किसानों पर संकट की आशंका
किसानों का कहना है कि मिट्टी किसी भी खेत की सबसे बड़ी पूंजी होती है। लगातार ऊपरी उपजाऊ परत हटने से खेतों की उत्पादकता पर सीधा असर पड़ता है।ग्रामीणों के मुताबिक, धान समेत अन्य फसलों की खेती प्रभावित होने की आशंका है। उनका कहना है कि यदि बड़े पैमाने पर मिट्टी का दोहन जारी रहा तो आने वाले वर्षों में कई खेत बंजर होने की स्थिति में पहुंच सकते हैं।

बरसात में हादसों का डर
ग्रामीणों ने एक और गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि जिन स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं, वहां बरसात और बाढ़ के दौरान पानी भर सकता है।
ऐसी स्थिति में:
- खेतों तक पहुंचने वाले किसानों के लिए खतरा बढ़ जाएगा।
- मवेशियों के गिरने की आशंका बनी रहेगी।
- छोटे बच्चों के लिए दुर्घटना का जोखिम बढ़ सकता है।
- आसपास की फसलें जलभराव से प्रभावित हो सकती हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इन गड्ढों को नहीं भरा गया तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है।
पहले भी शिकायतों का दावा
कुछ ग्रामीणों ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर दावा किया कि इस संबंध में पहले भी संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई थी, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान भी सामने नहीं आया है।
जांच की उठी मांग
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद ग्रामीणों ने जिलाधिकारी, खनन विभाग और प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में अवैध खनन की पुष्टि होती है, तो इसमें शामिल लोगों के खिलाफ खनन नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।साथ ही उन्होंने कटरी क्षेत्र में अवैध खनन पर स्थायी रूप से रोक लगाने की भी मांग की है।
पर्यावरण पर भी पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित मिट्टी खनन केवल कृषि भूमि को ही नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन पर भी असर डाल सकता है।लगातार मिट्टी हटने से:
- भूमि कटाव बढ़ सकता है।
- वर्षा जल का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हो सकता है।
- भूजल स्तर पर असर पड़ सकता है।
- खेतों की प्राकृतिक उर्वरता कम हो सकती है।
इसी वजह से खनन गतिविधियों के लिए कानूनी अनुमति और निर्धारित मानकों का पालन आवश्यक माना जाता है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले में जिला प्रशासन या खनन विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।ग्रामीणों को उम्मीद है कि वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग मौके पर जांच करेगा और यदि किसी प्रकार की अनियमितता मिलती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सोशल मीडिया पर भी तेज हुई चर्चा
वायरल वीडियो के बाद स्थानीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि बिना जांच किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए।विशेषज्ञों का भी मानना है कि सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी वीडियो को अंतिम सत्य मानने के बजाय प्रशासनिक जांच का इंतजार करना चाहिए।फर्रुखाबाद के कासिमपुर तराई में कथित अवैध मिट्टी खनन को लेकर उठे सवालों ने स्थानीय प्रशासन और खनन विभाग का ध्यान अपनी ओर खींचा है। ग्रामीणों का आरोप है कि खेतों से बड़े पैमाने पर मिट्टी निकाले जाने से कृषि भूमि, पर्यावरण और जनसुरक्षा पर खतरा बढ़ रहा है। हालांकि, इन आरोपों और वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की जांच पर टिकी हैं। यदि जांच में अवैध खनन की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और क्षेत्र में अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाने की मांग और तेज हो सकती है।
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