आजमगढ़ में चार मौतें: पत्नी, दो पुजारी और बेटे की मौत, आरोपी एनकाउंटर में ढेर

Editorial
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आजमगढ़ उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में एक ही परिवार और धार्मिक अनुष्ठान से जुड़े लोगों की हत्या की घटना से इलाके में सनसनी फैल गई। अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में मंगलवार को एक व्यक्ति ने कथित तौर पर अपनी पत्नी और अनुष्ठान में शामिल दो पुजारियों की हत्या कर दी। इसके बाद आरोपी अपने तीन बच्चों को लेकर घर के एक कमरे में बंद हो गया। कई घंटे तक पुलिस ने उसे आत्मसमर्पण करने और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए समझाने का प्रयास किया। करीब सात घंटे बाद स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने कमरे में प्रवेश किया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वह घायल हो गया। अस्पताल ले जाने पर उसकी मौत हो गई।इसी घटनाक्रम के दौरान आरोपी की गोली से घायल हुए उसके नौ वर्षीय बेटे की भी उपचार के दौरान मौत हो गई। इस तरह घटना में मृतकों की संख्या चार हो गई। पुलिस ने आरोपी की दो अन्य संतानों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

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पूजा के दौरान विवाद के बाद बिगड़े हालात

पुलिस के अनुसार, घटना की शुरुआत भाई की आत्मा की शांति के लिए कराए जा रहे धार्मिक अनुष्ठान के दौरान हुए विवाद से हुई। शंभूपुर गांव में पांच दिवसीय अनुष्ठान चल रहा था और घटना के दिन इसका चौथा दिन था।पुलिस का कहना है कि इसी दौरान आरोपी अरविंद कुमार का विवाद हुआ। विवाद बढ़ने के बाद उसने कथित तौर पर अपनी पत्नी बबिता सिंह और अनुष्ठान में शामिल अखिलेश मिश्रा तथा महेंद्र पाठक पर गोली चला दी। तीनों की मौके पर ही मौत हो गई।घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। तब तक आरोपी अपने तीन बच्चों के साथ घर के एक कमरे में चला गया था और उसने खुद को अंदर बंद कर लिया था। उसके पास लाइसेंसी हथियार होने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने बेहद सतर्कता के साथ पूरे इलाके को घेर लिया।

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बच्चों को लेकर कमरे में बंद था आरोपी

पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती कमरे में मौजूद तीन बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की थी। पुलिस अधिकारियों ने आरोपी से बातचीत शुरू की और उसे आत्मसमर्पण करने के लिए समझाया। परिजनों और पुलिस की ओर से भी उसे समझाने का प्रयास किया गया।पुलिस के अनुसार, आरोपी बच्चों को भी नुकसान पहुंचाने की धमकी दे रहा था। इसी वजह से पुलिस ने तत्काल कमरे में घुसने के बजाय काफी समय तक बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की।करीब सात घंटे तक पुलिस टीम आरोपी से संपर्क बनाए रही। इस दौरान अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और बिना किसी और नुकसान के आरोपी को आत्मसमर्पण के लिए तैयार करना था।

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अचानक कमरे के अंदर से चली गोली

कई घंटे की बातचीत के बाद अचानक कमरे के अंदर से गोली चलने की आवाज सुनाई दी। इसके बाद पुलिस को आशंका हुई कि कमरे के अंदर मौजूद बच्चों की जान तत्काल खतरे में हो सकती है।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस टीम ने तत्काल ऑपरेशन शुरू किया। पुलिस के अनुसार, घर में प्रवेश करने के लिए स्टन ग्रेनेड और टियर गैस ग्रेनेड का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद दरवाजा तोड़कर पुलिस टीम अंदर दाखिल हुई।पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, टीम के कमरे में पहुंचते ही आरोपी ने पुलिसकर्मियों पर फायरिंग कर दी। उसने कई राउंड गोलियां चलाईं। इसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा और बच्चों की सुरक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई की।

जवाबी कार्रवाई में आरोपी घायल

पुलिस के मुताबिक, जवाबी फायरिंग में अरविंद घायल हो गया। पुलिस टीम ने उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के पास लाइसेंसी रिवॉल्वर थी। पुलिस का कहना है कि उसके द्वारा फायरिंग किए जाने के बाद जवाबी कार्रवाई की गई।घटना के पूरे क्रम की जांच के लिए पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। फॉरेंसिक टीम ने भी मौके पर पहुंचकर आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए।

बेटे की भी उपचार के दौरान मौत

कमरे में पुलिस को आरोपी का नौ वर्षीय बेटा शौर्य सिंह गोली लगने से घायल अवस्था में मिला। उसे तत्काल इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। चिकित्सकों ने बच्चे को बचाने का प्रयास किया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।पुलिस टीम ने आरोपी की 10 वर्षीय बेटी परी और छह माह की बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बड़ी बेटी की कोहनी के पास मामूली खरोंच आने की जानकारी सामने आई है।इस घटना ने पूरे गांव को झकझोर दिया है। एक ही परिवार में हुई इस त्रासदी के बाद गांव में मातम का माहौल है।

पुलिस ने घटनास्थल को घेरा, फोरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य

घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। अपर पुलिस महानिदेशक वाराणसी जोन नवीन अरोड़ा और डीआईजी आजमगढ़ परिक्षेत्र सुनील कुमार सिंह कई घंटे घटनास्थल पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने मौके पर पुलिस टीम से घटना की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।पुलिस ने सभी मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटनास्थल से मिले साक्ष्यों को भी जांच के लिए सुरक्षित किया गया है। पुलिस अब घटना से जुड़े हर पहलू की जांच कर रही है।

परिवार ने मानसिक स्थिति को लेकर कही यह बात

परिजनों के अनुसार, अरविंद की मानसिक स्थिति ठीक नहीं रहती थी। बताया गया कि घर में भूत-प्रेत की बाधा दूर करने के उद्देश्य से पांच दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान कराया जा रहा था। घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था, यह पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।पुलिस की ओर से फिलहाल घटना के संबंध में उपलब्ध साक्ष्यों और प्रत्यक्ष जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

सात घंटे के ऑपरेशन के बाद खत्म हुआ घटनाक्रम

आजमगढ़ के शंभूपुर गांव में मंगलवार को शुरू हुआ यह घटनाक्रम कई घंटे तक चला। पहले पत्नी और दो पुजारियों की हत्या की सूचना ने पूरे इलाके को हिला दिया। इसके बाद आरोपी का तीन बच्चों के साथ कमरे में बंद होना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया।करीब सात घंटे तक पुलिस ने आत्मसमर्पण के लिए बातचीत की। लेकिन कमरे के अंदर से गोली चलने के बाद पुलिस को तत्काल कार्रवाई करनी पड़ी। कमरे में प्रवेश के बाद हुई फायरिंग में आरोपी घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई। इसी दौरान घायल बेटे की भी अस्पताल में मौत हो गई।फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक साक्ष्य, घटनास्थल की जांच और अन्य उपलब्ध तथ्यों के आधार पर घटना की परिस्थितियों को स्पष्ट किया जाएगा।आजमगढ़ की इस घटना ने एक साथ कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। पुलिस की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि धार्मिक अनुष्ठान के दौरान विवाद किस वजह से शुरू हुआ, घटनाक्रम किस तरह बढ़ा और आखिर आरोपी ने अपने परिवार तथा अनुष्ठान में शामिल लोगों के खिलाफ इतना बड़ा कदम क्यों उठाया।

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